फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   Could lead to market organically Gurifnta

बवाल की वजह बन सकता है गौरीफंटा बाजार

Wed, 09 Dec 2015 10:27 PM IST
लखीमपुर खीरी।
लखीमपुर खीरी। Updated Wed, 09 Dec 2015 10:27 PM IST
विज्ञापन
नेपाल में नया संविधान लागू होने के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में चल रहे विवाद और आईएस की बढ़ती आतंकी गतिविधियों के कारण खीरी जिले में नेपाल बार्डर पर चल रहा अवैध गौरीफंटा बाजार बवाल की वजह बन सकता है। एलआईयू और पलिया के एसडीएम की इस आशय की रिपोर्ट के साथ डीएम किंजल सिंह ने शासन को अपनी राय से अवगत कराते हुए दिशा निर्देश मांगे हैं। डीएम के इस पत्र से प्रशासन और वन विभाग के बीच चल रहे शीतयुद्ध में बीच एक नई कड़ी जुड़ गई है।
विज्ञापन

 नेपाल में संविधान की औपचारिक घोषणा के बाद नेपाली समाज के विरोध को देेखते हुए 29 सितंबर 2015 को भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने प्रदेश के प्रमुख सचिव को दिशा निर्देश जारी किए थे।
विज्ञापन

शासन के निर्देश पर डीएम ने बार्डर का भ्रमण कर पुलिस, एसएसबी और एसडीएम को सुरक्षा पर ध्यान देने को कहा था। इसी सिलसिले में एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट में  गौरीफंटा बाजार को अवैध, अनियंत्रित और अपंजीकृत बताते हुए यहां तस्करी की बात कही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

उन्होंने लिखा है कि हाईकोर्ट द्वारा इस बाजार को हटाने के निर्देश के बाद भी वन अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से 50-60 दुकानें चल रही हैं। उधर एक से पांच दिसंबर तक की एलआईयू रिपोर्ट में भी गौरीफंटा बाजार में हिंसक वारदात होने की आशंका जताई गई है।
रिपोर्ट में आईएस की आतंकी गतिविधियों के मद्देनजर भी इन दुकानों को तत्काल हटाने की आवश्यकता बताई गई है। डीएम ने मामले की रिपोर्ट प्रमुख सचिव गृह के अलावा मुख्य सचिव, पुलिस और सभी सुरक्षा एजेंसियों को भेजी है।

अवैध बाजार का यह है मामला
भारत नेपाल सीमा पर स्थित गौरीफंटा मंडी वन क्षेत्र में करीब 70 व्यापारी अवैध रूप से व्यापार कर रहे थे। इस मामले में दुकानें हटाने का प्रयास हुआ तो 2011 में 16 व्यापारी हाईकोर्ट चले गए थे। हाईकोर्ट ने उनकी अर्जी पर गौर करते हुए अगली सुनवाई तक  याचियों को बेदखल न करने को कहा था। तब16 व्यापारियों को छोड़कर बाजार हटवा दिया गया था। लेकिन बाद में फिर वे आबाद हो गए। 24 मार्च 2014 को 16 की याचिका भी खारिज हो गई लेकिन बाजार अब भी चल रहा है। एसडीएम पलिया प्रमिल कुमार सिंह की रिपोर्ट के अनुसार वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी इन व्यापारियों से साठगांठ करके इन्हें बेदखल नहीं होने दे रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed