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Siddharthnagar News: सिस्टम सील, रजिस्टरों की शुरू हुई जांच
Mon, 14 Sep 2026 11:25 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 14 Sep 2026 11:25 PM IST
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सिद्धार्थनगर। फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किए जाने के मामले में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग में हलचल बढ़ गई है। मामले में जिले का नाम आने के बाद जिस कंप्यूटर सिस्टम से संबंधित कार्य किया जाता था, उसे टीम ने सील कराकर सुरक्षित रखा गया है।
वहीं वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षण जय प्रकाश शुक्ल के पकड़े जाने के बाद संबंधित पटल से जुड़े रजिस्टर और अब तक जारी किए गए प्रमाण पत्रों की जांच की जा रही है।
इतना ही नहीं विभागीय अफसर रजिस्टर में दर्ज विवरण का प्रमाण पत्रों से मिलान कराने में जुट गए हैं। इसके अलावा पिछले वर्षों में इस पटल पर तैनात रहे कर्मचारियों और उनके कार्य की जानकारी भी जुटाई जा रही है। विभागीय अधिकारी पुलिस जांच में मांगी गई सूचनाओं को उपलब्ध कराने में जुटी है।
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दिल्ली विश्वविद्यालय समेत अन्य शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए लगाए गए फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्रों की जांच के दौरान इसके तार सिद्धार्थनगर, बरेली और बदायूं से जुड़े हैं। इसी क्रम में दिल्ली पुलिस की टीम ने 10 सितंबर को सीएमओ कार्यालय में तैनात वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक जय प्रकाश शुक्ल को पूछताछ के बाद अपने साथ ले गई। इसके बाद संबंधित पटल से अब तक जारी किए गए दिव्यांगता प्रमाण पत्रों और रजिस्टरों की जांच शुरू कर दी गई है।
ये है मामला : दिल्ली विश्वविद्यालय और अन्य शैक्षिक संस्थानों में प्रवेश के लिए अभ्यर्थियों ने लाभ लेने के लिए दिव्यांगता प्रमाण पत्र लगाए थे। अगस्त में हुई जांच के दौरान कुछ प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। इस मामले में उत्तरी दिल्ली के मौरिस नगर थाने में स्पेशल स्टाफ की ओर से 13 अगस्त को प्राथमिकी दर्ज कराई। जांच आगे बढ़ी तो इसके तार बरेली और बदायूं के साथ सिद्धार्थनगर से भी जुड़े मिले।
दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आए 16 फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्रों में आठ बरेली और चार-चार सिद्धार्थनगर व बदायूं से जारी होना बताया गया। इसी आधार पर दिल्ली पुलिस की टीम ने 10 सितंबर को सीएमओ कार्यालय के वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक जय प्रकाश शुक्ल को पूछताछ के लिए उठाया। कार्यालय में बंद कमरे में कई घंटे पूछताछ के बाद टीम उसे अपने साथ दिल्ली ले गई।
हजारों प्रमाण पत्र जांच के दायरे में : विभागीय सूत्रों के अनुसार जय प्रकाश शुक्ल वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक के पद पर तैनात था। बताया जा रहा है कि पिछले करीब 12 वर्षों से वह अचल प्रशिक्षण केंद्र में दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने वाले पटल पर सहयोगी के रूप में काम कर रहा था।
कर्मचारी की कमी के चलते उसे इस पटल से जोड़े जाने की बात कही जा रही है लेकिन लंबे समय तक वहां तैनाती रहने को लेकर भी अब सवाल उठ रहे हैं। बताया गया कि इस पटल पर तैनात कर्मचारियों के साथ वह काम करता था और लॉग इन व पासवर्ड के संचालन की जानकारी भी रखता था।
एक माह में बनते हैं 200 से 250 प्रमाण पत्र : प्रत्येक सोमवार को दिव्यांगता प्रमाण पत्र के लिए शिविर लगाया जाता है। विभागीय जानकारी के अनुसार एक माह में करीब 200 से 250 और साल में लगभग तीन हजार प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं। ऐसे में पिछले 12 वर्षों के दौरान जारी किए गए हजारों प्रमाण पत्र जांच के दायरे में आ सकते हैं।
विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि इस अवधि में जारी प्रमाण पत्रों में कहीं अनियमितता तो नहीं हुई। यदि जांच का दायरा बढ़ता है तो नौकरी और प्रवेश में इन प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल करने वाले लोग भी जांच के
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वहीं वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षण जय प्रकाश शुक्ल के पकड़े जाने के बाद संबंधित पटल से जुड़े रजिस्टर और अब तक जारी किए गए प्रमाण पत्रों की जांच की जा रही है।
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इतना ही नहीं विभागीय अफसर रजिस्टर में दर्ज विवरण का प्रमाण पत्रों से मिलान कराने में जुट गए हैं। इसके अलावा पिछले वर्षों में इस पटल पर तैनात रहे कर्मचारियों और उनके कार्य की जानकारी भी जुटाई जा रही है। विभागीय अधिकारी पुलिस जांच में मांगी गई सूचनाओं को उपलब्ध कराने में जुटी है।
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दिल्ली विश्वविद्यालय समेत अन्य शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए लगाए गए फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्रों की जांच के दौरान इसके तार सिद्धार्थनगर, बरेली और बदायूं से जुड़े हैं। इसी क्रम में दिल्ली पुलिस की टीम ने 10 सितंबर को सीएमओ कार्यालय में तैनात वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक जय प्रकाश शुक्ल को पूछताछ के बाद अपने साथ ले गई। इसके बाद संबंधित पटल से अब तक जारी किए गए दिव्यांगता प्रमाण पत्रों और रजिस्टरों की जांच शुरू कर दी गई है।
ये है मामला : दिल्ली विश्वविद्यालय और अन्य शैक्षिक संस्थानों में प्रवेश के लिए अभ्यर्थियों ने लाभ लेने के लिए दिव्यांगता प्रमाण पत्र लगाए थे। अगस्त में हुई जांच के दौरान कुछ प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। इस मामले में उत्तरी दिल्ली के मौरिस नगर थाने में स्पेशल स्टाफ की ओर से 13 अगस्त को प्राथमिकी दर्ज कराई। जांच आगे बढ़ी तो इसके तार बरेली और बदायूं के साथ सिद्धार्थनगर से भी जुड़े मिले।
दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आए 16 फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्रों में आठ बरेली और चार-चार सिद्धार्थनगर व बदायूं से जारी होना बताया गया। इसी आधार पर दिल्ली पुलिस की टीम ने 10 सितंबर को सीएमओ कार्यालय के वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक जय प्रकाश शुक्ल को पूछताछ के लिए उठाया। कार्यालय में बंद कमरे में कई घंटे पूछताछ के बाद टीम उसे अपने साथ दिल्ली ले गई।
हजारों प्रमाण पत्र जांच के दायरे में : विभागीय सूत्रों के अनुसार जय प्रकाश शुक्ल वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक के पद पर तैनात था। बताया जा रहा है कि पिछले करीब 12 वर्षों से वह अचल प्रशिक्षण केंद्र में दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने वाले पटल पर सहयोगी के रूप में काम कर रहा था।
कर्मचारी की कमी के चलते उसे इस पटल से जोड़े जाने की बात कही जा रही है लेकिन लंबे समय तक वहां तैनाती रहने को लेकर भी अब सवाल उठ रहे हैं। बताया गया कि इस पटल पर तैनात कर्मचारियों के साथ वह काम करता था और लॉग इन व पासवर्ड के संचालन की जानकारी भी रखता था।
एक माह में बनते हैं 200 से 250 प्रमाण पत्र : प्रत्येक सोमवार को दिव्यांगता प्रमाण पत्र के लिए शिविर लगाया जाता है। विभागीय जानकारी के अनुसार एक माह में करीब 200 से 250 और साल में लगभग तीन हजार प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं। ऐसे में पिछले 12 वर्षों के दौरान जारी किए गए हजारों प्रमाण पत्र जांच के दायरे में आ सकते हैं।
विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि इस अवधि में जारी प्रमाण पत्रों में कहीं अनियमितता तो नहीं हुई। यदि जांच का दायरा बढ़ता है तो नौकरी और प्रवेश में इन प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल करने वाले लोग भी जांच के