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मुफलिसी में दिन गुजार रहा मृतकों का परिवार
Updated Thu, 28 Sep 2017 11:57 PM IST
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मुफलिसी में दिन गुजार रहा मृतकों का परिवार
- फोटो : लखीमपुर खीरी, अमर उजाला
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हादसे का शिकार बने गांव मंझरा गौढ़ी निवासी दो सगे भाइयों का परिवार मुफलिसी का जीवन गुजार रहा है। पांच बेटों में दो बेटों की मौत होने के बाद से पिता घनश्याम टूट गया। उसका रो-रोकर बुरा हाल है। उधर, गांव में भी मातमी सन्नाटा है।
गांव मंझरा गौढ़ी निवासी घनश्याम काफी गरीब है। रोते-बिलखते घनश्याम ने बताया कि उसके पांच बेटे हैं। गरीबी के कारण बड़ा पुत्र देशराज हरियाणा और दूसरा पुत्र पैकरमा राजस्थान में परिवार समेत रहकर मजदूरी करता है। पत्नी की बीमारी के चलते सात साल पहले मौत हो चुकी है। तीन पुत्र 18 वर्षीय सूरती प्रसाद, 14 वर्षीय रामसहारे और सबसे छोटे पुत्र लक्ष्मी नरायन उसके साथ रहते हैं। पुत्र सूरती प्रसाद और रामसनेही नकहा स्थित एक होटल पर 750 रुपये प्रति माह पर गिलास और बर्तन धोने का कार्य करते थे, जिससे उसके परिवार की दो वक्त की रोटी चलती थी।
घर में महिलाएं न होने के कारण घनश्याम खुद ही खाना बनाते और चौका-बर्तन करते हैं। हादसे में एक साथ दो बेटों को खोने वाले घनश्याम पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। आसपास के लोग उसे दिलासा दे रहे हैं।
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...और चौकीदार के सिर से टल गई मौत
घटना के चंद मिनट पहले उसी स्थान पर गांव का चौकीदार भीम बैठा था। भला हो चौकी इंचार्ज नकहा कल्लू सिंह का, जो घटना से तीन मिनट पहले ही आकर चौकीदार को गश्त के लिए अपने साथ बुला ले गए। इससे चौकीदार की जान बच गई। यदि वह वहां तीन-चार मिनट और रुकता तो अन्य दो लोगों के साथ उसकी जान जाना भी तय था। एसओ आलोक मणि त्रिपाठी ने बताया कि नकहा चौकी इंचार्ज कल्लू सिंह चौकीदार भीम को घटना के तीन मिनट पहले ही अपनी बाइक पर बैठाकर बाजार में गश्त करने गए थे। इसी बीच हादसा हो गया, जिससे चौकीदार की जान तो बच गई, लेकिन उसकी बाइक पूरी तरह से चकनाचूर हो गई।
हाईवे से दूर होता होटल तो बच सकती थी जान
नकहा चौराहा अतिक्रमण की गिरफ्त में है। पीलीभीत-बस्ती हाईवे के किनारे दुकानदारों ने अतिक्रमण कर रखा है। सब कुछ देखने के बाद भी पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने अतिक्रमण हटाने की कभी जरूरत नहीं समझी। लोगों का कहना है कि हाईवे से सटी दुकानें होने के कारण आए दिन दुर्घटनाओं का भय रहता है। सड़क के दोनों ओर प्रशासनिक अफसर और पुलिस अतिक्रमण हटवा देती तो शायद दोनों भाइयों की जान नहीं जाती।
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हादसे का शिकार बने गांव मंझरा गौढ़ी निवासी दो सगे भाइयों का परिवार मुफलिसी का जीवन गुजार रहा है। पांच बेटों में दो बेटों की मौत होने के बाद से पिता घनश्याम टूट गया। उसका रो-रोकर बुरा हाल है। उधर, गांव में भी मातमी सन्नाटा है।
गांव मंझरा गौढ़ी निवासी घनश्याम काफी गरीब है। रोते-बिलखते घनश्याम ने बताया कि उसके पांच बेटे हैं। गरीबी के कारण बड़ा पुत्र देशराज हरियाणा और दूसरा पुत्र पैकरमा राजस्थान में परिवार समेत रहकर मजदूरी करता है। पत्नी की बीमारी के चलते सात साल पहले मौत हो चुकी है। तीन पुत्र 18 वर्षीय सूरती प्रसाद, 14 वर्षीय रामसहारे और सबसे छोटे पुत्र लक्ष्मी नरायन उसके साथ रहते हैं। पुत्र सूरती प्रसाद और रामसनेही नकहा स्थित एक होटल पर 750 रुपये प्रति माह पर गिलास और बर्तन धोने का कार्य करते थे, जिससे उसके परिवार की दो वक्त की रोटी चलती थी।
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घर में महिलाएं न होने के कारण घनश्याम खुद ही खाना बनाते और चौका-बर्तन करते हैं। हादसे में एक साथ दो बेटों को खोने वाले घनश्याम पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। आसपास के लोग उसे दिलासा दे रहे हैं।
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...और चौकीदार के सिर से टल गई मौत
घटना के चंद मिनट पहले उसी स्थान पर गांव का चौकीदार भीम बैठा था। भला हो चौकी इंचार्ज नकहा कल्लू सिंह का, जो घटना से तीन मिनट पहले ही आकर चौकीदार को गश्त के लिए अपने साथ बुला ले गए। इससे चौकीदार की जान बच गई। यदि वह वहां तीन-चार मिनट और रुकता तो अन्य दो लोगों के साथ उसकी जान जाना भी तय था। एसओ आलोक मणि त्रिपाठी ने बताया कि नकहा चौकी इंचार्ज कल्लू सिंह चौकीदार भीम को घटना के तीन मिनट पहले ही अपनी बाइक पर बैठाकर बाजार में गश्त करने गए थे। इसी बीच हादसा हो गया, जिससे चौकीदार की जान तो बच गई, लेकिन उसकी बाइक पूरी तरह से चकनाचूर हो गई।
हाईवे से दूर होता होटल तो बच सकती थी जान
नकहा चौराहा अतिक्रमण की गिरफ्त में है। पीलीभीत-बस्ती हाईवे के किनारे दुकानदारों ने अतिक्रमण कर रखा है। सब कुछ देखने के बाद भी पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने अतिक्रमण हटाने की कभी जरूरत नहीं समझी। लोगों का कहना है कि हाईवे से सटी दुकानें होने के कारण आए दिन दुर्घटनाओं का भय रहता है। सड़क के दोनों ओर प्रशासनिक अफसर और पुलिस अतिक्रमण हटवा देती तो शायद दोनों भाइयों की जान नहीं जाती।