फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   प्रशासन ने जबरन करा दी हदबंदी, तनाव बरकरार, पीएसी हटाई

प्रशासन ने जबरन करा दी हदबंदी, तनाव बरकरार, पीएसी हटाई

Tue, 19 Feb 2019 11:30 PM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Tue, 19 Feb 2019 11:30 PM IST
विज्ञापन
प्रशासन ने जबरन करा दी हदबंदी, तनाव बरकरार, पीएसी हटाई
गोला गोकर्णनाथ। डॉ. बीआर आंबेडकर की प्रतिमा लगाए जाने को लेकर तहसील सदर के गांव कोरैया में उपजे तनाव को प्रशासन भले ही शांत करा देने का दावा कर रहा है, लेकिन दोनों पक्षों को खदेड़ने के बाद आंबेडकर पार्क की कराई गई हदबंदी से ग्रामीणों में गुस्से की चिंगारी पनप रही है। वहीं पुलिस ने सिर्फ दलितों पर कार्रवाई की है, जिससे लोग गुस्से में हैं। अनुसूचित जाति के लोग कह रहे हैं कि प्रशासन ने हदबंदी अपने मनमाफिक कर दी है, जबकि भूमि मालिक के पुत्र अनुराग मिश्रा का कहना है कि उनकी करीब दो बीघा जमीन पार्क में शामिल कर दी गई है। उनके साथ अन्याय हुआ है। इससे गांव में तनाव है। हालांकि प्रशासन ने पीएसी हटा ली है।
विज्ञापन

तहसील सदर और थाना हैदराबाद के गांव कोरैया में शेरपुर निवासी राजेश्वरी देवी पत्नी अमरनाथ मिश्रा का खेत है। कोरैया निवासी कुछ लोगों ने इस खेत में बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा लगा दी थी। प्रतिमा हटाने को लेकर 17 फरवरी को खेत मालिक पक्ष के लोग गांव पहुंच गए। गांव में बवाल की आशंका पर पुलिस और तहसील के अधिकारी भी पहुंचे। इसी दौरान कुछ लोगों ने प्रतिमा पलट दी, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण प्रतिमा नहीं हटाई जा सकी। बताते हैं इस दौरान अनुसूचित जाति की महिलाएं लाठी डंडे लेकर आ गईं थीं, जिससे पुलिस और राजस्व कर्मियों को भागना पड़ा। प्रतिमा की सुरक्षा में रातभर पुलिस और पीएसी लगी रही। गांव की महिलाओं ने भी खेत में ही डेरा जमा लिया था। अगले दिन एसडीएम अखिलेश सिंह यादव तहसीलदार विपिन कुमार द्विवेदी और सीओ मोहम्मदी श्रेष्ठा ठाकुर के साथ कई थानों की पुलिस और पीएसी मौके पर पहुंची। पहले दोनों पक्षों की मौजूदगी में आंबेडकर पार्क की पैमाइश कराई गई, फिर मौके से प्रतिमा को हटाने के लिए कहा गया, लेकिन अनुसूचित जाति के लोगों ने विरोध कर दिया। एसडीएम अखिलेश यादव कहते हैं कि सहमति के आधार पर आंबेडकर पार्क की हदबंदी कर दी गई है। साथ ही कहा गया कि डीएम की अनुमति मिलने तक आंबेडकर प्रतिमा को ग्राम प्रधान कुमोदनी वाजपेयी के सुपुर्दकर दिया गया है। वहीं गांव निवासी रूपराम, केदारीलाल, श्रवण कुमार आदि पूरे गांव का कहना है कि पुलिस ने गांव वालों को मारते पीटते खदेड़ दिया। महिलाओं को भी नहीं बख्शा और मनमाफिक हदबंदी कर आंबेडकर प्रतिमा उठा ले गए। जो जमीन दी गई है, उसके पास निकला रास्ता और बाग में भी पार्क की जमीन है। वहीं खेत स्वामी के पुत्र अनुराग मिश्र भी प्रशासनिक कार्रवाई से खुश नहीं हैं। वह कहते हैं कि उनकी दो बीघा जमीन पार्क में नाप दी गई है।
विज्ञापन


प्रधानी चुनाव की राजनीति में सुलग रहा कोरैया गांव
गांव कोरैया के लोग बताते हैं कि 1995 में आंबेडकर पार्क के नाम जमीन आवंटित की गई थी, लेकिन काफी प्रयास के बाद भी पार्क नहीं बन सका। वर्ष 2001 में प्रधान कुमोदिनी वाजपेयी ने कोरैया से बांसगांव के लिए पार्क भूमि के बीच से कच्चा मार्ग पाट दिया गया। वजह थी कि इस मार्ग के बनने से बांसगांव और शेरपुर के लोगों को फायदा मिल रहा था। गांव निवासी रूपराम कहते हैं कि प्रधानी चुनाव में इन गांवों के वोट अपने पक्ष में करने के लिए यह रास्ता बनाया गया था। तब उन लोगों को जानकारी नहीं थी कि यहां पर पार्क की भूमि है। बाद में जानकारी हुई कि बाग का कुछ हिस्सा और रास्ता भी पार्क में है। तभी से विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। कुल मिलाकर प्रधानी चुनाव की राजनीति में कोरैया गांव सुलग रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन



गांव में पुलिस ने की थी मारपीट, महिलाओं को भी न छोड़ा
कोरैया गांव में विवाद के दौरान हैदराबाद पुलिस ने मारपीट की थी। गांव निवासी अनीता देवी और करुणा देवी को पीटा भी गया था। दोनों महिलाओं ने रो-रोकर पुलिस की करतूत बयां की। अनीता देवी ने बताया कि पुलिस घर में घुस आई और उनके बाल पकड़कर उन्हें पीटा। वहीं करुणा देवी ने बताया कि पुलिस ने उन्हें धक्का देकर गिरा दिया और मारा पीटा


कोरैया वाले बोले, पुलिस ने उनकी एक न सुनी, रिपोर्ट तक न लिखी
गांव कोरैया निवासी रूपराम का कहना है कि पुलिस ने उनके साथ न सिर्फ ज्यादती की है, बल्कि प्रार्थना पत्र पर रिपोर्ट तक नहीं लिखी। गांव निवासी रामभरोसे, कुंज बिहारी और तोताराम का कहना है कि उनके लोगों को पीटा गया। महिलाओं तक को नहीं छोड़ा गया। उनके पास आंबेडकर परिवर्तन पार्क के नाम से खाते हैं। उन्हें वही जमीन चाहिए। चाहे उसमें किसी का खेत आए, रास्ता हो या फिर बाग। वह लोग पार्क की जमीन पर वर्षों से जोत और बो रहे हैं। प्रशासन को तो उन पर जुर्माना करना चाहिए।

आखिर किसकी मिलीभगत से था पार्क भूमि पर कब्जा
सहायक चकबंदी अधिकारी ओमप्रकाश की मानें तो चकबंदी के नक्शे में ओवरलेपिंग के कारण जमीन नहीं मिल पा रही थी। एसडीएम गोला ने नपाई कराकर हदबंदी करा दी है। चकबंदी में पार्क की जमीन अभी और निकलेगी, जिसमें यह रास्ता और बाग का हिस्सा भी पड़ेगा। कुछ लोगों ने खेत में मिला लिया है। उसे भी खाली कराया जाएगा। एसीओ चकबंदी की मानें तो पार्क भूमि पर कब्जा चला आ रहा है। आखिर यह कब्जा किसकी मिलीभगत से चल रहा था। इस पर अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं।


कोरैया गांव में लोगों ने राजस्व कर्मचारियों और अधिकारियों पर हमला कर दिया था। लेखपाल की तहरीर पर मामले की रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना की जा रही है। दोषी लोगों पर शांति भंग की भी कार्रवाई की जाएगी। ताकि गांव में शांति बनी रहे। इसमें किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। परमीशन के बाद ही प्रतिमा लगने दी जाएगी।

- पूनम, एसपी

कोरैया गांव में पैमाइश कराकर आंबेडकर पार्क के लिए जगह छुड़वा दी गई है। हदबंदी भी करा दी गई है। गांव में अब कोई विवाद की स्थिति नहीं है। फिर भी यदि किसी को लगता है कि पार्क भूमि पर किसी का कब्जा है तो नियमानुसार कार्रवाई कर जो भूमि खतौनी में दर्ज है, वह हर हाल में छुड़वाई जाएगी। प्रतिमा स्थापित करने के लिए अनुमति जरूरी होती है। बिना परमीशन प्रतिमा नहीं लगने दी जाएगी।
- शैलेंद्र कुमार सिंह, डीएम
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed