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जेल पर फिट बैठ रही सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

Tue, 03 Apr 2018 07:09 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,लखीमपुर खीरी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,लखीमपुर खीरी Updated Tue, 03 Apr 2018 07:09 PM IST
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SC statement on jail fits best
सुप्रीम कोर्ट
अपराधी को इसलिए जेल भेजा जाता है कि वह अपने गुनाहों का पश्चाताप कर सके और उनके जीवन में सुधार हो, लेकिन यहां जगह के अभाव में उन्हें जिस मनोदशा में रखा जा रहा है, वह असहज करने वाली है। अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने बंदियों को लेकर टिप्पणी की थी कि जो यहां की जेल पर फिट बैठ रही है। यहां क्षमता से ढाई गुना अधिक बंदी हैं। आबादी बढ़ी, अपराध बढ़े। इससे अपराधियों की संख्या में भी इजाफा हुआ, जिससे जेल में कैदियों की संख्या भी बढ़ गई, लेकिन जेल में रहने के लिए क्षमता के मुताबिक बैरकें नहीं बढ़ सकीं। जेलों के आधुनिकीकरण और उन्हें सुधार गृह में तब्दील करने के सरकारी दावे यहां खोखले साबित हो रहे हैं। खीरी जिला जेल में 725 बंदियों/ कैदियों को रखने की क्षमता है। इन बंदियों के रहने के लिए 17 बैरकें हैं, लेकिन जेल में करीब 1800 के आसपास लोग निरुद्ध रहते हैं। क्षमता से ढाई गुना अधिक बंदी/कैदियों के खाने का बजट तो जेल के पास है, लेकिन रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं। मजबूरन जेल प्रशासन एक-एक बैरक में क्षमता से दोगुने-तीन गुने बंदियों को रख रहा है।
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रचनात्मक कामों के लिए करते हैं प्रेरित
बंदियों के नैतिक उत्थान के लिए जेल प्रशासन जेल में सामाजिक संस्थाओं और जेल शिक्षक के माध्यम से धर्मगुरुओं के प्रवचन कराता है। इसके अलावा हर 15 दिनों पर विधिक साक्षरता शिविर लगाकर बंदियों को कानूनी जानकारी और सुझाव दिए जाते हैं। कैदियों को रचनात्कम कार्यों के लिए प्रेरित किया जाता है। शिक्षा हासिल करने की व्यवस्था की जाती है।
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मिलाई के लिए रविवार को उमड़ती है भीड़
वैसे तो बंदियों और कैदियों की उनके घरवालों की मुलाकात शनिवार और अवकाश के दिनों को छोड़कर सभी दिनों होती है। जेल के रिकार्ड पर यदि गौर करें तो रविवार को सबसे अधिक करीब 400 से अधिक लोग अपने बंदियों और कैदियों से मिलने आते हैं। शेष दिनों में यह संख्या 100से 150 के बीच ही रह जाती है।
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जेल की क्षमता सिर्फ 725 लोगों को रखने की है, लेकिन हमेशा बंदी और कैदियों की संख्या ढाई गुना से अधिक रहती है। एक नई बैरक तैयार हो गई है, लेकिन लेकिन स्टाफ न होने से दिक्कत आ रही है। - आरबी पटेल, जेल अधीक्षक
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