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गन्ना समिति के सचिव और दो गन्ना पर्यवेक्षकों पर 51 लाख के गबन की रिपोर्ट दर्ज

Mon, 09 Jul 2018 06:44 PM IST
Updated Mon, 09 Jul 2018 06:44 PM IST
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गन्ना समिति के सचिव और दो गन्ना पर्यवेक्षकों पर 51 लाख के गबन की रिपोर्ट दर्ज
गन्ना समिति सचिव और दो पर्यवेक्षकों पर 51 लाख के गबन की रिपोर्ट
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सहकारी गन्ना विकास समिति मोहम्मदी का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
मोहम्मदी। मोहम्मदी के सहकारी गन्ना विकास समिति के सचिव और दो कर्मचारियों ने मिलकर पांच साल में 51 लाख रुपये से अधिक का गबन कर डाला, जिसकी भनक अधिकारियों को समय रहते नहीं लग सकी। वर्ष 2007 से 2012 तक घोटाले को अंजाम दिया गया। इसके कई साल बाद मामला पकड़े जाने के बाद तत्कालीन सचिव और दो कर्मचारियों के खिलाफ कोतवाली में गबन का मुकदमा दर्ज कराया गया है।
वर्तमान सचिव राजीव कुमार सिंह ने पुलिस को दी तहरीर में कहा कि वर्ष 2007-2008 से वर्ष 2011-12 तक तत्कालीन सचिव कमलेश कुमार वर्मा, तत्कालीन पर्यवेक्षक/गोदाम प्रभारी विद्या शंकर वर्मा और गोदाम प्रभारी शिवरतन लाल वर्मा ने मिलीभगत करके उर्वरक और कीटनाशक दवाओं का गबन करके फजीरे़ कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए। फिर उसे नियमानुसार बिक्री दिखाकर गन्ना समिति को 51 लाख 10 हजार 964 रुपये का चूना लगाया। यह खेल 2007 से शुरू हुआ 2012 तक चलता रहा। समिति के कर्मचारी रात में भी खाद बेचते थे, कई बार तो पूरे के पूरे ट्रक ही बाहर ही बाहर खुर्द-बुर्द कर दिए गए। जब इस मामले की चर्चा हुई तो गन्ना आयुक्त लखनऊ ने उप गन्ना आयुक्त लखनऊ की अध्यक्षता में एक टीम गठित की, जिसमें लगभग दो माह तक जांच चली। जांच में पांच लोगों के खिलाफ आरोप सही पाए गए, जिसमें दो कर्मचारियों ने अपने फंसने के डर से लगभग छह लाख रुपये समिति में जमा कर दिए हैं। इससे उन्हें कार्रवाई से छोड़ दिया गया है, लेकिन तीन कर्मचारियों तत्कालीन सचिव कमलेश कुमार वर्मा, गन्ना पर्यवेक्षक विद्याशंकर वर्मा और शिवरतन लाल वर्मा जांच टीम के सामने उपस्थित नहीं हुए। इन लोगों को पैसा जमा करने का मौका भी दिया गया। जब डीसीओ के कहने पर इन लोगों ने कोई तवज्जो नहीं दी, तो डीसीओ के निर्देश पर सचिव राजीव कुमार सिंह ने तत्कालीन सचिव कमलेश कुमार वर्मा, गन्ना पर्यवेक्षक विद्याशंकर वर्मा, शिवरतन वर्मा के खिलाफ आइपीसी की धारा 409, 419, 420, 467, 468 और 471 में रिपोर्ट दर्ज करा दी है। मामले की जांच अतिरिक्त इंस्पेक्टर इरशाद त्यागी को सौंपी गई है।
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गबन के आरोपियों को पैसा जमा करने का मौका दिया गया था, जिसके बाद एफआईआर दर्ज कराई गई है। इस तरह के और मामले प्रकाश में आएं तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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-ब्रजेश कुमार पटेल, जिला गन्ना अधिकारी
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