{"_id":"5daa029f8ebc3e93bd10a8e6","slug":"crimc-lakhimpur-news-bly3807703115","type":"story","status":"publish","title_hn":"टेरर फंडिंग में अफ्रीका और नाइजीरिया तक जुड़े हैं तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टेरर फंडिंग में अफ्रीका और नाइजीरिया तक जुड़े हैं तार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखीमपुर खीरी। टेरर फंडिंग के मामले में गिरफ्तार हुए फहीम और सिराजुद्दीन से पूछताछ में चौंकाने वाली जानकारियां निकली हैं। नेपाल में रुपये मंगाने के बाद उन्हें भारतीय करेंसी में बदलने के बाद आतंकियों तक पहुंचाने वाले इन लोगों के तार अफ्रीका और नाइजीरियन से जुड़े हुए हैं।
एटीएस के डीएसपी शैलेंद्र सिंह राठौर ने फहीम और सिराजुद्दीन की पुलिस कस्टडी रिमांड के लिए अदालत में अर्जी पेश करते हुए जिन बातों पर जोर दिया है और जिन तथ्यों का खुलासा किया है, वे काफी चौंकाने वाली हैं। एटीएस ने इसे लेकर सात सवालों की फेहरिस्त तैयार की है, इसलिए पुलिस कस्टडी रिमांड लेकर इन सवालों का जवाब तलाश करेगी।
एटीएस टीम आने से घंटे भर पहले मौजूद था सदाकत
लखीमपुर खीरी। मुमताज के हाजिर होने की कोशिशों की खबरें छपने के बाद भी एटीएस अपने नेटवर्क को सक्रिय नहीं कर सकी। एलआईयू को भी दोपहर बाद मुमताज के हाजिर हो जाने के बाद खबर लगी। तब पूरा ध्यान मुमताज की हाजिरी पर ही लगा रहा, किसी को भी सदाकत के कोर्ट पहुंचने और सरेंडर अर्जी देने की जानकारी नहीं मिल सकी। दोपहर करीब तीन बजे के बाद जब सदाकत के कोर्ट रूम में पहुंचने की चर्चा ने जोर पकड़ा तो इंटेलिजेंस और एलआईयू भी सकते में आ गई, अदालत पहुंचकर संबंधित वकील के जरिए कुछ जानकारी जुटाने की जुगत बनाई गई लेकिन वह भी फेल हो गई। कारण यह था कि सदाकत की ओर से अर्जी दाखिल करने वाले वकील गुल मोहम्मद बरेली में वकालत करते है, जिनका कोई संपर्क लखीमपुर खीरी से नहीं है। वह सदाकत के साथ ही बरेली से आए थे।
विज्ञापन
मुमताज से पूछताछ के लिए सीजेएम ने मंजूरी दी
फहीम और सिराजुदद्दीन को लेकर जब एटीएस के डीएसपी कोर्ट पहुंचे तभी वहां मुमताज के हाजिर होने की जानकारी मिली। फिर मुमताज से पूछताछ के लिए जेल में मुलाकात के लिए आनन-फानन में अर्जी दी। सीजेएम विकास श्रीवास्तव ने इसके लिए मंजूरी दे दी।
चार दिन बाद ही दाखिल किया संजय को
एटीएस ने टेरर फंडिंग के आरोपी तिकुनिया निवासी संजय अग्रवाल से पूछताछ और उसके नेपाली नेटवर्क की जानकारियां जुटाने के लिए कोर्ट से दस दिनों के लिए रिमांड की अर्जी दी थी, जिसे सुनवाई के बाद अदालत ने सात दिन के लिए मंजूरी दी थी। लेकिन चार दिन में ही पूछताछ कर एटीएस के डीएसपी शैंलेंद्र सिंह राठौर ने शुक्रवार को संजय अग्रवाल को कोर्ट में पेश कर दिया। मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उसे दोबारा जेल वापसी को अदालती मंजूरी मिल गई।
कोर्ट परिसर में मुलाकात करते रहे मददगार
वांटेड मुमताज हुसैन के अदालत में हाजिर होने की जानकारी मिलने के बाद भी प्रशासन सक्रिय नहीं हो सका। खुफिया एजेंसियों ने भी उससे मिलने के लिए अदालती कक्ष व कचहरी परिसर में आने जाने वालों का कोई ब्योरा जुटाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। बल्कि एलआईयू ने बताया कि वह केवल वकीलों, हंगामा और बवाल आदि पर नजर रखने और रिपेार्ट देने को आए हैं, पूछताछ करना और मददगारों पर नजर रखने का काम एटीएस का है।
मुमताज बोला-मैंने तो अपने रिश्तेदारों को नेपालियों से मिलवाया था सिर्फ
अमर उजाला से मुमताज ने कहा कि वह पिछले दस सालों से तिकुनिया थाना क्षेत्र के डांगा गांव में रह रहा है। वहीं से गुलरिया घाट होते हुए नेपाल में जाकर कबाड़ का धंधा करता था। उसके कुछ रिश्तेदार जो बरेली में रहते हैं, उन्होंने उससे संपर्क किया था। कहा था कि काठमांडू से रकम आनी है इसलिए नेपाल के कुछ लोगों के बैंक खाते की व्यवस्था करा दो, तब उसने भजनी नेपाल के वेदप्रकाश सहित कुछ लोगों के नेपाली बैंक खाते की जानकारियां दी थीं। फिर उन लोगों से बरेली के अपने रिश्तेदारों को मिलवाया था। इससे अधिक उसका कोई रोल नहीं है।
विज्ञापन
एटीएस के डीएसपी शैलेंद्र सिंह राठौर ने फहीम और सिराजुद्दीन की पुलिस कस्टडी रिमांड के लिए अदालत में अर्जी पेश करते हुए जिन बातों पर जोर दिया है और जिन तथ्यों का खुलासा किया है, वे काफी चौंकाने वाली हैं। एटीएस ने इसे लेकर सात सवालों की फेहरिस्त तैयार की है, इसलिए पुलिस कस्टडी रिमांड लेकर इन सवालों का जवाब तलाश करेगी।
विज्ञापन
एटीएस टीम आने से घंटे भर पहले मौजूद था सदाकत
लखीमपुर खीरी। मुमताज के हाजिर होने की कोशिशों की खबरें छपने के बाद भी एटीएस अपने नेटवर्क को सक्रिय नहीं कर सकी। एलआईयू को भी दोपहर बाद मुमताज के हाजिर हो जाने के बाद खबर लगी। तब पूरा ध्यान मुमताज की हाजिरी पर ही लगा रहा, किसी को भी सदाकत के कोर्ट पहुंचने और सरेंडर अर्जी देने की जानकारी नहीं मिल सकी। दोपहर करीब तीन बजे के बाद जब सदाकत के कोर्ट रूम में पहुंचने की चर्चा ने जोर पकड़ा तो इंटेलिजेंस और एलआईयू भी सकते में आ गई, अदालत पहुंचकर संबंधित वकील के जरिए कुछ जानकारी जुटाने की जुगत बनाई गई लेकिन वह भी फेल हो गई। कारण यह था कि सदाकत की ओर से अर्जी दाखिल करने वाले वकील गुल मोहम्मद बरेली में वकालत करते है, जिनका कोई संपर्क लखीमपुर खीरी से नहीं है। वह सदाकत के साथ ही बरेली से आए थे।
विज्ञापन
मुमताज से पूछताछ के लिए सीजेएम ने मंजूरी दी
फहीम और सिराजुदद्दीन को लेकर जब एटीएस के डीएसपी कोर्ट पहुंचे तभी वहां मुमताज के हाजिर होने की जानकारी मिली। फिर मुमताज से पूछताछ के लिए जेल में मुलाकात के लिए आनन-फानन में अर्जी दी। सीजेएम विकास श्रीवास्तव ने इसके लिए मंजूरी दे दी।
चार दिन बाद ही दाखिल किया संजय को
एटीएस ने टेरर फंडिंग के आरोपी तिकुनिया निवासी संजय अग्रवाल से पूछताछ और उसके नेपाली नेटवर्क की जानकारियां जुटाने के लिए कोर्ट से दस दिनों के लिए रिमांड की अर्जी दी थी, जिसे सुनवाई के बाद अदालत ने सात दिन के लिए मंजूरी दी थी। लेकिन चार दिन में ही पूछताछ कर एटीएस के डीएसपी शैंलेंद्र सिंह राठौर ने शुक्रवार को संजय अग्रवाल को कोर्ट में पेश कर दिया। मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उसे दोबारा जेल वापसी को अदालती मंजूरी मिल गई।
कोर्ट परिसर में मुलाकात करते रहे मददगार
वांटेड मुमताज हुसैन के अदालत में हाजिर होने की जानकारी मिलने के बाद भी प्रशासन सक्रिय नहीं हो सका। खुफिया एजेंसियों ने भी उससे मिलने के लिए अदालती कक्ष व कचहरी परिसर में आने जाने वालों का कोई ब्योरा जुटाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। बल्कि एलआईयू ने बताया कि वह केवल वकीलों, हंगामा और बवाल आदि पर नजर रखने और रिपेार्ट देने को आए हैं, पूछताछ करना और मददगारों पर नजर रखने का काम एटीएस का है।
मुमताज बोला-मैंने तो अपने रिश्तेदारों को नेपालियों से मिलवाया था सिर्फ
अमर उजाला से मुमताज ने कहा कि वह पिछले दस सालों से तिकुनिया थाना क्षेत्र के डांगा गांव में रह रहा है। वहीं से गुलरिया घाट होते हुए नेपाल में जाकर कबाड़ का धंधा करता था। उसके कुछ रिश्तेदार जो बरेली में रहते हैं, उन्होंने उससे संपर्क किया था। कहा था कि काठमांडू से रकम आनी है इसलिए नेपाल के कुछ लोगों के बैंक खाते की व्यवस्था करा दो, तब उसने भजनी नेपाल के वेदप्रकाश सहित कुछ लोगों के नेपाली बैंक खाते की जानकारियां दी थीं। फिर उन लोगों से बरेली के अपने रिश्तेदारों को मिलवाया था। इससे अधिक उसका कोई रोल नहीं है।