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Budaun News: अदालत में झूठी गवाही देना पड़ा भारी, वादी और दो गवाहों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का आदेश

Fri, 29 Aug 2025 07:14 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 29 Aug 2025 07:14 PM IST
सार

न्यायालय में झूठी गवाही देना वादी और उसके दो गवाहों को भारी पड़ गया। न्यायालय ने तीनों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

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court ordered action against the plaintiff and two witnesses for giving false testimony in Budaun
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

बदायूं में झूठी गवाही देने पर विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी कोर्ट एवं अपर सत्र न्यायाधीश सुयश प्रकाश श्रीवास्तव की अदालत ने वादी और उसके दो गवाहों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं। 

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बरेली के आंवला कस्बा निवासी अजीत पाल सिंह ने दिशांत रस्तोगी और उनके पिता सुबोध रस्तोगी के खिलाफ जेवर वापस न करने का आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज कराया था। सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि वादी पक्ष और उसके गवाहों ने न्यायालय को गुमराह करने के उद्देश्य से झूठी गवाही दी है। इस पर न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए दंडात्मक कार्रवाई का आदेश दिया है।
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वादी ने बताई थी यह कहानी 
वादी अजीत पाल सिंह का कहना था कि उसके पिता पुलिस विभाग में कार्यरत थे। उनकी तैनाती बदायूं में भी रही थी। उसी दौरान उसकी पढ़ाई-लिखाई बदायूं में हुई और यहां रहते हुए उसके कई लोगों से घनिष्ठ संबंध बन गए। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह अपने पैतृक कस्बे आंवला जाकर रहने लगा, लेकिन बदायूं में भी उसका कारोबार चलता रहा। 

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इस कारण वह समय-समय पर बदायूं आता जाता था। वादी का आरोप था कि शहर के मोहल्ला चाहमीर मढ़ई चौक के नजदीक रहने वाले दिशांत रस्तोगी और उनके पिता सुबोध रस्तोगी की दुकान पर उसका आना-जाना था। उनके पास जेवर रखे, जिसे वह वापस नहीं दे रहे थे। विवाद बढ़ने पर उसने उनके खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया था।

सुनवाई के दौरान खुली पोल 
सुनवाई के दौरान जब गवाहों और वादी के बयानों की पड़ताल हुई तो यह पाया गया कि उन्होंने अदालत के समक्ष तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और असत्य बयान दिए। अदालत ने इसे न्याय की प्रक्रिया से खिलवाड़ मानते हुए वादी और उसके गवाहों पर ही कार्रवाई का आदेश दे दिया। 

न्यायालय के आदेश के बाद वादी अजीत पाल सिंह और उसके दो गवाहों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अदालत का यह आदेश उन सभी लोगों के लिए बड़ा सबक माना जा रहा है जो न्यायालय में झूठी गवाही देकर अपने पक्ष को मजबूत करने की कोशिश करते हैं।

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