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मजदूर के हत्यारे को उम्रकैद
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लखीमपुर खीरी। मजदूर की धारदार हथियार से हत्या करने के मामले में एडीजे अनिल यादव ने हत्यारे को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 15000 रुपये का जुर्माना लगाया है।
एडीजीसी रमन सैनी ने अभियोजन पक्ष रखते हुए बताया कि जून 2005 में ईसानगर थाना क्षेत्र के ग्राम इसवारा निवासी बृजकिशोर वर्मा के भाई राजकिशोर से शिवकुमार ने कुछ पैसा उधार ले रखा था। जब वह रुपये नहीं चुका सका तो राजकिशोर ने कई बार मारपीट की थी और रुपये वसूलने के लिए अपने भाई ब्रजकिशोर के वहां खेतों में मजदूरी पर लगा दिया था। जहां मजदूरी के दौरान एक जून 2005 की रात से शिवकुमार का कोई पता नहीं चला। तीसरे दिन तीन जून को शिवकुमार की लाश ब्रजकिशोर के गन्ने के खेत में मिट्टी के बीच गड़ी हुई मिली, जिसमें गर्दन पर धारदार हथियार से कई वार किए गए थे।
इस मामले में मृतक शिवकुमार के चाचा राम दुलारे ने बृजकिशोर वर्मा और उसके भाई राज किशोर वर्मा पर नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अदालती सुनवाई के दौरान राम दुलारे, नन्नू, दिनेश, चंद्रभाल, सर्वेश कटियार, अंबिका कटियार ने अपनी गवाही दर्ज कराई और बचाव पक्ष की कोई दलील नहीं लगने दी। अदालती सुनवाई के बाद एडीजे अनिल यादव ने ब्रजकिशोर को दोषसिद्ध पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही 15000 रुपये का जुर्माना लगाया है।
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तीन सगे भाइयों सहित चार को 10-10 साल की कैद
लखीमपुर खीरी। मामूली विवाद में क्रिकेट के बैट और लाठी-डंडों से बुरी तरह पीटकर ग्रामीण को मौत के घाट उतारने के मामले में प्रथम एडीजे सुनील वर्मा ने तीन सगे भाइयों सहित चार हमलावरों को दोषी साबित पाया है। अदालत ने चारों हमलावरों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक पर 8000 का जुर्माना लगाया है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी सुनील सिंह तोमर ने बताया ईसानगर थाना क्षेत्र के ग्राम बिरसिंहपुर निवासी मोहम्मद यूसुफ खाने वाली पट्टी फेरी लगाकर बेचने का काम करता है। 10 अप्रैल 2004 की सुबह जब यूसुफ बिरसिंहपुर के मजरा चिंतापुरवा में पट्टी बेचने गया, वहीं चिंतापुरवा के तीरथ सिंह, बुद्धा सिंह और भगवती सिंह ने गांव के ही किशोरी गोडिया के साथ मिलकर पट्टी जमीन में गिरा दी। इसकी खबर पाकर पाकर यूसुफ के बड़े भाई हमीद और भतीजा अलीमुद्दीन मौके पर पहुंचा और पट्टी गिराए जाने का विरोध कर रहा था। तभी नाराज होकर तीरथ सिंह, बुद्धासिंह, भगवती सिंह और किशोरी ने क्रिकेट खेलने वाले बैट और लाठी-डंडों से हमला करते हुए बुरी तरह मार पिटाई कर दी, जिसमें बुरी तरह जख्मी हमीद की इलाज के दौरान तीसरे दिन 13 अप्रैल को जिला अस्पताल में मौत हो गई थी। अदालती सुनवाई के बाद सोमवार को अदालत ने अपने फैसले में गैर इरादतन हत्या के लिए तीन सगे भाइयों सहित चार हमलावरों को दोषी साबित पाया है। उन्हें 10 वर्ष के कठोर कारावास और 8000 रुपये जुर्माना भरने की सजा सुनाई गई है। संवाद
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एडीजीसी रमन सैनी ने अभियोजन पक्ष रखते हुए बताया कि जून 2005 में ईसानगर थाना क्षेत्र के ग्राम इसवारा निवासी बृजकिशोर वर्मा के भाई राजकिशोर से शिवकुमार ने कुछ पैसा उधार ले रखा था। जब वह रुपये नहीं चुका सका तो राजकिशोर ने कई बार मारपीट की थी और रुपये वसूलने के लिए अपने भाई ब्रजकिशोर के वहां खेतों में मजदूरी पर लगा दिया था। जहां मजदूरी के दौरान एक जून 2005 की रात से शिवकुमार का कोई पता नहीं चला। तीसरे दिन तीन जून को शिवकुमार की लाश ब्रजकिशोर के गन्ने के खेत में मिट्टी के बीच गड़ी हुई मिली, जिसमें गर्दन पर धारदार हथियार से कई वार किए गए थे।
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इस मामले में मृतक शिवकुमार के चाचा राम दुलारे ने बृजकिशोर वर्मा और उसके भाई राज किशोर वर्मा पर नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अदालती सुनवाई के दौरान राम दुलारे, नन्नू, दिनेश, चंद्रभाल, सर्वेश कटियार, अंबिका कटियार ने अपनी गवाही दर्ज कराई और बचाव पक्ष की कोई दलील नहीं लगने दी। अदालती सुनवाई के बाद एडीजे अनिल यादव ने ब्रजकिशोर को दोषसिद्ध पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही 15000 रुपये का जुर्माना लगाया है।
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तीन सगे भाइयों सहित चार को 10-10 साल की कैद
लखीमपुर खीरी। मामूली विवाद में क्रिकेट के बैट और लाठी-डंडों से बुरी तरह पीटकर ग्रामीण को मौत के घाट उतारने के मामले में प्रथम एडीजे सुनील वर्मा ने तीन सगे भाइयों सहित चार हमलावरों को दोषी साबित पाया है। अदालत ने चारों हमलावरों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक पर 8000 का जुर्माना लगाया है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी सुनील सिंह तोमर ने बताया ईसानगर थाना क्षेत्र के ग्राम बिरसिंहपुर निवासी मोहम्मद यूसुफ खाने वाली पट्टी फेरी लगाकर बेचने का काम करता है। 10 अप्रैल 2004 की सुबह जब यूसुफ बिरसिंहपुर के मजरा चिंतापुरवा में पट्टी बेचने गया, वहीं चिंतापुरवा के तीरथ सिंह, बुद्धा सिंह और भगवती सिंह ने गांव के ही किशोरी गोडिया के साथ मिलकर पट्टी जमीन में गिरा दी। इसकी खबर पाकर पाकर यूसुफ के बड़े भाई हमीद और भतीजा अलीमुद्दीन मौके पर पहुंचा और पट्टी गिराए जाने का विरोध कर रहा था। तभी नाराज होकर तीरथ सिंह, बुद्धासिंह, भगवती सिंह और किशोरी ने क्रिकेट खेलने वाले बैट और लाठी-डंडों से हमला करते हुए बुरी तरह मार पिटाई कर दी, जिसमें बुरी तरह जख्मी हमीद की इलाज के दौरान तीसरे दिन 13 अप्रैल को जिला अस्पताल में मौत हो गई थी। अदालती सुनवाई के बाद सोमवार को अदालत ने अपने फैसले में गैर इरादतन हत्या के लिए तीन सगे भाइयों सहित चार हमलावरों को दोषी साबित पाया है। उन्हें 10 वर्ष के कठोर कारावास और 8000 रुपये जुर्माना भरने की सजा सुनाई गई है। संवाद