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डीटीआर में साइन सर्वे से वन्यजीवों की गणना शुरू

Wed, 09 Mar 2022 01:34 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 09 Mar 2022 01:34 AM IST
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Counting of wildlife starts from sign survey in DTR
दुधवा राष्ट्रीय उद्यान का गेट।
शाकाहारी, परभक्षी जीवों के साथ हाथी, गैंडों, गिद्घों और अन्य बड़े पक्षियों की भी होगी गणना
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ट्रांजिट वॉक कर दुधवा की खाद्य शृंखला का किया जा रहा आकलन
लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) में टाइगर इस्टीमेशन-2022 (बाघ अनुमानीकरण) के तहत साइन सर्वे और ट्रांजिट वॉक प्रक्रिया सोमवार से शुरू हो गई है। डीटीआर के तीनों प्रभागों के अलावा दक्षिण खीरी वन प्रभाग में ट्रांजिट वॉक के जरिए साइन सर्वे किया जा रहा है। इसमें वन्यजीवों की गणना के साथ ही वनस्पतियों की प्रजातियों और उनके घनत्व का भी आकलन किया जा रहा है। इसका मकसद बाघों के प्राकृतवास की अनुकूलता का पता लगाना है।
बाघ अनुमानीकरण के पहले चरण में साइन सर्वे और ट्रांजिट वॉक कर इस बात का पता लगाया जा रहा है कि जंगल के किन-किन क्षेत्रों में बाघों की मौजूदगी है और वह क्षेत्र बाघों के प्राकृतवास के लिए कितना अनुकूल है। इसमें बाघों के लिए भोजन पानी की उपलब्धता का आकलन भी किया जा रहा है। इसमें खाद्य शृंखला की स्थिति का पता लगाया जा रहा है। ट्रॉजिट वॉक कर वन्यजीवों और वनस्पतियों की गणना और घनत्व देखा जा रहा है।
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सोमवार से दो किलोमीटर से चार किलोमीटर तक की ट्रांजिट लाइन बनाकर वनकर्मियों ने ट्रांजिट वॉक किया। इससे पहले टाइगर इस्टीमेशन उत्तर प्रदेश के नोडल अधिकारी दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने टाइगर इस्टीमेंशन में लगे वन कर्मियों को शाकाहारी वन्यजीवों की गणना और वनस्पतियों का घनत्व पता लगाने के लिए जरूरी टिप्स दिए। उन्होंने कहा कि ट्रांजिट वॉक के दौरान दिखाई पड़ने वाले वन्यजीवों और वनस्पतियों को मोबाइल एप पर सावधानी और पूरी ईमानदारी से दर्ज करें। ताकि सटीक गणना हो सके।
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परभक्षी जीवों, हाथी और गैंडों की गिनती 13 मार्च को होगी
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने बताया कि 12 मार्च को गिद्घों और अन्य बड़े पक्षियों की गणना की जाएगी, जबकि 13 मार्च को साइटिंग के आधार पर बाघ, तेंदुआ के अलावा हाथी और गैंडों की गणना की जाएगी। वनकर्मी इनकी मौजूदगी के चिह्न मोबाइल एप में दर्ज करेंगे। इनकी विष्ठा के नमूनों को अलग-अलग थैलियों में एकत्र करेंगे। जिन्हें बाद में वैज्ञानिक विश्लेषण के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। इससे हाथी और गैंडों की डीएनए प्रोफाइल भी तैयार होगी। परभक्षी जीवों, हाथी, गैंडों और गिद्घों व अन्य बड़े पक्षियों की गणना के दौरान वनकर्मियों की टीमें कम से 15 किलोमीटर पैदल चलकर इन वन्यजीवों का आकलन करेंगी।

ऐसे होता है ट्रांजिट सर्वे
ट्रांजिट सर्वे के लिए जंगल में दो-दो किलोमीटर लंबे रास्तों का निर्माण किया जाता है, जिसे ट्रांजिट लाइन कहा जाता है। इन ट्रांजिट लाइनों पर वनकर्मी दाएं-बाएं दोनों तरफ देखते हुए चलते हैं। इस दौरान दिखने वाले वन्यजीवों और वनस्पतियों को वे मोबाइल एप पर दर्ज करते रहते हैं। इससे यह पता चलता है कि निश्चित दायरें में कितने और कौन कौन से वन्यजीव मौजूद हैं। इससे बाघों के भोजन का आकलन होता है।
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