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गड़बड़ियों से घिरी बेलरायां चीनी मिल, मामला विधान परिषद पहुंचा

Mon, 06 Sep 2021 12:35 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 06 Sep 2021 12:35 AM IST
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Civic Amenities
बेलरायां चीनी मिल गेट। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
लखीमपुर खीरी। सहकारी उपक्रम की बेलरायां सरयू सहकारी चीनी मिल अनियमितता एवं मजदूरों के शोषण के आरोपों से घिर गई है। चीनी मिल वर्तमान में करीब 150 करोड़ से अधिक घाटे में चल रही है। इस मामले की शिकायत विधान परिषद पहुंची तो सभापति ने चीनी मिल में हो रही अनिमितताओं की जांच संसदीय एवं सामाजिक सद्भाव समिति से कराने के निर्देश दिए हैं।
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जनपद में कुल नौ चीनी मिलें संचालित हैं, जिनमें सात मिलें निजी क्षेत्र की हैं और दो मिलें बेलरायां व संपूर्णानगर प्रदेश सरकार का सहकारी उपक्रम हैं। तराई क्षेत्र में स्थित होने के कारण लाखों किसानों और मजदूूरों की रोजी-रोटी इन मिलों से जुड़ी है। निजी क्षेत्र की मिलों के मुकाबले सहकारी मिलें निरंतर घाटा दिखा रहीं हैं, जिसमें बेलरायां मिल भी लगातार घाटे में चल रही है। सूत्रों का कहना है कि घाटे के पीछे असल में चीनी मिल में होने वाली गड़बड़ियां हैं।
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आरोप है कि गन्ने की पेराई से बनने वाली चीनी समेत सह उत्पादों (शीरा, बैगास आदि) की बिक्री में कमीशनबाजी हावी है, जो मिल के घाटे में जाने का प्रमुख कारण बनी हुईं है। बेलरायां मिल में टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी किए जाने के आरोप पहले भी लगते रहे हैं, लेकिन अफसरों ने कभी संजीदगी से संज्ञान नहीं लिया।
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इस बार तिकुनियां निवासी समाजसेवी राजीव गुप्ता ने बेलरायां मिल में गड़बड़ी और मजदूरों का शोषण किए जाने की शिकायत विधान परिषद में पहुंचाई, जहां संज्ञान लिया गया है। विधान परिषद के अनु सचिव तेज प्रताप सिंह ने चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव को लिखित आदेश जारी करते हुए पूरे प्रकरण को संसदीय एवं सामाजिक सद्भाव समिति में अपनी आख्या सहित 15 दिन में भेजने का निर्देश दिए हैं। डीएम लखीमपुर खीरी को भी पूरे प्रकरण की सूचना विधान परिषद ने भेजी है।
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मनरेगा से कम दी जा रही मजदूरी
आरोप है कि मजदूरों को मनरेगा में निर्धारित मजदूरी से कम भुगतान दिया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि 150 से 170 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी दी जा रही है, जबकि मनरेगा में न्यूनतम मजदूरी 200 रुपये से अधिक हैै।
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चीनी मिल में पिछले 10 वर्षों में बड़े पैमाने पर बंदरबाट हुआ है। आरटीआई से कुछ जानकारी मांगी, लेकिन अधिकारी ने देने से मना करते हुए जवाब दिया कि सहकारी चीनी मिल आरटीआई के दायरे में नहीं आती है। 10 वर्ष के सोशल ऑडिट की रिपोर्ट क्या है, यह चीनी मिल बोर्ड के माध्यम से किसानों की जानकारी में आना चाहिए। मौके पर चीनी मिल में सत्यापन होना जरूरी है।

-राजीव गुप्ता, समाजसेवी, तिकुनियां
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चीनी मिल कई सालों से घाटे में चल रही है, जिसकी अन्य वजहें हैं। अधिकारियों को भी जानकारी है। कुछ दिन पहले मिल के मरम्मत कार्य का टेंडर निकाला गया था, जिसमें कुछ लोगों को काम नहीं मिला है। इससे वह लोग झूठी शिकायत करके मिल को बदनाम करना चाहते हैं। मिल में कोई गड़बड़ी नहीं हो रही है। प्रति वर्ष ऑडिट होता है और प्रति सप्ताह उच्चाधिकारियों की अध्यक्षता में समीक्षा होती है।
-सुशील गौड़, जीएम, बेलरायां चीनी मिल
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