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50 गांवों में गठित की जाएंगी आपदा प्रबंधन टीमें
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लखीमपुर आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण शिविर में विचार रखते ट्रेनर डॉ. मजहर रशीदी। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
लखीमपुर खीरी। समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन परियोजना के तहत शनिवार को एक दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण हुआ, जिसमें अधिकारियों व कर्मचारियों को आपदा प्रबंधन की तैयारियों के बारे में बताया गया। बाढ़-कटान से प्रभावित 50 गांवों में आपदा से निपटने के लिए त्वरित आपदा प्रबंधन टीमें तैयार करने का लक्ष्य दिया गया। निर्णय किया गया कि ग्राम आपदा प्रबंधन योजना के तहत गांवों में आपदा से निपटने के लिए क्षमता की वृद्धि करने पर काम किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण लखनऊ से संबद्ध टाइम्स सेंटर फॉर लर्निंग लिमिटेड के प्रशिक्षकों ने समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन की तैयारियों के संबंध में अधिकारियों को प्रशिक्षित किया। प्रदेश के 19 आपदा प्रभावित जिलों में लखीमपुर खीरी शामिल है, जिससे यहां के 50 गांवों के करीब पांच हजार ग्रामीणों को दो महीने में आपदा प्रबंधन में प्रशिक्षित किया जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि किसी विकास परियोजना में आपदा न्यूनीकरण तत्वों का समाहित किया जाना आवश्यक है। इसके अभाव में विकास संभव नहीं है। इसलिए समस्त विभाग विभिन्न आपदाओं और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए योजनाओं का निर्माण करें, जो विकास में सहायक सिद्ध हों। उन्होंने कहा कि विशेष ध्यान रखा जाए कि वास्तविक आंकड़ों को ही ग्राम आपदा प्रबंधन योजना निर्माण में शामिल किया जाए, जिससे अपदा के दौरान समय से बचाव कार्य किया जा सके और जन-धन की हानि को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि शासन की अपेक्षा के अनुरूप योजना का निर्माण प्रभावी रूप से किया जाए और जनपद को मॉडल जनपद के रूप में विकसित करें। परियोजना के माध्यम से ग्राम स्तर पर गठित की जा रही ग्राम आपदा प्रबंधन समिति को विशेष पहचान दी जाए, जिससे वे प्रथम उत्तरदाता के रूप मे कार्य कर सकें। आपदा के समय जोखिम को कम से कम किया जा सके और साथ ही उनके सहयोग से प्रभावित लोगों को शासन/प्रशासन के माध्यम से तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके। प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान को समुदाय स्तर पर लोगों तक पहुंचाने का संकल्प दिलाया गया। डीएम ने कहा कि कोविड-19 महामारी ने हम लोगों को काफी प्रभावित किया और इससे लोगों को बहुत कुछ सीखने को मिला है। प्रशिक्षण में एडीएम अरुण कुमार सिंह, आपदा विशेषज्ञ प्रशांत कुमार, पवन कुमार पांडेय, संदीप कुमार, प्रशिक्षक डॉ जकिया युसुफ, असफाक अहमद समेत समस्त सीएचसी, पीएचसी, ब्लॉक कार्यालयों, नगर पालिका, सिंचाई, लोक निर्माण आदि विभागों के अधिकारी शामिल हुए।
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आपदा से बचाव के लिए पहले से होगी तैयारी
प्रशिक्षक डॉ मजहर रसीदी ने कहा कि गांवों के विकास के लिए आपदा प्रबंधन की क्षमता विकसित करना भी जरूरी है। किसी भी खतरे की रोकथाम के लिए पहले से तैयारी की जाएगी, जिससे आपदा से निपटने के लिए तुरंत प्रतिक्रिया की जा सके। आपदा की तीव्रता और गंभीरता का आकलन करना जरूरी है। निकासी, बचाव, राहत के अलावा पुनर्वास और पुननिर्माण की क्षमता बनानी होगी। उन्होंने कहा कि अब तक आपदा प्रबंधन के नाम पर कागजी कार्रवाई होती आई, जिससे केंद्र से राज्य को मिलने वाला करोड़ों का बजट सरेंडर करना पड़ता है। इस बार 50 गांवों में आपदा से निपटने के लिए ग्राम आपदा प्रबंधन योजना के तहत क्षमता वृद्धि की जाएगी। संवाद
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उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण लखनऊ से संबद्ध टाइम्स सेंटर फॉर लर्निंग लिमिटेड के प्रशिक्षकों ने समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन की तैयारियों के संबंध में अधिकारियों को प्रशिक्षित किया। प्रदेश के 19 आपदा प्रभावित जिलों में लखीमपुर खीरी शामिल है, जिससे यहां के 50 गांवों के करीब पांच हजार ग्रामीणों को दो महीने में आपदा प्रबंधन में प्रशिक्षित किया जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि किसी विकास परियोजना में आपदा न्यूनीकरण तत्वों का समाहित किया जाना आवश्यक है। इसके अभाव में विकास संभव नहीं है। इसलिए समस्त विभाग विभिन्न आपदाओं और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए योजनाओं का निर्माण करें, जो विकास में सहायक सिद्ध हों। उन्होंने कहा कि विशेष ध्यान रखा जाए कि वास्तविक आंकड़ों को ही ग्राम आपदा प्रबंधन योजना निर्माण में शामिल किया जाए, जिससे अपदा के दौरान समय से बचाव कार्य किया जा सके और जन-धन की हानि को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि शासन की अपेक्षा के अनुरूप योजना का निर्माण प्रभावी रूप से किया जाए और जनपद को मॉडल जनपद के रूप में विकसित करें। परियोजना के माध्यम से ग्राम स्तर पर गठित की जा रही ग्राम आपदा प्रबंधन समिति को विशेष पहचान दी जाए, जिससे वे प्रथम उत्तरदाता के रूप मे कार्य कर सकें। आपदा के समय जोखिम को कम से कम किया जा सके और साथ ही उनके सहयोग से प्रभावित लोगों को शासन/प्रशासन के माध्यम से तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके। प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान को समुदाय स्तर पर लोगों तक पहुंचाने का संकल्प दिलाया गया। डीएम ने कहा कि कोविड-19 महामारी ने हम लोगों को काफी प्रभावित किया और इससे लोगों को बहुत कुछ सीखने को मिला है। प्रशिक्षण में एडीएम अरुण कुमार सिंह, आपदा विशेषज्ञ प्रशांत कुमार, पवन कुमार पांडेय, संदीप कुमार, प्रशिक्षक डॉ जकिया युसुफ, असफाक अहमद समेत समस्त सीएचसी, पीएचसी, ब्लॉक कार्यालयों, नगर पालिका, सिंचाई, लोक निर्माण आदि विभागों के अधिकारी शामिल हुए।
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आपदा से बचाव के लिए पहले से होगी तैयारी
प्रशिक्षक डॉ मजहर रसीदी ने कहा कि गांवों के विकास के लिए आपदा प्रबंधन की क्षमता विकसित करना भी जरूरी है। किसी भी खतरे की रोकथाम के लिए पहले से तैयारी की जाएगी, जिससे आपदा से निपटने के लिए तुरंत प्रतिक्रिया की जा सके। आपदा की तीव्रता और गंभीरता का आकलन करना जरूरी है। निकासी, बचाव, राहत के अलावा पुनर्वास और पुननिर्माण की क्षमता बनानी होगी। उन्होंने कहा कि अब तक आपदा प्रबंधन के नाम पर कागजी कार्रवाई होती आई, जिससे केंद्र से राज्य को मिलने वाला करोड़ों का बजट सरेंडर करना पड़ता है। इस बार 50 गांवों में आपदा से निपटने के लिए ग्राम आपदा प्रबंधन योजना के तहत क्षमता वृद्धि की जाएगी। संवाद
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