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सिलाई कढ़ाई कर स्वावलंबी बनेंगी महिला कैदी, प्रशिक्षण जारी
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लखीमपुर जिला कारागार। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। जिला कारागार में महिला बंदियों को स्वावलंबी बनाने के लिए सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे प्रशिक्षण पूरा होने पर महिला बंदी सिलाई-कढ़ाई कर स्वावलंबी बन सकेंगी। जेल प्रशासन ने खराब पड़े रिसाइक्लिंग प्लांट को ठीक करा लिया है। जेल प्रशासन अब इसे शीघ्र ही चालू कराने के प्रयास में है।
जिला जेल में निरुद्ध महिला बंदियों और कैदियों को स्वावलंबी बनाने के लिए पांच साल पहले तत्कालीन डीएम किंजल सिंह ने पहल की थी। इसके पीछे उनकी मंशा थी कि सींखचों के पीछे सजा काट रही महिलाएं सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण और रिसाइक्लिंग प्लांट में उत्पाद तैयार कर उन्हें बाजार में बिक्री कर आत्मनिर्भर बन सकेंगी। इसके लिए महिला बंदियों के खाते भी खुलवाए गए थे। दो साल पहले जेल में रिसाइक्लिंग प्लांट लगाया गया था। इस प्लांट से कागज, लिफाफे और कवर फाइल आदि तैयार करना था। जेल में तैयार होने वाले इन फाइल कवर आदि की आपूर्ति सरकारी कार्यालयों में होनी थी। जेल प्रशासन ने सिलाई-कढ़ाई के साथ रिसाइक्लिंग का प्रशिक्षण शुरू कराया। उस समय 15 महिलाएं प्रशिक्षित होकर सिलाई-कढ़ाई करने लगी। जिसके बाद कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की मांग पर महिलाओं द्वारा तैयार की गईं 500 ड्रेसों की बिक्री भी की गई थी। कुछ दिन चलने के बाद रिसाइक्लिंग प्लांट भी ठप हो गया, लेकिन अब जेल प्रशासन ने इस प्लांट को ठीक करा लिया है, लेकिन अभी उत्पादन शुरू नहीं हो सका है। इधर, जेल प्रशासन ने 18 महिला बंदियों को प्रशिक्षित करने के लिए एक प्रशिक्षक लगाया है, जो सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दे रही है। प्रशिक्षण पूरा होने पर यह महिलाएं सिलाई-कढ़ाई का काम करने लगेंगी।
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महिला बंदियों को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। रिसाइक्लिंग प्लांट की मशीनों में तकनीकी खराबी आ गई थी, जिससे वह ठप थीं, जिन्हें अब ठीक करा लिया गया है। जल्द ही इसे चालू किया जाएगा।
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- आरबी पटेल, जेल अधीक्षक
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जिला जेल में निरुद्ध महिला बंदियों और कैदियों को स्वावलंबी बनाने के लिए पांच साल पहले तत्कालीन डीएम किंजल सिंह ने पहल की थी। इसके पीछे उनकी मंशा थी कि सींखचों के पीछे सजा काट रही महिलाएं सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण और रिसाइक्लिंग प्लांट में उत्पाद तैयार कर उन्हें बाजार में बिक्री कर आत्मनिर्भर बन सकेंगी। इसके लिए महिला बंदियों के खाते भी खुलवाए गए थे। दो साल पहले जेल में रिसाइक्लिंग प्लांट लगाया गया था। इस प्लांट से कागज, लिफाफे और कवर फाइल आदि तैयार करना था। जेल में तैयार होने वाले इन फाइल कवर आदि की आपूर्ति सरकारी कार्यालयों में होनी थी। जेल प्रशासन ने सिलाई-कढ़ाई के साथ रिसाइक्लिंग का प्रशिक्षण शुरू कराया। उस समय 15 महिलाएं प्रशिक्षित होकर सिलाई-कढ़ाई करने लगी। जिसके बाद कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की मांग पर महिलाओं द्वारा तैयार की गईं 500 ड्रेसों की बिक्री भी की गई थी। कुछ दिन चलने के बाद रिसाइक्लिंग प्लांट भी ठप हो गया, लेकिन अब जेल प्रशासन ने इस प्लांट को ठीक करा लिया है, लेकिन अभी उत्पादन शुरू नहीं हो सका है। इधर, जेल प्रशासन ने 18 महिला बंदियों को प्रशिक्षित करने के लिए एक प्रशिक्षक लगाया है, जो सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दे रही है। प्रशिक्षण पूरा होने पर यह महिलाएं सिलाई-कढ़ाई का काम करने लगेंगी।
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महिला बंदियों को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। रिसाइक्लिंग प्लांट की मशीनों में तकनीकी खराबी आ गई थी, जिससे वह ठप थीं, जिन्हें अब ठीक करा लिया गया है। जल्द ही इसे चालू किया जाएगा।
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- आरबी पटेल, जेल अधीक्षक