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अब घाघरा ने दिखाया रौद्र रूप..बाछेपारा गांव में 15 घर बहा ले गई

Mon, 31 Aug 2020 01:09 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 31 Aug 2020 01:09 AM IST
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Civic Amenities
रैनी गांव में कटान के डर से अपना आशियाना तोड़ते ग्रामीण। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
धौरहरा (लखीमपुर खीरी)। शारदा और घाघरा नदियों ने तहसील क्षेत्र के कई गांवों में तबाही मचा रखी है। इसी क्रम में घाघरा नदी ने बाछेपारा गांव को उजाड़ना शुरू कर दिया है। 24 घंटों में घाघरा नदी ने 15 घरों को अपनी चपेट में ले लिया। उधर, शारदा नदी के कटान से रैनी गांव का वजूद भी मिटने के कगार पर है, क्योंकि शेष बचे 12 घर कटान की जद में आ चुके हैं जो किसी भी समय नदी में समा सकते हैं।
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रमियाबेहड़ ब्लॉक के बाछेपारा गांव के पास से बहने वाली घाघरा नदी तेजी से कटान करती हुई गांव के अंदर पहुंच गई है। 24 घंटों में नदी ने गांव के अवधराम, राकेश कुमार, जगदीश प्रसाद, सुरेश कुमार, मिश्री लाल, नंदराम, चंपा देवी, राममिलन, रामप्रसाद, बिंद्रा, शिवरतन, कमलेश, तेजी सहित 15 लोगों के घरों को अपनी चपेट में ले लिया। गांव वालों के मुताबिक यहां बाढ़ खंड विभाग ने दो दिन परकोपाइन और बंबू कैरेट बनाकर बचाव कार्य शुरू किया, फिर काम बंद कर चले गए। इस समय नदी का कटान तेज है और नदी में निरंतर घर समाते जा रहे हैं तो बाढ़ खंड विभाग के अधिकारी/कर्मचारी नदारद हैं।
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रैनी गांव के 10 और घर कटान की जद में आए
धौरहरा तहसील क्षेत्र के गांव रैनी में शारदा नदी का कटान निरंतर जारी हैै। 24 घंटों में शेष बचे 12 घरों में से कोई नहीं कटा, लेकिन 10 घर जद में आ गए हैं। ग्रामीणों ने अपना सारा समेटकर सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन शुरू कर दिया हैै। जिनके पक्के मकान बने थे, उन्होंने अपने ही हाथों घरों को तोड़ना शुरू कर दिया है। वहीं बाढ़ खंड विभाग के कटान रोकने के लिए कराए जा रहे प्रयास सिर्फ खानापूरी साबित हो रहे हैं। शारदा नदी अब तक रैनी गांव के 71 घर निगल चुकी है। अब उसने शेष बचे 12 घरों में रामलखन, रामआसरे, धीरज वर्मा, नरेंद्र, शिवश, शैलेंद्र कुमार वर्मा, सतीश कुमार, मोनू, अच्छे लाल के घरों को भी निगलना शुरू कर दिया है। यही हाल रहा, तो दो-चार दिन में पूरा रैनी गांव शारदा नदी में समा जाएगा। ग्रामीणों के मुताबिक बाढ़ खंड विभाग केवल बचाव कार्य का ढिंढोरा पीट रहा है। 24 घंटों में नदी ने आठ मीटर जमीन काट कर शेष बचे घरों को भी काटना शुरू कर दिया है। उधर, बाढ़ खंड विभाग का दावा है कि बचाव कार्य शुरू होने से कटान की गति कम हुई है। जेई धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि रात दो बजे से शारदा नदी तेजी से कटान कर रही है, जो भी बचाव कार्य किया जा रहा है वह तेज धार में बह जाता है। हम पूरा प्रयास कर रहे हैं कि गांव के शेष घर बच जाएं।
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बाछेपारा गांव में 15 घर कटने की सूचना मिली है। यहां बाढ़ खंड विभाग काम कर रहा है यदि बचाव कार्य रुका हुआ है, तो मौके पर जाकर निरीक्षण करके रिपोर्ट डीएम को भेजेंगे और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई भी कराएंगे। सभी कटान पीड़ितों को गृह अनुदान और प्रधानमंत्री आवास मिलेंगे।
- एस सुधाकरन, एसडीएम, धौरहरा
मोहाना नदी के कटान से बदल रहा भूगोल, अब तक लील चुकी कई गांव
नेपाल से निकली मोहाना नदी समेत अन्य नदियों से आने वाला पानी बाढ़-कटान का रूप धारण करके तबाही मचा रहा है। करीब 20 किलोमीटर दूरी पर स्थित घाघरा नदी पर बना गिरिजापुरी बैराज भी बाढ़ और कटान का कारण बनता रहा है। बीते दो दशक से मोहाना नदी कटान करती हुई आबादी की ओर बढ़ती आ रही है। नदी के कटान को रोकने के लिए बंदोबस्त नहीं किया गया, ऐसे में भविष्य में नेपाल सीमा पर स्थित सिखों का ऐतिहासिक पवित्र तीर्थ स्थल कौड़ियाला गुरुद्वारा और गोंडा मैलानी रेलवे लाइन सहित कस्बा तिकुनियां भी चपेट में आ सकता है।
इंडो-नेपाल बॉर्डर पर बह रही मोहाना नदी ने वर्ष 2013 में हजारों की आबादी वाली ग्राम पंचायतों सूरतनगर, नई बस्ती, बंदरिया फार्म, आदर्शनगर नदी को काटकर मिला लिया था। गांव में बना प्राथमिक तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय का पूरा भवन नदी में समा गया था। वहीं गांवों बने एएनएम सेंटर और गुरुद्वारे भी नदी में समा गए। यही नहीं गांव सूरतनगर निवासी पूर्व प्रधान राजकिशोर मिश्रा, भगतराम समेत सैकड़ों ग्रामीणों की आम के बाग और सैकड़ों एकड़ खेत नदी में समा गए।
प्रशासन ने जमीन खरीदकर कटान पीड़ितों को बसाया
सूरतनगर के प्रधान भगत सिंह डंपी बताते हैं गांव कटने के बाद करीब 400 परिवारों को तहसील प्रशासन द्वारा जमीन खरीद कर खमरिया रोड पर बसाया गया। अभी कुछ लोगों को जमीन नहीं मिल पाई है, जिससे वे लोग सड़कों के किनारे आशियाना बनाए हैं। इधर, पंचायत सूरतनगर के मजरा गांव इंद्रनगर में भी भारी कटान हो रहा है।
इस बार चार गांवों में भारी तबाही
नेपाल सरकार द्वारा मोहाना नदी में बांध बना लेने के बाद इस बार 30 जुलाई को आई बाढ़ के चलते ग्राम गंगानगर, रननगर, इंदरनगर, अनूपनगर में भारी कटान हुआ है।
बाढ़ में कटी रोड बना नाला, ग्रामीण और एसएसबी जवान परेशान
तिकुनिया कस्बे से ग्राम इंद्रनगर होते हुए खखरौला-एसएसबी पोस्ट नेपाल को जाने वाला प्रमुख मार्ग बाढ़ में कट गया था, जिसकी अभीब तक मरम्मत नहीं हुई है। बारिश में पानी भरने से कटी सड़क नाला बन चुकी है। इससे किसानों और पोस्ट के जवानों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। करीब 20 दिन बाद भी पीडब्ल्यूडी विभाग ने सड़क में बने नाले को नहीं भरवाया है। दोपहिया वाहन और राहगीर तो निकल रहे हैं, लेकिन चार पहिया वाहनों का आवागमन पूरी तरह बाधित है।
इंदरनगर के किसान गुरमीत सिंह ने बताया खखरौला पोस्ट के आगे खेत हैं, जहां रोजाना आना-जाना पड़ता है। रोड पर बाढ़ में कटान कर गहरा नाला बन गया है, जिस पर निकलना मुश्किल है। एसडीएम ओपी गुप्ता ने आश्वासन दिया था कि एक हफ्ते में नाला पटवाकर आवागमन शुरू करा दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। प्रधान प्रगट सिंह ने पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों से नाले को पटाई कर रोड को दुरुस्त किए जाने की मांग की है।

कटान रोकने के लिए बनाई जा रहीं ठोकर
बिजुआ ब्लॉक की ग्राम पंचायत शाहपुर के मजरा ढकिया में शारदा नदी का जलस्तर घटने से कटान तेज हो गया है। रोज बीसों एकड़ जमीन नदी में समाती जा रही है। सिंचाई विभाग ठोकरें बना रहा है जो नाकाफी साबित हो रहीं हैं।
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