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विभागीय कार्यों में लापरवाही पड़ी भारी, डीपीआरओ निलंबित
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लखीमपुर खीरी। विभागीय कार्यों में लगातार लापरवाही और भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई न करने के चलते शासन ने खीरी के जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) अजय कुमार श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में डीपीआरओ निदेशक कार्यालय लखनऊ से संबद्ध रहेंगे। डीपीआरओ के खिलाफ लगे आरोपों की फेहरिस्त लंबी होने के साथ ही दो प्रतिकूल प्रविष्टियां भी घातक सिद्ध हुई हैं।
गांवों में शौचालयों के निर्माण में धांधली करने वाले कर्मचारियों / प्रधानों पर शिकंजा कसने में डीपीआरओ नाकाम रहे, जिससे गांवों को ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) बनाने के अभियान को पलीता लग रहा था तो पसगवां ब्लॉक की ग्राम पंचायत खूंटी बुजुर्ग प्रकरण ने काफी तूल पकड़ा, जब पीडी की रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी सफाई कर्मी और ग्राम पंचायत अधिकारी के खिलाफ डीपीआरओ ने एक सप्ताह तक कोई कार्रवाई ही नहीं की। इसके बाद सीडीओ अरविंद सिंह ने डीपीआरओ को कारण बताओ नोटिस जारी कर आरोपियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने के कड़े निर्देश दिए, जिसके बाद भी डीपीआरओ कार्रवाई करने में टाल-मटोल करते रहेे। ग्राम पंचायत अधिकारी के खिलाफ उसी दिन शाम को कार्रवाई की, लेकिन सफाईकर्मी / प्रधानपति के खिलाफ दूसरे दिन कार्रवाई की गई। सीडीओ अरविंद सिंह द्वारा डीपीआरओ को प्रतिकूल प्रविष्टि दिए जाने के बाद नोडल आधिकारी/कमिश्नर मुकेश कुमार मेश्राम ने भी डीपीआरओ को प्रतिकूल प्रविष्टि दी थी।
आरोपों की जांच करेंगे अयोध्या के डीडी (पंचायत)
अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने डीपीआरओ अजय कुमार श्रीवास्तव पर लगे आरोपों को भी स्पष्ट किया है इसमें पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करना। लापरवाही, उदासीनता, उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना, नोडल अधिकारी के दौरे के दौरान बिना अवकाश स्वीकृत कराए मुख्यालय छोड़ना, शौचालय निर्माण में गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई न करना, बीडीओ बेहजम की जांच में दोषी पाए गए ग्राम पंचायत अधिकारी दिलीप गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई न करना शामिल है। इसी के चलते उन्हें निलंबित करते हुए निदेशक कार्यालय लखनऊ से संबद्ध किया गया है। साथ ही आरोपों की जांच अयोध्या के उपनिदेशक (पंचायत) को सौंपी है।
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डीपीआरओ के खिलाफ विभागीय कार्यों में लगातार लापरवाही करने के अलावा कई गंभीर आरोप थे। नोटिस दिए जाने पर वह जवाब नहीं देते थे और न ही निर्देशों का पालन कर रहे थे। इसलिए शासन ने उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है।
-अरविंद सिंह, सीडीओ
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गांवों में शौचालयों के निर्माण में धांधली करने वाले कर्मचारियों / प्रधानों पर शिकंजा कसने में डीपीआरओ नाकाम रहे, जिससे गांवों को ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) बनाने के अभियान को पलीता लग रहा था तो पसगवां ब्लॉक की ग्राम पंचायत खूंटी बुजुर्ग प्रकरण ने काफी तूल पकड़ा, जब पीडी की रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी सफाई कर्मी और ग्राम पंचायत अधिकारी के खिलाफ डीपीआरओ ने एक सप्ताह तक कोई कार्रवाई ही नहीं की। इसके बाद सीडीओ अरविंद सिंह ने डीपीआरओ को कारण बताओ नोटिस जारी कर आरोपियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने के कड़े निर्देश दिए, जिसके बाद भी डीपीआरओ कार्रवाई करने में टाल-मटोल करते रहेे। ग्राम पंचायत अधिकारी के खिलाफ उसी दिन शाम को कार्रवाई की, लेकिन सफाईकर्मी / प्रधानपति के खिलाफ दूसरे दिन कार्रवाई की गई। सीडीओ अरविंद सिंह द्वारा डीपीआरओ को प्रतिकूल प्रविष्टि दिए जाने के बाद नोडल आधिकारी/कमिश्नर मुकेश कुमार मेश्राम ने भी डीपीआरओ को प्रतिकूल प्रविष्टि दी थी।
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आरोपों की जांच करेंगे अयोध्या के डीडी (पंचायत)
अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने डीपीआरओ अजय कुमार श्रीवास्तव पर लगे आरोपों को भी स्पष्ट किया है इसमें पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करना। लापरवाही, उदासीनता, उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना, नोडल अधिकारी के दौरे के दौरान बिना अवकाश स्वीकृत कराए मुख्यालय छोड़ना, शौचालय निर्माण में गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई न करना, बीडीओ बेहजम की जांच में दोषी पाए गए ग्राम पंचायत अधिकारी दिलीप गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई न करना शामिल है। इसी के चलते उन्हें निलंबित करते हुए निदेशक कार्यालय लखनऊ से संबद्ध किया गया है। साथ ही आरोपों की जांच अयोध्या के उपनिदेशक (पंचायत) को सौंपी है।
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डीपीआरओ के खिलाफ विभागीय कार्यों में लगातार लापरवाही करने के अलावा कई गंभीर आरोप थे। नोटिस दिए जाने पर वह जवाब नहीं देते थे और न ही निर्देशों का पालन कर रहे थे। इसलिए शासन ने उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है।
-अरविंद सिंह, सीडीओ