{"_id":"5e27409d8ebc3e4b3268d627","slug":"civic-amenities-lakhimpur-news-bly3929409186","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोला की स्टेट बैंक की शाखा में जांच पड़ताल से खलबली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोला की स्टेट बैंक की शाखा में जांच पड़ताल से खलबली
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोला गोकर्णनाथ (लखीमपुर खीरी)। भारतीय स्टेट बैंक की स्थानीय शाखा में सीतापुर से आए बैंक के अफसरों ने मंगलवार को भी जांच पड़ताल की। मंगलवार को बैंक में पहुंचे खाता धारकों ने लेनदेन तो किया लेकिन प्रबंधक से मिलने से रोक दिया गया। सूत्रों के अनुसार तीन दिन पहले आरबीआई की टीम के आने के बाद यहां सोमवार से जांच पड़ताल शुरू हुई है।
बजाज हिंदुस्थान लिमिटेड चीनी मिल परिसर स्थित भारतीय स्टेट बैंक में पांच दिनों से यह चर्चा आम है कि बैंक में लोन दिलाने के नाम पर काफी हेराफेरी की गई है। हालांकि हेराफेरी की कोई अधिकृत जानकारी नहीं हो पाई। चर्चा अधिक होने पर कई खातेदार मंगलवार को बैंक में मैनेजर से अपने खाते की जानकारी करने गए तो उन्हें सुरक्षाकर्मियों ने यह कहकर रोक दिया कि उन्हें सख्त आदेश हैं कि कोई भी व्यक्ति मैनेजर से नहीं मिल सकता है। ऑडिट से जहां एक ओर बैंक कर्मचारियों, अधिकारियों के साथ खातेदारों, लेन देन करने वालों में भी अफरा तफरी का माहौल है। मीडिया कर्मियों के सामने न तो मैनेजर और न ही टीम के अधिकारियों ने मुंह खोला और न ही कोई जानकारी दी। इस संबंध में अन्य शाखाओं के अफसरों से जानकारी ली गई तो बताया कि आरबीआई की ओर से करेंसी चेक के लिए तीन माह में टीम आती है लेकिन जो स्थिति देखी गई उससे लगता है कि कुछ और भी वजह है। शाखा प्रबंधक उमेश पांडेय से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उनका भी मोबाइल स्विच ऑफ मिला।
विज्ञापन
बजाज हिंदुस्थान लिमिटेड चीनी मिल परिसर स्थित भारतीय स्टेट बैंक में पांच दिनों से यह चर्चा आम है कि बैंक में लोन दिलाने के नाम पर काफी हेराफेरी की गई है। हालांकि हेराफेरी की कोई अधिकृत जानकारी नहीं हो पाई। चर्चा अधिक होने पर कई खातेदार मंगलवार को बैंक में मैनेजर से अपने खाते की जानकारी करने गए तो उन्हें सुरक्षाकर्मियों ने यह कहकर रोक दिया कि उन्हें सख्त आदेश हैं कि कोई भी व्यक्ति मैनेजर से नहीं मिल सकता है। ऑडिट से जहां एक ओर बैंक कर्मचारियों, अधिकारियों के साथ खातेदारों, लेन देन करने वालों में भी अफरा तफरी का माहौल है। मीडिया कर्मियों के सामने न तो मैनेजर और न ही टीम के अधिकारियों ने मुंह खोला और न ही कोई जानकारी दी। इस संबंध में अन्य शाखाओं के अफसरों से जानकारी ली गई तो बताया कि आरबीआई की ओर से करेंसी चेक के लिए तीन माह में टीम आती है लेकिन जो स्थिति देखी गई उससे लगता है कि कुछ और भी वजह है। शाखा प्रबंधक उमेश पांडेय से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उनका भी मोबाइल स्विच ऑफ मिला।
विज्ञापन