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लगातार दूसरे सर्वेक्षण में फॉरेस्ट कवर में आई गिरावट

Sun, 12 Jan 2020 01:45 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 12 Jan 2020 01:45 AM IST
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लखीमपुर खीरी। भारतीय वन सर्वेक्षण की रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। लगातार दूसरे सर्वे में जनपद का फारेस्ट कवर (वनावरण) 0.94 वर्ग किमी घट गया है। इससे पहले 2017-18 की रिपोर्ट में भी 24 वर्ग किमी फारेस्ट कवर घटा था। वन विभाग समेत अन्य विभागों द्वारा प्रति वर्ष कराए जाने वाले पौधरोपण पर सवाल उठने लगे हैं। फारेस्ट कवर में गिरावट न सिर्फ पर्यावरण, बल्कि वन्य जीवों के लिहाज से भी खतरे की घंटी है। यहां के आरक्षित वन क्षेत्र में बाघ, हाथी, तेंदुआ, भालू और गैंडा समेत कई खास और आम वन्य जीव पाए जाते हैं। वन विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि जंगल से होकर गुजरने वाली शारदा और घाघरा नदियां हर साल कटान करके जंगल के बड़े भूभाग को निगल रहीं हैं।
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भारतीय वन सर्वेक्षण देहरादून की वन स्थिति रिपोर्ट ने वन अधिकारियों की चिंता बढ़ाने के साथ ही चुनौती भी खड़ी कर दी है। जनपद का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 7680 वर्ग किलोमीटर है, जिसके 16.59 प्रतिशत भूभाग (1274 वर्ग किलोमीटर) में फारेस्ट कवर (वनावरण) है। यह आंकड़ा पिछले कुछ सालों से आगे नहीं बढ़ पा रहा, क्योंकि जंगल के क्षेत्रफल में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। बाढ़ और नदियों के कटान से हर साल जिले में तबाही आती है, जिसका सबसे ज्यादा असर ग्रामीणों पर पड़ता देखा गया। इसके साथ ही अन्य विभागों के नुकसान पर रिपोर्ट बनाई गईं, लेकिन तराई की लाइफ लाइन कहे जाने वाले जंगलों पर भी नदियों का प्रकोप कहर बनकर टूट रहा है। इसकी अभी तक चर्चा नहीं की गई और न ही इस संबंध में कोई ठोस उपाय किए गए हैं। लिहाजा हर साल आने वाली बाढ़ और फिर उसके बाद होने वाले कटान में जंगल जमींदोज हो रहे हैं। इसकी रफ्तार इतनी है कि हर साल लाखों पौधे लगाए जाने के बाद भी जंगल के क्षेत्रफल में कमी आई है। भारतीय वन सर्वेक्षण देहरादून की वन स्थिति रिपोर्ट 2019 के मुताबिक 0.94 वर्ग किमी फारेस्ट कवर कम हुआ है, जबकि वर्ष 2017 में भी 24 वर्ग किमी की कमी आई थी। इससे फारेस्ट कवर 1274 से घटकर 1249.06 वर्ग किमी रह गया है।
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गैबेयिन स्ट्रक्चर से रोकेंगे नदियों का कटान
बफर जोन के जंगलों से होकर गुजरने वाली शारदा, मोहाना, सरयू, जौरहा आदि नदियों के कटान को रोकने के लिए वन विभाग ने रणनीति बनाई है। इसके लिए गैबेयिन स्ट्रक्चर बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, जिसमें नदियों के किनारे पर पत्थर और तार का जाल बिछाया जाएगा। इसकी मदद से नदियों का कटान रोकने के प्रयास किए जाएंगे।
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उत्तर खीरी बफर जोन समेत दुधवा नेशनल पार्क के जंगलों से गुजरने वाली नदियों के कटान से काफी वन संपदा को नुकसान पहुंचा है, जिसका नतीजा है कि फारेस्ट कवर में 0.94 वर्ग किमी की कमी आई है। पौधरोपण से ही इस कमी को दूर करके वन क्षेत्र में वृृद्धि की जाएगी। वर्ष 2018-19 में 30 पौधे लगाए गए थे, जबकि वर्ष 2019-20 में 46 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं।
-डॉ अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, बफरजोन एवं उत्तर खीरी वन प्रभाग
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