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आशा वर्करों के प्रशिक्षण के नाम पर की जा रही खानापूरी
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गैर संचारी रोगों से बचाव का दिया जा रहा प्रशिक्षण
आशा वर्करों ने खाने की गुणवत्ता पर उठाए सवाल
लखीमपुर खीरी। ग्रामीणों को विभिन्न गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए आशाओं केे प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे वे लोगों को इन बीमारियों के कारण, लक्षण और बचाव की जानकारी दे सकें। मगर, स्वास्थ्य महकमे के जिम्मेदार इसमें खेल कर प्रशिक्षण के नाम पर खानापूरी कर रहे हैं। ऐसे में गैर संचारी रोग से बचाव को लेकर शासन की मंशा प्रभावित हो रही है।
जिले की तीन हजार से अधिक आशा वर्करों को प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे आशा वर्कर गांव गांव जाकर ग्रामीणों को विस्तृत जानकारी देकर रोगों से बचाव के लिए जागरूक कर सकें। मगर, स्वास्थ्य महकमे के जिम्मेदारों ने प्रशिक्षण के नाम खानापूरी करनी शुरू कर दी है। नियमानुसार प्रशिक्षण के लिए 30- 30 के बैच बनने चाहिए और प्रशिक्षण आवासीय होना चाहिए। मगर, रुकने और खाने की उपयुक्त व्यवस्था न होने के कारण आशाएं रोजाना भागदौड़ करने को मजबूर हैं। न रुकने का दूसरा कारण खाना गुणवत्ता पूर्ण न होना बताया जाता है। इसको लेकर आशा वर्करों में नाराजगी है।
तो इसलिए दो बैच की एक में कराई जा रही ट्रेनिंग
विभागीय लोग बताते हैं कि जिले में तीन हजार से अधिक आशा वर्कर हैं। इन्हें ट्रेनिंग करने के लिए करीब तीन माह तक शिविर होना चाहिए। इसके लिए आशा वर्कर के दोनों समय का चाय, नाश्ता एवं खाने के साथ ट्रेनर के भुगतान को बजट आता है। मगर, इसके बावजूद दो बैच की एक साथ ट्रेनिंग कराकर सिर्फ खानापूरी हो रही है।
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गैर संचारी रोगों से बचाव आदि के प्रशिक्षण में खानापूरी नहीं होनी चाहिए। यदि ऐसा हो रहा है तो यह गलत है। इस मामले में सीएमओ से जानकारी की जाएगी।
-अरविंद सिंह
मुख्य विकास अधिकारी
इस मामले में एनसीडी के नोडल से जानकारी की जाएगी। प्रशिक्षण कराने के लिए पर्याप्त बजट है। खाना आदि गुणवत्ता पूर्ण दिया जाना चाहिए।
-डॉ. मनोज अग्रवाल, सीएमओ
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आशा वर्करों ने खाने की गुणवत्ता पर उठाए सवाल
लखीमपुर खीरी। ग्रामीणों को विभिन्न गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए आशाओं केे प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे वे लोगों को इन बीमारियों के कारण, लक्षण और बचाव की जानकारी दे सकें। मगर, स्वास्थ्य महकमे के जिम्मेदार इसमें खेल कर प्रशिक्षण के नाम पर खानापूरी कर रहे हैं। ऐसे में गैर संचारी रोग से बचाव को लेकर शासन की मंशा प्रभावित हो रही है।
जिले की तीन हजार से अधिक आशा वर्करों को प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे आशा वर्कर गांव गांव जाकर ग्रामीणों को विस्तृत जानकारी देकर रोगों से बचाव के लिए जागरूक कर सकें। मगर, स्वास्थ्य महकमे के जिम्मेदारों ने प्रशिक्षण के नाम खानापूरी करनी शुरू कर दी है। नियमानुसार प्रशिक्षण के लिए 30- 30 के बैच बनने चाहिए और प्रशिक्षण आवासीय होना चाहिए। मगर, रुकने और खाने की उपयुक्त व्यवस्था न होने के कारण आशाएं रोजाना भागदौड़ करने को मजबूर हैं। न रुकने का दूसरा कारण खाना गुणवत्ता पूर्ण न होना बताया जाता है। इसको लेकर आशा वर्करों में नाराजगी है।
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तो इसलिए दो बैच की एक में कराई जा रही ट्रेनिंग
विभागीय लोग बताते हैं कि जिले में तीन हजार से अधिक आशा वर्कर हैं। इन्हें ट्रेनिंग करने के लिए करीब तीन माह तक शिविर होना चाहिए। इसके लिए आशा वर्कर के दोनों समय का चाय, नाश्ता एवं खाने के साथ ट्रेनर के भुगतान को बजट आता है। मगर, इसके बावजूद दो बैच की एक साथ ट्रेनिंग कराकर सिर्फ खानापूरी हो रही है।
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गैर संचारी रोगों से बचाव आदि के प्रशिक्षण में खानापूरी नहीं होनी चाहिए। यदि ऐसा हो रहा है तो यह गलत है। इस मामले में सीएमओ से जानकारी की जाएगी।
-अरविंद सिंह
मुख्य विकास अधिकारी
इस मामले में एनसीडी के नोडल से जानकारी की जाएगी। प्रशिक्षण कराने के लिए पर्याप्त बजट है। खाना आदि गुणवत्ता पूर्ण दिया जाना चाहिए।
-डॉ. मनोज अग्रवाल, सीएमओ