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विसरा निस्तारण की प्रक्रिया शुरू, 65 जांच को भेजे
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लखीमपुर खीरी। जिले में बोतलों में कैद करीब तीन सौ से अधिक विसरा नष्ट हो चुके हैं। इनके निस्तारण की पहल शुरू हो गई है, जबकि जरूरी मामलों के 65 विसरा विवेचकों ने अब तक विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजे हैं।
दस साल में जिले में 780 से अधिक लोगों की मौत का राज बोतलों में कैद था। इनमें से तीन सौ से अधिक लोगों की मौत की असली वजह जानने की पुलिस ने कोशिश ही नहीं की। यह विसरा बोतलों मे बंद होने के बाद भी पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं। कई लावारिस लोगों की मौत का राज अब भी बोतलों में दफन है। पोस्टमार्टम हाउस में रखे तीन सौ से अधिक विसरा दस साल से अधिक पुराने हैं। अभी इन लोगों की मौत की सही वजह साफ नहीं हो सकी है। इन लोगों की मौत किन कारणों से हुई। इसकी जानकारी उनके घर वालों को नहीं है। पुलिस ने मौत की सही वजहों को जानने की कोशिश नहीं की। यह विसरा अब जांच लायक भी नहीं बचे हैं। कुछ को चूहों ने कुतर डाला तो कुछ खराब हो गए। पांच सालों में 413 विसरा सुरक्षित किए गए। इन्हें डॉक्टरों ने पुलिस के जरिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ भेजा। अमर उजाला ने इस खबर को चार दिसंबर के अंक में पेज संख्या पांच पर ‘बोतलों में दफन हो गया तीन सौ मौतों का राज’ शीर्षक खबर से छापा था। खबर का असर यह हुआ कि जिन विसरों को चूहों आदि ने नष्ट किया या जो विसरा जांच के लायक नहीं बचे हैं। इन विसरों के निस्तारण की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। विभिन्न थानों की पुलिस ने अब तक 65 विसरा जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ भेजे हैं।
तमाम ऐसे विसरे हैं, जिनकी जांच की जरूरत नहीं है। विसरों का निस्तारण की प्रक्रिया चालू है। करीब 65 विसरा पुलिस अब तक विधि विज्ञान प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेज चुकी है।
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-पूनम, एसपी
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दस साल में जिले में 780 से अधिक लोगों की मौत का राज बोतलों में कैद था। इनमें से तीन सौ से अधिक लोगों की मौत की असली वजह जानने की पुलिस ने कोशिश ही नहीं की। यह विसरा बोतलों मे बंद होने के बाद भी पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं। कई लावारिस लोगों की मौत का राज अब भी बोतलों में दफन है। पोस्टमार्टम हाउस में रखे तीन सौ से अधिक विसरा दस साल से अधिक पुराने हैं। अभी इन लोगों की मौत की सही वजह साफ नहीं हो सकी है। इन लोगों की मौत किन कारणों से हुई। इसकी जानकारी उनके घर वालों को नहीं है। पुलिस ने मौत की सही वजहों को जानने की कोशिश नहीं की। यह विसरा अब जांच लायक भी नहीं बचे हैं। कुछ को चूहों ने कुतर डाला तो कुछ खराब हो गए। पांच सालों में 413 विसरा सुरक्षित किए गए। इन्हें डॉक्टरों ने पुलिस के जरिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ भेजा। अमर उजाला ने इस खबर को चार दिसंबर के अंक में पेज संख्या पांच पर ‘बोतलों में दफन हो गया तीन सौ मौतों का राज’ शीर्षक खबर से छापा था। खबर का असर यह हुआ कि जिन विसरों को चूहों आदि ने नष्ट किया या जो विसरा जांच के लायक नहीं बचे हैं। इन विसरों के निस्तारण की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। विभिन्न थानों की पुलिस ने अब तक 65 विसरा जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ भेजे हैं।
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तमाम ऐसे विसरे हैं, जिनकी जांच की जरूरत नहीं है। विसरों का निस्तारण की प्रक्रिया चालू है। करीब 65 विसरा पुलिस अब तक विधि विज्ञान प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेज चुकी है।
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-पूनम, एसपी