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ग्राम पंचायत पटना की प्रधान को नोटिस जारी कर मांगा जवाब
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लखीमपुर खीरी। नकहा ब्लॉक की ग्राम पंचायत पटना में शौचालय निर्माण में 51.54 लाख रुपये के गबन के मामले में डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने प्रधान नेताइन को नोटिस जारी कर 15 दिन में साक्ष्यों सहित जवाब मांगा है। जवाब संतोषजनक न होने पर पंचायती राज अधिनियम 1947 के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी है। डीपीआरओ की स्थलीय जांच में खुलासे के बाद डीडीओ ने तत्कालीन सचिव आलोक शुक्ला को कुछ दिन पहले निलंबित किया था।
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत नकहा ब्लॉक की ग्राम पंचायत पटना के 10 मजरों मेें शौचालय निर्माण का हाल जानने के लिए डीपीआरओ अजय श्रीवास्तव ने गांवों में स्थलीय सत्यापन किया था, तो लाभार्थी ओमप्रकाश, सुखरानी, गीता, आशा देवी, सुनील, रमेश, रामखिलावन, फारूक के शौचालय अपूर्ण पाए गए। ग्राम पंचायत में कुल 533 शौचालय बनाने हैं, जिसके लिए वर्ष 2017-18 में 60 हजार, 2018-19 में 46 लाख आठ हजार रुपये और वर्ष 2019-20 में 17 लाख 28 हजार रुपये दिए गए। जांच में 107 आवास ही पूर्ण मिले। जबकि 168 निर्माणाधीन और 258 अनारंभ पाए गए। शौचालय बनाने के लिए मिले कुल 63 लाख 96 हजार रुपये के सापेक्ष 51 लाख 54 हजार की धनराशि बैंक खाते से निकाली जा चुकी है, जिससे 430 शौचालय पूर्ण हो जाने चाहिए थे। तत्कालीन सचिव आलोक शुक्ला ने अभी तक वर्तमान सचिव को चार्ज भी नहीं सौंपा है। इससे गांव में शौचालय निर्माण कर ओडीएफ बनाने का कार्य ठप पड़ा है। डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने प्रधान नेताइन को सचिव के साथ ही बराबर का दोषी मानते हुए कार्रवाई प्रारंभ कर दी है। डीएम ने प्रधान को नोटिस रिसीव कराने का बीडीओ संतोष सिंह को निर्देश दिया है।
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स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत नकहा ब्लॉक की ग्राम पंचायत पटना के 10 मजरों मेें शौचालय निर्माण का हाल जानने के लिए डीपीआरओ अजय श्रीवास्तव ने गांवों में स्थलीय सत्यापन किया था, तो लाभार्थी ओमप्रकाश, सुखरानी, गीता, आशा देवी, सुनील, रमेश, रामखिलावन, फारूक के शौचालय अपूर्ण पाए गए। ग्राम पंचायत में कुल 533 शौचालय बनाने हैं, जिसके लिए वर्ष 2017-18 में 60 हजार, 2018-19 में 46 लाख आठ हजार रुपये और वर्ष 2019-20 में 17 लाख 28 हजार रुपये दिए गए। जांच में 107 आवास ही पूर्ण मिले। जबकि 168 निर्माणाधीन और 258 अनारंभ पाए गए। शौचालय बनाने के लिए मिले कुल 63 लाख 96 हजार रुपये के सापेक्ष 51 लाख 54 हजार की धनराशि बैंक खाते से निकाली जा चुकी है, जिससे 430 शौचालय पूर्ण हो जाने चाहिए थे। तत्कालीन सचिव आलोक शुक्ला ने अभी तक वर्तमान सचिव को चार्ज भी नहीं सौंपा है। इससे गांव में शौचालय निर्माण कर ओडीएफ बनाने का कार्य ठप पड़ा है। डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने प्रधान नेताइन को सचिव के साथ ही बराबर का दोषी मानते हुए कार्रवाई प्रारंभ कर दी है। डीएम ने प्रधान को नोटिस रिसीव कराने का बीडीओ संतोष सिंह को निर्देश दिया है।
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