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टेरर फंडिंग खुलासे के बाद सीमा पर बढ़ाई सुरक्षा
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लखीमपुर खीरी/गौरीफंटा। टेरर फंडिंग गिरोह का खुलासा होने के बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। एसपी ने नेपाल के सीमावर्ती थानों को अलर्ट कर विशेष चौकसी बरतने के निर्देश दिए। इसके बाद शनिवार को नेपाल सीमा पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। वाहनों को खंगालने के साथ ही लोगों की भी तलाशी ली गई। इसके अलावा एक स्पेशल टीम गठित होगी, जो सीमा पर आने-जाने वाले लोगों और गतिविधियों पर लगातार कड़ी निगाह रखेगी।
भारत-नेपाल सीमा खुली है। इसका फायदा देश विरोधी ताकतें और तस्कर उठाते हैं। वैसे तो सीमा की निगरानी के लिए एसएसबी तैनात है, मगर नागरिक पुलिस, कस्टम, आईबी, एलआईयू समेत कई अन्य सुरक्षा एजेंसियां भी निगरानी रखती हैं। कड़ी सुरक्षा और निगरानी के बाद भी सीमा पर टेरर फंडिंग का गिरोह सक्रिय था, जो विदेश से नेपाल की बैंकों में आने वाली मुद्रा को भारतीय मुद्रा में बदलकर आतंकवादी गतिविधियों को संचालित करने वालों तक पहुंचाते थे। एक दशक से चल रहे इस धंधे की जानकारी खुफिया एजेंसियों को नहीं लग सकी। इसे बड़ी चूक माना जा रहा है।
अब एसपी ने नेपाल सीमा की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। जिले की नेपाल सीमा पर कोतवाली तिकुनियां, गौरीफंटा, चंदनचौकी और संपूर्णानगर चार थाने हैं। एसपी ने सभी थाना प्रभारियों को अलर्ट किया है। सीमा पर एसएसबी के सहयोग से विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। वहीं खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। एसपी पूनम ने बताया कि टेरर फंडिंग का खुलासा होने के बाद बॉर्डर पर संवेदनशीलता बढ़ गई है। अब छोटे स्तर के लोग जिनका आना-जाना नेपाल होता है, उन्हें भी चेक किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही एक स्पेशल टीम गठित होगी, जो सिर्फ साइकिल, बाइक और पैदल नेपाल आने जाने वालों को चेक करेगी। कारों से आने जाने वाले लोगों पर भी निगरानी करेगी।
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मुमताज ने मामा-बहनोई को भी शामिल कर लिया था धंधे में
लखीमपुर खीरी। एटीएस की पकड़ से बाहर तिकुनियां के गांव डांगा निवासी मुमताज ने टेरर फंडिंग के काम में अपने मामा और बहनोई को भी शामिल कर रखा था। मुमताज ही नेपाल में खाताधारकों को इस काम के लिए तैयार करता था। फिर उनके खाते में रकम आने के बाद उसे निकलवाकर लखीमपुर खीरी होते हुए दिल्ली भिजवाता था।
गांव डांगा नेपाल सीमा से करीब तीन किलोमीटर पहले भारत में स्थित है। डांगा चौराहा से बदालपुरवा रोड पर उसका मकान है। ग्रामीणों के मुताबिक मुमताज साइकिल पर 25 से 30 किलो आलू और प्याज नेपाल के भजनी, टीकापुर, पिरथीपुरवा आदि जगहों पर फेरी लगाकर बेचता था। करीब छह महीने से उसने नेपाल में फेरी लगाना भी बंद कर दिया था, लेकिन गुलरिया घाट होकर उसका अक्सर नेपाल आना-जाना रहता था। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के कुछ सफेदपोश छुटभैया नेता और फंडिंग मामले में जेल गया एराज अली मुमताज के गहरे दोस्त थे। इसके अलावा जब संदिग्ध लोग आते तब भी ये लोग उसके घर पर जाते थे। टेरर फंडिंग मामला सामने आने के बाद से मुमताज भागा हुआ है। एसपी पूनम ने बताया कि गिरफ्तार चार आरोपियों में बरेली के थाना इज्जतनगर के गांव परतापुर चौधरी निवासी उम्मेद अली मुमताज का मामा और सलीम सलमानी बहनोई है। विदेशों से पैसा खाते में आने के बाद उसे निकलवाकर वह मामा, बहनोई और अन्य सदस्यों के जरिए लखीमपुर होते हुए भिजवाता था। उम्मेद और सलीम गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
फहीम अपनी कार से पहुंचाता था रुपये
बरेली के थाना इज्जतनगर के गांव परतापुर चौधरी निवासी फहीम गिरोह के सदस्यों से सीधी बात करता था। उसे पैसा आने की बात पहले ही पता चल जाती थी। फहीम के पास एक स्विफ्ट डिजायर कार है। जिसे वह टैक्सी के रूप में चलाता है। इसी कार से वह रुपये दिल्ली के अलावा अन्य स्थानों पर आतंकवादी गतिविधियों को चलाने वालों के पास तक पहुंचाता था। टैक्सी की पुलिस भी अक्सर चेकिंग नहीं करती थी। वह कई बार इस कार से भारत-नेपाल सीमा पर भी आता रहा है।
ऐसे मिली खीरी पुलिस और एटीएस को गिरोह की जानकारी
नेपाल की बैंक की वेबसाइट को हैक करने 49 लाख रुपये निकाले जाने के मामले में पुलिस ने स्पेयर पार्ट्स व्यापारी विजय सिंह (मधेसी) और रामचंद्र बुड्ढा भजनी जिला कैलाली (नेपाल) और एक अन्य महिला के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। तीनों काठमांडू (नेपाल) की जेल में हैं। इनकी गिरफ्तारी के बाद नेपाली पुलिस तिकुनियां पहुंची थी। नेपाली पुलिस के आने का खुफिया एजेंसियों ने पुलिस को इनपुट दिया था। उसके बाद खीरी पुलिस और यूपी एटीएस हरकत में दिखी।
मुमताज के घर से चंद कदम पर रुकते हैं सिपाही
डांगा चौराहा पर पुलिस पिकेट रहती है। यह पिकेट मुमताज के घर से चंद कदमों की दूरी पर है। ग्रामीणों ने बताया कि कोतवाली तिकुनियां पुलिस के गश्ती सिपाही पिकेट के पास बनी एक व्यक्ति के छप्पर में नीचे रात भर आराम फरमाते हैं, लेकिन उन्हें भी मुमताज और उसके घर आने वाले संदिग्धों की जानकारी नहीं हो सकी। इससे गश्ती पुलिस की कार्यशैली पर भी सवालियां निशान उठ रहे हैं।
बड़े व्यापारियों और तस्करों के नेपाली बैंक में है खाते
निघासन। तिकुनियां कोतवाली क्षेत्र के गांव कड़िया, जसनगर, रायपुर, बनवीरपुर समेत कई गांव के तस्कर और बड़े व्यापारियों ने नेपाल के भजनी, टीकापुर समेत कई स्थानों पर स्थित बैंकों में अपने खाते खुलवा रखे हैं। जब कोई सामान नेपाल बेचकर व्यापारी आते हैं तो वह अपना लेनदेन वहीं से करते हैं।
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भारत-नेपाल सीमा खुली है। इसका फायदा देश विरोधी ताकतें और तस्कर उठाते हैं। वैसे तो सीमा की निगरानी के लिए एसएसबी तैनात है, मगर नागरिक पुलिस, कस्टम, आईबी, एलआईयू समेत कई अन्य सुरक्षा एजेंसियां भी निगरानी रखती हैं। कड़ी सुरक्षा और निगरानी के बाद भी सीमा पर टेरर फंडिंग का गिरोह सक्रिय था, जो विदेश से नेपाल की बैंकों में आने वाली मुद्रा को भारतीय मुद्रा में बदलकर आतंकवादी गतिविधियों को संचालित करने वालों तक पहुंचाते थे। एक दशक से चल रहे इस धंधे की जानकारी खुफिया एजेंसियों को नहीं लग सकी। इसे बड़ी चूक माना जा रहा है।
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अब एसपी ने नेपाल सीमा की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। जिले की नेपाल सीमा पर कोतवाली तिकुनियां, गौरीफंटा, चंदनचौकी और संपूर्णानगर चार थाने हैं। एसपी ने सभी थाना प्रभारियों को अलर्ट किया है। सीमा पर एसएसबी के सहयोग से विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। वहीं खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। एसपी पूनम ने बताया कि टेरर फंडिंग का खुलासा होने के बाद बॉर्डर पर संवेदनशीलता बढ़ गई है। अब छोटे स्तर के लोग जिनका आना-जाना नेपाल होता है, उन्हें भी चेक किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही एक स्पेशल टीम गठित होगी, जो सिर्फ साइकिल, बाइक और पैदल नेपाल आने जाने वालों को चेक करेगी। कारों से आने जाने वाले लोगों पर भी निगरानी करेगी।
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मुमताज ने मामा-बहनोई को भी शामिल कर लिया था धंधे में
लखीमपुर खीरी। एटीएस की पकड़ से बाहर तिकुनियां के गांव डांगा निवासी मुमताज ने टेरर फंडिंग के काम में अपने मामा और बहनोई को भी शामिल कर रखा था। मुमताज ही नेपाल में खाताधारकों को इस काम के लिए तैयार करता था। फिर उनके खाते में रकम आने के बाद उसे निकलवाकर लखीमपुर खीरी होते हुए दिल्ली भिजवाता था।
गांव डांगा नेपाल सीमा से करीब तीन किलोमीटर पहले भारत में स्थित है। डांगा चौराहा से बदालपुरवा रोड पर उसका मकान है। ग्रामीणों के मुताबिक मुमताज साइकिल पर 25 से 30 किलो आलू और प्याज नेपाल के भजनी, टीकापुर, पिरथीपुरवा आदि जगहों पर फेरी लगाकर बेचता था। करीब छह महीने से उसने नेपाल में फेरी लगाना भी बंद कर दिया था, लेकिन गुलरिया घाट होकर उसका अक्सर नेपाल आना-जाना रहता था। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के कुछ सफेदपोश छुटभैया नेता और फंडिंग मामले में जेल गया एराज अली मुमताज के गहरे दोस्त थे। इसके अलावा जब संदिग्ध लोग आते तब भी ये लोग उसके घर पर जाते थे। टेरर फंडिंग मामला सामने आने के बाद से मुमताज भागा हुआ है। एसपी पूनम ने बताया कि गिरफ्तार चार आरोपियों में बरेली के थाना इज्जतनगर के गांव परतापुर चौधरी निवासी उम्मेद अली मुमताज का मामा और सलीम सलमानी बहनोई है। विदेशों से पैसा खाते में आने के बाद उसे निकलवाकर वह मामा, बहनोई और अन्य सदस्यों के जरिए लखीमपुर होते हुए भिजवाता था। उम्मेद और सलीम गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
फहीम अपनी कार से पहुंचाता था रुपये
बरेली के थाना इज्जतनगर के गांव परतापुर चौधरी निवासी फहीम गिरोह के सदस्यों से सीधी बात करता था। उसे पैसा आने की बात पहले ही पता चल जाती थी। फहीम के पास एक स्विफ्ट डिजायर कार है। जिसे वह टैक्सी के रूप में चलाता है। इसी कार से वह रुपये दिल्ली के अलावा अन्य स्थानों पर आतंकवादी गतिविधियों को चलाने वालों के पास तक पहुंचाता था। टैक्सी की पुलिस भी अक्सर चेकिंग नहीं करती थी। वह कई बार इस कार से भारत-नेपाल सीमा पर भी आता रहा है।
ऐसे मिली खीरी पुलिस और एटीएस को गिरोह की जानकारी
नेपाल की बैंक की वेबसाइट को हैक करने 49 लाख रुपये निकाले जाने के मामले में पुलिस ने स्पेयर पार्ट्स व्यापारी विजय सिंह (मधेसी) और रामचंद्र बुड्ढा भजनी जिला कैलाली (नेपाल) और एक अन्य महिला के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। तीनों काठमांडू (नेपाल) की जेल में हैं। इनकी गिरफ्तारी के बाद नेपाली पुलिस तिकुनियां पहुंची थी। नेपाली पुलिस के आने का खुफिया एजेंसियों ने पुलिस को इनपुट दिया था। उसके बाद खीरी पुलिस और यूपी एटीएस हरकत में दिखी।
मुमताज के घर से चंद कदम पर रुकते हैं सिपाही
डांगा चौराहा पर पुलिस पिकेट रहती है। यह पिकेट मुमताज के घर से चंद कदमों की दूरी पर है। ग्रामीणों ने बताया कि कोतवाली तिकुनियां पुलिस के गश्ती सिपाही पिकेट के पास बनी एक व्यक्ति के छप्पर में नीचे रात भर आराम फरमाते हैं, लेकिन उन्हें भी मुमताज और उसके घर आने वाले संदिग्धों की जानकारी नहीं हो सकी। इससे गश्ती पुलिस की कार्यशैली पर भी सवालियां निशान उठ रहे हैं।
बड़े व्यापारियों और तस्करों के नेपाली बैंक में है खाते
निघासन। तिकुनियां कोतवाली क्षेत्र के गांव कड़िया, जसनगर, रायपुर, बनवीरपुर समेत कई गांव के तस्कर और बड़े व्यापारियों ने नेपाल के भजनी, टीकापुर समेत कई स्थानों पर स्थित बैंकों में अपने खाते खुलवा रखे हैं। जब कोई सामान नेपाल बेचकर व्यापारी आते हैं तो वह अपना लेनदेन वहीं से करते हैं।