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Lakhimpur Kheri News: छह साल से कम उम्र के बच्चे बाल वाटिका में सीखेंगे ककहरा
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लखीमपुर खीरी। प्ले स्कूलों की तर्ज पर छह साल से कम उम्र के बच्चों को प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलाें में खोली गईं बाल वाटिकाओं में क, ख, ग सिखाया जाएगा। नवीन सत्र शुरू होने के बाद परिषदीय स्कूलों में बच्चों के नामांकन कराए जा रहे हैं। छह साल की उम्र से कम वाले बच्चों का कक्षा एक में प्रवेश न देकर बाल वाटिका में प्रवेश कराया जाएगा।
निजी स्कूलों में दो से चार साल के बच्चों को प्ले ग्रुप में प्रवेश देकर स्कूली माहौल का ज्ञान कराया जाता है। उन्हें खेल-खेल में तमाम ज्ञानवर्धक बातें सिखाई जाती हैं। इसको देखते हुए परिषदीय स्कूलों में भी बाल वाटिका खोली गई हैं, जहां पर बच्चों को दीवारों पर लिखे रंग-बिरंगे अक्षरों को दिखाया और समझाया जाएगा।
सदर क्षेत्र में प्राथमिक, उच्च प्राथमिक सहित संविलियन विद्यालयों की संख्या 260 के आसपास है। इनमें से करीब 238 विद्यालयों में बाल वाटिका तैयार की गई हैं। छह साल से कम उम्र वाले बच्चों को बालवाटिका में प्रवेश दिया जाना है। बच्चों की देखरेख के लिए स्टाफ भी तैनात किया है। कई जगहों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी इसमें सहयोग कर रही हैं।
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जहां-जहां आंगनबाड़ी या फिर कंपोजिट स्कूल हैं, बाल वाटिका की जा रही है। स्कूलों की दीवारों पर क, ख, ग, और ए बी सी डी पेंट कराई गई है। बच्चों को समझाने के लिए जीव जंतुओं, फलों के आकार बनवाकर उन्हें दीवारों पर प्रदर्शित किया गया है। बच्चे इन्हीं चीजों को देखकर खुद को स्कूल के माहौल में ढाल रहे हैं।
बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी
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कक्षा एक में प्रवेश लेने के लिए बच्चे की उम्र छह साल तय
शासन की ओर से आए निर्देशों के बाद कक्षा एक में प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं की उम्र छह साल से कम नहीं होनी चाहिए। बताते हैं कि छह साल की उम्र वाले बच्चों को ही कक्षा एक में प्रवेश दिया जाएगा। कम उम्र होने की दशा में उन्हें बाल वाटिका में प्रवेश दिलाया जाएगा।
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निजी स्कूलों में दो से चार साल के बच्चों को प्ले ग्रुप में प्रवेश देकर स्कूली माहौल का ज्ञान कराया जाता है। उन्हें खेल-खेल में तमाम ज्ञानवर्धक बातें सिखाई जाती हैं। इसको देखते हुए परिषदीय स्कूलों में भी बाल वाटिका खोली गई हैं, जहां पर बच्चों को दीवारों पर लिखे रंग-बिरंगे अक्षरों को दिखाया और समझाया जाएगा।
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सदर क्षेत्र में प्राथमिक, उच्च प्राथमिक सहित संविलियन विद्यालयों की संख्या 260 के आसपास है। इनमें से करीब 238 विद्यालयों में बाल वाटिका तैयार की गई हैं। छह साल से कम उम्र वाले बच्चों को बालवाटिका में प्रवेश दिया जाना है। बच्चों की देखरेख के लिए स्टाफ भी तैनात किया है। कई जगहों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी इसमें सहयोग कर रही हैं।
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जहां-जहां आंगनबाड़ी या फिर कंपोजिट स्कूल हैं, बाल वाटिका की जा रही है। स्कूलों की दीवारों पर क, ख, ग, और ए बी सी डी पेंट कराई गई है। बच्चों को समझाने के लिए जीव जंतुओं, फलों के आकार बनवाकर उन्हें दीवारों पर प्रदर्शित किया गया है। बच्चे इन्हीं चीजों को देखकर खुद को स्कूल के माहौल में ढाल रहे हैं।
बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी
कक्षा एक में प्रवेश लेने के लिए बच्चे की उम्र छह साल तय
शासन की ओर से आए निर्देशों के बाद कक्षा एक में प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं की उम्र छह साल से कम नहीं होनी चाहिए। बताते हैं कि छह साल की उम्र वाले बच्चों को ही कक्षा एक में प्रवेश दिया जाएगा। कम उम्र होने की दशा में उन्हें बाल वाटिका में प्रवेश दिलाया जाएगा।