लखीमपुर खीरी। पेट पालने के लिए उत्तराखंड के चमोली गए मजदूरों के घर वाले अपनों से संपर्क न हो पाने के कारण परेशान हैं। तपोवन में हादसे की जब से खबर सुनी है परिवार वालों के हलक से पानी तक नीचे नहीं उतर रहा है। घर वालों की निगाहें बार-बार मोबाइल पर ठहर जाती हैं और घंटी बजने पर वे चौंक उठते हैं। घर वाले यही दुआ कर रहे हैं कि उनके अपने सलामत हों।
जिले से बड़ी संख्या में लोग हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा आदि प्रदेशों को मजदूरी करने जाते हैं। तहसील निघासन क्षेत्र की ग्राम पंचायत भेड़ौरी के मजरा बाबूपुरवा, भूलनपुर, कड़िया थाना सिंगाही के गांव भैरमपुर, इच्छानगर, तारनकोठी आदि गांवों से बड़ी संख्या में युवा मजदूर दो वक्त की रोटी की तलाश में चमोली गए थे। इनमें से अधिकतर मजदूर पॉवर प्रोजेक्ट तपोवन डैम पर काम कर रहे थे। ग्लेशियर टूटने की खबर जब मजदूरों के घरों पर आई तो उनमें अफरा-तफरी का माहौल बन गया। लोगों ने मोबाइल पर अपनों से संपर्क करने की कोशिश की। कुछ की तो बात हो गई, लेकिन करीब 40 मजदूरों के परिवार वालों का उनसे कोई संपर्क नहीं हो सका। लोग घरों में टीवी सेट, मोबाइल के जरिए हालात जानने और अपनों की खैरख्वाह लेने की कोशिश कर रहे हैं। मजदूरों के घरों में महिलाएं और बच्चों का रो-रोकर हाल बेहाल है। लोग उन्हें ढांढस बंधा रहे हैं। परिवार के लोगों की हालत यह है कि जब उनके मोबाइल पर कोई घंटी बजती है तो उनकी धड़कनें और तेज हो जाती हैं। अंजान फोन पर भी अपने लाल की खोज खबर पूछने लगते हैं। संवाद