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बाघ आकलन के लिए जंगल में 15 नवंबर से लगेंगे कैमरे
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- फोटो : demo photo
बाढ़ की वजह से काम शुरू होने में हुई देरी, इस बार कैमरा ट्रैपिंग और साइन सर्वे चलेंगे साथ-साथ
दुधवा और पीलीभीत टाइगर रिजर्व में दो चरणों में लगाए जाएंगे कैमरे
लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व का पर्यटन सत्र शुरू होने के साथ ही टाइगर एस्टीमेशन-2022 का काम भी 15 नवंबर से शुरू हो जाएगा। दुधवा टाइगर रिजर्व और पीलीभीत टाइगर रिजर्व में एक साथ हो रहे टाइगर एस्टीमेशन (बाघ आकलन) के लिए कैमरा ट्रैपिंग दो चरणों में कराई जाएगी। बाढ़ के कारण बाघ आकलन का काम देर से शुरू होने के कारण इस बार कैमरा ट्रैपिंग और साइन सर्वे का काम एक साथ चलेगा।
बाघ आकलन के लिए वनाधिकारियों का प्रशिक्षण नवंबर के अंतिम सप्ताह में दुधवा में होना था, लेकिन अचानक बाढ़ आ जाने के कारण यह नहीं हो सका। इसलिए कैमरा ट्रैपिंग और साइन सर्वे साथ-साथ करने का निर्णय लिया गया है। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर एवं टाइगर एस्टीमेशन उत्तर प्रदेश के नोडल अधिकारी संजय पाठक ने बताया कि 15 नवंबर से जंगल में कैमरा लगाने काम शुरू होगा।
कैमरा ट्रैपिंग का काम दो चरणों में होगा। पहले चरण में दुधवा टाइगर रिजर्व की किशनपुर सेंक्चुरी, बफर जोन की भीरा, मैलानी रेंज, दक्षिण खीरी वन प्रभाग के गोला और मोहम्मदी रेंज के अलावा संपूर्ण पीलीभीत टाइगर रिजर्व में 557 जोड़ी यानी कुल 1112 कैमरे लगाए जाएंगे, जबकि फेज दो में दुधवा नेशनल पार्क, कर्तनियाघाट और बफर जोन के शेष हिस्सों में 668 जोड़ी कुल 1336 कैमरे लगाए जाएंगे। पहले चरण में कैमरे लगाने का काम 15 नवंबर से शुरू कर 20 नवंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। यह कैमरे एक माह तक अपने स्थान पर लगे रहेंगे। बाद में इनकी तस्वीरें विश्लेषण के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून को भेजी जाएंगी।
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दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने बताया कि कैमरा ट्रैपिंग के पहले साइन सर्वे किया जाता है। बाढ़ आने के कारण पहले साइन सर्वे नहीं हो सका है। इसलिए साइन सर्वे का कैमरा ट्रैपिंग के समानांतर चलेगा। इसी साइन सर्वे के दौरान जंगली हाथियों और गैंडों की भी वैज्ञानिक गणना की जाएगी।
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दुधवा और पीलीभीत टाइगर रिजर्व में दो चरणों में लगाए जाएंगे कैमरे
लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व का पर्यटन सत्र शुरू होने के साथ ही टाइगर एस्टीमेशन-2022 का काम भी 15 नवंबर से शुरू हो जाएगा। दुधवा टाइगर रिजर्व और पीलीभीत टाइगर रिजर्व में एक साथ हो रहे टाइगर एस्टीमेशन (बाघ आकलन) के लिए कैमरा ट्रैपिंग दो चरणों में कराई जाएगी। बाढ़ के कारण बाघ आकलन का काम देर से शुरू होने के कारण इस बार कैमरा ट्रैपिंग और साइन सर्वे का काम एक साथ चलेगा।
बाघ आकलन के लिए वनाधिकारियों का प्रशिक्षण नवंबर के अंतिम सप्ताह में दुधवा में होना था, लेकिन अचानक बाढ़ आ जाने के कारण यह नहीं हो सका। इसलिए कैमरा ट्रैपिंग और साइन सर्वे साथ-साथ करने का निर्णय लिया गया है। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर एवं टाइगर एस्टीमेशन उत्तर प्रदेश के नोडल अधिकारी संजय पाठक ने बताया कि 15 नवंबर से जंगल में कैमरा लगाने काम शुरू होगा।
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कैमरा ट्रैपिंग का काम दो चरणों में होगा। पहले चरण में दुधवा टाइगर रिजर्व की किशनपुर सेंक्चुरी, बफर जोन की भीरा, मैलानी रेंज, दक्षिण खीरी वन प्रभाग के गोला और मोहम्मदी रेंज के अलावा संपूर्ण पीलीभीत टाइगर रिजर्व में 557 जोड़ी यानी कुल 1112 कैमरे लगाए जाएंगे, जबकि फेज दो में दुधवा नेशनल पार्क, कर्तनियाघाट और बफर जोन के शेष हिस्सों में 668 जोड़ी कुल 1336 कैमरे लगाए जाएंगे। पहले चरण में कैमरे लगाने का काम 15 नवंबर से शुरू कर 20 नवंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। यह कैमरे एक माह तक अपने स्थान पर लगे रहेंगे। बाद में इनकी तस्वीरें विश्लेषण के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून को भेजी जाएंगी।
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दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने बताया कि कैमरा ट्रैपिंग के पहले साइन सर्वे किया जाता है। बाढ़ आने के कारण पहले साइन सर्वे नहीं हो सका है। इसलिए साइन सर्वे का कैमरा ट्रैपिंग के समानांतर चलेगा। इसी साइन सर्वे के दौरान जंगली हाथियों और गैंडों की भी वैज्ञानिक गणना की जाएगी।