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Lakhimpur Kheri News: बसपा ने रोकी भाजपा की हैट्रिक तो गठबंधन के खुले जीत के द्वार

Thu, 06 Jun 2024 03:14 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 06 Jun 2024 03:14 AM IST
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BSP stops BJP's hat-trick, doors open for victory for alliance
लखीमपुर खीरी। जिस तरह से खीरी और धौरहरा सीटों के नतीजे आए हैं, उससे यही माना जा रहा है कि भाजपा की हैट्रिक के बीच में बसपा खड़ी हो गई और भाजपा जीत से दूर होती चली गई। भले ही दोनों सीटों पर बसपा का वोट प्रतिशत कम हुआ , लेकिन बसपा की मजबूती का लाभ गठबंधन को ज्यादा मिला। धौरहरा सीट पर बसपा ने भाजपा को सर्वाधिक नुकसान पहुंचाया। भाजपा की हार के पीछे महंगाई, बेरोजगारी, परीक्षाओं के निरस्त होने के मुद्दों को उछालना भी कारण माना जा रहा है।
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बसपा कमजोर होती तो हार का अंतर और बढ़ सकता था
खीरी सीट गठबंधन के खाते में पहुंचाने के पीछे बसपा का अहम रोल रहा है। तिकुनिया कांड का असर भले ही भाजपा के लोग नहीं मान रहे हैं लेकिन जिस तरह से गठबंधन को वोट मिलने के साथ बसपा को वोट मिला है, उससे यही माना जा रहा है कि इस कांड का असर पड़ा है। लेकिन इसका लाभ बसपा को मिला है। यदि बसपा कमजोर होती तो इसका भी लाभ गठबंधन को ही जाता और भाजपा की हार का अंतर और बढ़ जाता। सिख समाज का काफी वोट बसपा प्रत्याशी अंशय कालरा को मिला है। अंशय ने इस सीट पर 110460 यानी 9.8 प्रतिशत लोगों का समर्थन पाया है।
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भाजपा की हार का प्रमुख कारण यह भी
धौरहरा सीट पर बसपा ने सर्वाधिक नुकसान भाजपा को पहुंचाया है। विधानसभा और लोकसभा चुनाव में टिकट न मिलने से भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाने वाले श्याम किशोर अवस्थी बसपा के साथ चले गए और चुनाव मैदान में उतर गए। वह ब्राह्मण वोटरों के सहारे अपनी चुनावी नैया पार लगाना चाह रहे थे। वह जीत तो नहीं पाए लेकिन भाजपा की रेखा अरुण वर्मा की हैट्रिक के बीच में खड़े हो गए। श्याम किशोर अवस्थी को 1.84 लाख से ज्यादा वोट मिले हैं। यदि श्याम किशोर भाजपा के साथ होते तो ये वोट भाजपा के खाते में जाता।
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यह भी हार के कारण रहे
दस साल से जिले में तमाम सड़कें नहीं बनीं हैं। इस चुनाव में तमाम गांवों में विरोध सामने आया। लोगों ने चुनाव बहिष्कार के बैनर तक लगाए थे।
बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में काम नहीं हुआ है। बाढ़ की विभीषिका लंबे समय से लोग झेल रहे हैं। उनकी नहीं सुनी जा रही है।
छुट्टा पशुओं ने किसानों का जीना मुश्किल कर दिया है। छुट्टा पशुओं से निजात दिलाने का कोई काम नहीं हुआ।
जनप्रतिनिधियों की जनता जनार्दन से खाई बढ़ती गई। भाजपा के कार्यकर्ताओं की नहीं सुनी जा रही थी।
तिकुनिया कांड के बाद से सिख समाज में खासी नाराजगी थी।
भाजपा के कई विधायक अंदरखाने नाराज चल रहे थे, उन्हें मनाने के लिए कोई पहल नहीं हुई।
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