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Lakhimpur Kheri News: हाथियों के लिए बड़े और गहरे बनाए जाएंगे वाटर होल्स
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बांकेगंज/पलिया। दुधवा टाइगर रिजर्व के हाथी रिजर्व का हिस्सा बनने के बाद अब वाटरहोल्स का और बेहतर प्रबंधन किए जाने की तैयारी है। हाथियों के लिए वाटर होल्स बड़े और गहरे किए जाएंगे, ताकि पानी पीने के साथ जलक्रीड़ा भी कर सकें।
गर्मियों के मौसम में वन्यजीवों के लिए पानी का संकट पैदा न हो, इसके लिए दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने जंगल में बने कच्चे और पक्के वाटरहोल्स में टैंकरों के जरिये पानी भरवाना शुरू कर दिया है। पुराने बनाए गए कृत्रिम वाटरहोल्स में अधिकांश छोटे हैं। इनमें बाघ, तेंदुआ, भालू, हिरन आदि तो पानी पी लेते हैं, लेकिन हाथियों के लिए यह पानी पर्याप्त नहीं होता। हाथी ज्यादा पानी पीते हैं। उन्हें जलविहार करना भी बहुत पसंद है। इस लिहाज से यह वाटहोल्स छोटे पड़ जाते हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर ललित कुमार वर्मा ने बताया कि अब टाइगर रिजर्व के वाटरहोल्स को हाथी रिजर्व के हिसाब से बनाया जाएगा। छोटे वाटरहोल्स बड़े और गहरे किए जाएंगे। सौर ऊर्जा चालित ट्यूबवेल लगाए जाएंगे, ताकि इंजन चलते समय आवाज न हो और शांत वातावरण में आशांति न पैदा हो। हाथियों के झुंड पानी पीने के साथ जल क्रीड़ा कर सकें। इसकी तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। जल्दी ही टाइगर कंजरवेशन के लिए मिले फंड से प्रबंधन शुरू किया जाएगा।
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वन्यजीवों को पानी के लिए जंगल से बाहर न निकलना पड़े
उन्हाेंने बताया कि गर्मियों की शुरुआत होते ही कोरजोन, बफरजोन की सभी रेंज किशनपुर सेंक्चुरी, दक्षिण सोनारीपुर, बेलरायां, मैलानी, भीरा आदि में बने कच्चे और पक्के वाटरहोल्स की साफ-सफाई के बाद उनमें स्वच्छ और ताजा पानी भरवाने के लिए सभी वन क्षेत्राधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। ताकि प्यास लगने पर वन्यजीवों को जंगल के अंदर ही पीने का पानी मिल सके। उन्हें जंगल के बाहर न निकलना पड़े।
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गर्मियों के मौसम में वन्यजीवों के लिए पानी का संकट पैदा न हो, इसके लिए दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने जंगल में बने कच्चे और पक्के वाटरहोल्स में टैंकरों के जरिये पानी भरवाना शुरू कर दिया है। पुराने बनाए गए कृत्रिम वाटरहोल्स में अधिकांश छोटे हैं। इनमें बाघ, तेंदुआ, भालू, हिरन आदि तो पानी पी लेते हैं, लेकिन हाथियों के लिए यह पानी पर्याप्त नहीं होता। हाथी ज्यादा पानी पीते हैं। उन्हें जलविहार करना भी बहुत पसंद है। इस लिहाज से यह वाटहोल्स छोटे पड़ जाते हैं।
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दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर ललित कुमार वर्मा ने बताया कि अब टाइगर रिजर्व के वाटरहोल्स को हाथी रिजर्व के हिसाब से बनाया जाएगा। छोटे वाटरहोल्स बड़े और गहरे किए जाएंगे। सौर ऊर्जा चालित ट्यूबवेल लगाए जाएंगे, ताकि इंजन चलते समय आवाज न हो और शांत वातावरण में आशांति न पैदा हो। हाथियों के झुंड पानी पीने के साथ जल क्रीड़ा कर सकें। इसकी तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। जल्दी ही टाइगर कंजरवेशन के लिए मिले फंड से प्रबंधन शुरू किया जाएगा।
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वन्यजीवों को पानी के लिए जंगल से बाहर न निकलना पड़े
उन्हाेंने बताया कि गर्मियों की शुरुआत होते ही कोरजोन, बफरजोन की सभी रेंज किशनपुर सेंक्चुरी, दक्षिण सोनारीपुर, बेलरायां, मैलानी, भीरा आदि में बने कच्चे और पक्के वाटरहोल्स की साफ-सफाई के बाद उनमें स्वच्छ और ताजा पानी भरवाने के लिए सभी वन क्षेत्राधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। ताकि प्यास लगने पर वन्यजीवों को जंगल के अंदर ही पीने का पानी मिल सके। उन्हें जंगल के बाहर न निकलना पड़े।