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भोले बाबा के प्रति श्रद्धालुओं में है अगाध श्रद्धा
अमर उजाला ब्यूरो गोला गोकर्णनाथ।
Updated Fri, 22 Jul 2016 11:25 PM IST
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शिव पार्वती
- फोटो : अमर उजाला
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सावन में श्रद्धालुओं ने चांदी से मढ़ा अरघा
सावन माह में छोटी काशी के भगवान शिव के पौराणिक मंदिर में श्रद्धालु नाना प्रकार से भोलेनाथ को मनाने और पूजन अर्चन में लगे हैं। मंदिर परिसर में कहीं शिव स्त्रोत, अखंडपाठ, तो कहीं कल्पवास पर आए श्रद्धालुओं की स्तुतियां वातावरण को भक्तिमय बना रही हैं। श्रद्धालुओं ने सावन में मंदिर के अंदर शिवलिंग के चारों ओर बने अरघे को चांदी के पत्तर से मढ़कर उस पर दर्जनों सोने के सिक्के जड़े हैं। जिस पर पड़ने वाली दूधिया रोशनी से मंदिर के अंदर की छटा निराली है।
एक माह के कल्पवास पर आए हैं श्रद्घालु
सावन माह में पौराणिक शिव मंदिर परिसर घंटा निनाद, भक्तों और श्रद्धालुओं के जयघोष से गुंजायमान है, वहीं मंदिर परिसर के पास जानकी सत्संग भवन में एक माह के कल्पवास पर आए श्रद्धालु शिवभक्ति की धारा प्रवाहित कर रहे हैं। सत्संग भवन में परसेरा खुर्द के केशवदास, पिहानी हरदोई के पं सुरेशचंद, नकहा से पत्नी माया देवी के साथ मेवालाल, सीतापुर के कोलगढ़ से पुत्तीलाल, ईशानगर शिवपुर से पत्नी राधिका के साथ राजितराम पांडे, पांच वर्षों से मंदिर परिसर में एक माह का कल्पवास करते हैं। श्रद्धालुओं ने बताया कि वह अपने पारिवारिक जिम्मेदारी को बखूबी निभाने के बाद भगवान की शरण में शेष जीवन बिताना चाहते हैं। वह माघ माह में प्रयाग में एक माह का कल्पवास करते हैं। छोटी काशी में उनका आगमन अषाढ़ी पूर्णिमा को होता है और यहां से वह सावन के अंत में शिव जी को रक्षा सूत्र अर्पित कर प्रस्थान करते हैं। उन सबका अपना भरा पूरा परिवार है। जिसके लिए वह सुख समृद्धि की कामना करते हुए ईश्वर का धन्यवाद देते हैं।
चित्रकारी कर सजाया है शिव मंदिर परिसर
सावन माह में छोटी काशी के पौराणिक शिव मंदिर में दर्शनार्थ आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर के सत्संग भवनों की दीवारों पर बनी देवी देवताओं की चित्रकारी अपनी ओर आकर्षित करती है।
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मोहल्ला मुन्नूगंज निवासी दीपक शर्मा ने जानकी सत्संग भवन, पार्वती सत्संग भवन, नीलकंठ मैदान की दीवारों पर देवी देवताओं की लीलाओं पर आधारित चित्रकारी की है वहीं श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर द्वार के ऊपर श्रीराम, लक्ष्मण, माता सीता और भक्त शबरी के जूठे बेर खाते भगवान राम की झांकी सजाकर रंग भरे हैं। जिससे पूरा मंदिर परिसर श्रद्धालुओं के रंगों से सराबोर दिख रहा है। दीपक ने बताया कि उनके पिता हरद्वारीलाल शर्मा भी एक अच्छे चित्रकार हैं, साथ ही उनकी माता पुष्पा देवी और पत्नी रेनू शर्मा भी अच्छे चित्रकार हैं।
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सावन माह में छोटी काशी के भगवान शिव के पौराणिक मंदिर में श्रद्धालु नाना प्रकार से भोलेनाथ को मनाने और पूजन अर्चन में लगे हैं। मंदिर परिसर में कहीं शिव स्त्रोत, अखंडपाठ, तो कहीं कल्पवास पर आए श्रद्धालुओं की स्तुतियां वातावरण को भक्तिमय बना रही हैं। श्रद्धालुओं ने सावन में मंदिर के अंदर शिवलिंग के चारों ओर बने अरघे को चांदी के पत्तर से मढ़कर उस पर दर्जनों सोने के सिक्के जड़े हैं। जिस पर पड़ने वाली दूधिया रोशनी से मंदिर के अंदर की छटा निराली है।
एक माह के कल्पवास पर आए हैं श्रद्घालु
सावन माह में पौराणिक शिव मंदिर परिसर घंटा निनाद, भक्तों और श्रद्धालुओं के जयघोष से गुंजायमान है, वहीं मंदिर परिसर के पास जानकी सत्संग भवन में एक माह के कल्पवास पर आए श्रद्धालु शिवभक्ति की धारा प्रवाहित कर रहे हैं। सत्संग भवन में परसेरा खुर्द के केशवदास, पिहानी हरदोई के पं सुरेशचंद, नकहा से पत्नी माया देवी के साथ मेवालाल, सीतापुर के कोलगढ़ से पुत्तीलाल, ईशानगर शिवपुर से पत्नी राधिका के साथ राजितराम पांडे, पांच वर्षों से मंदिर परिसर में एक माह का कल्पवास करते हैं। श्रद्धालुओं ने बताया कि वह अपने पारिवारिक जिम्मेदारी को बखूबी निभाने के बाद भगवान की शरण में शेष जीवन बिताना चाहते हैं। वह माघ माह में प्रयाग में एक माह का कल्पवास करते हैं। छोटी काशी में उनका आगमन अषाढ़ी पूर्णिमा को होता है और यहां से वह सावन के अंत में शिव जी को रक्षा सूत्र अर्पित कर प्रस्थान करते हैं। उन सबका अपना भरा पूरा परिवार है। जिसके लिए वह सुख समृद्धि की कामना करते हुए ईश्वर का धन्यवाद देते हैं।
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चित्रकारी कर सजाया है शिव मंदिर परिसर
सावन माह में छोटी काशी के पौराणिक शिव मंदिर में दर्शनार्थ आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर के सत्संग भवनों की दीवारों पर बनी देवी देवताओं की चित्रकारी अपनी ओर आकर्षित करती है।
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मोहल्ला मुन्नूगंज निवासी दीपक शर्मा ने जानकी सत्संग भवन, पार्वती सत्संग भवन, नीलकंठ मैदान की दीवारों पर देवी देवताओं की लीलाओं पर आधारित चित्रकारी की है वहीं श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर द्वार के ऊपर श्रीराम, लक्ष्मण, माता सीता और भक्त शबरी के जूठे बेर खाते भगवान राम की झांकी सजाकर रंग भरे हैं। जिससे पूरा मंदिर परिसर श्रद्धालुओं के रंगों से सराबोर दिख रहा है। दीपक ने बताया कि उनके पिता हरद्वारीलाल शर्मा भी एक अच्छे चित्रकार हैं, साथ ही उनकी माता पुष्पा देवी और पत्नी रेनू शर्मा भी अच्छे चित्रकार हैं।