{"_id":"60563ded8ebc3ed8347edf8b","slug":"beware-of-adulterants-fake-mawa-paneer-being-ordered-from-outside-lakhimpur-news-bly441241144","type":"story","status":"publish","title_hn":"मिलावटखोरों से रहें सावधान, बाहर से मंगाया जा रहा नकली मावा-पनीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मिलावटखोरों से रहें सावधान, बाहर से मंगाया जा रहा नकली मावा-पनीर
विज्ञापन
लखीमपुर खीरी। होली में एक सप्ताह शेष है, जिससे बाजार में नकली मावा, पनीर और दूध खपाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। होली के प्रमुख पकवान गुझिया बनाने में मावा का प्रयोग होता है। मिलावटखोरों के सक्रिय होने से होली पर लोगों की सेहत खतरे में पड़ सकती है। खाद्य सुरक्षा औषधि प्रशासन ने टीमें बनाकर छापे मारी शुरू कर दी है, जिसने एक दिन पहले ही गोला और मोहम्मदी में 40 किलोग्राम खराब मावा को नष्ट कराया था। ऐसे में मिलावटी मावा समेत अन्य खाद्य पदार्थों से बचने के लिए लोगों को भी सावधानी बरतनी होगी।
जनपद में औसतन प्रतिदिन 92 हजार लीटर दूूध का उत्पादन होता है, जिसमें से 85 हजार लीटर दूध का जिले में ही उपभोग किया जाता है। शेष दूध की आपूर्ति पराग लखनऊ समेत अन्य प्राइवेट डेयरियां विभिन्न उत्पाद बनाने में करती हैं। होली पर मावा की डिमांड सबसे अधिक रहती है, जिससे मिलावटखोर नकली मावा की आपूर्ति बाजार में करते हैं। सूत्र बताते हैं कि जिले में बाहर से नकली मावा और पनीर मंगाया जाता है, जिसे पकड़ने में एफएसडीए टीम को खासी मशक्कत करनी पड़ती है।
मजबूत नेटवर्क के सहारे ही नकली मावा को पकड़ा जा सकता है। हालांकि दो तीन पहले जिले में नकली मावा तैयार किए जाने के मामले पकड़े गए थे, जिसके बाद एफएसडीए ने नकली मावा बनाने वालों पर कार्रवाई की थी। इसके बावजूद नकली मावा बनाने वाले और बाहर के जिलों से नकली मावा लाकर बेचने वाले मिलावटखोर सक्रिय हैं, जो मौका पाकर मिलावटी व नकली मावा बाजार में खपाते हैं। हालांकि कई दुकानदार बाजार में ही दूध से मावा तैयार करते हैं, जिन्होंने मावा बनाकर स्टॉक करना शुरू कर दिया है। शनिवार को बाजार में 280 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से मावा बिका, लेकिन होली तक इसके रेट 400 रूपये तक जा सकते हैं।
विज्ञापन
नकली मावा की ऐसे करें पहचान
खाद्य सुरक्षा अधिकारी विवेक कुमार ने बताया कि मावा को अपने अंगूठे के नाखून पर रगड़ें। असली मावा होने पर घी की खुशबू आएगी। हथेली पर मावा की गोली बनाने पर फटने लगे तो समझिए मावा नकली है या इसमें मिलावट की गई है। केमिकल जांच के लिए दो ग्राम मावा को पांच मिलीलीटर गरम पानी में घोल लें, फिर ठंडा होने के बाद इसमें आयोडीन डालें। यदि मावा नकली होगा तो इसका रंग नीला हो जाएगा। मावे में थोड़ी चीनी डालकर गरम करें, यदि पानी छोड़ने लगे तो यह नकली मावा है। इसके अलावा मावा को चखकर पहचान की जा सकती है, जिससे मुंह में चिपकने पर मावा नकली होगा।
रंगीन कचरी-पापड़ से रहे दूर, इनसे सेहत का खतरा
होली में गुझियों के साथ ही कचरी-पापड़ से भी लोगों का स्वागत किया जाता है, जिससे बाजार में तरह-तरह के रेडीमेड कचरी-पापड़ बिकने लगे हैं। चटख रंगीन कचरी-पापड़ में अखाद्य रंगों की मिलावट किए जाने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है, जिसके खाने से पेट संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। बाजार में इनकी डिमांड बढ़ने से मिलावटखोर फायदा उठाने के प्रयास में हैं।
कचरी की कीमत बाजार में 50 से 200 रुपये प्रति किलोग्राम तक है। चमकदार और रंगीन चिप्स, पापड़ की कीमत अधिक है, लेकिन लोगों को यह नहीं पता कि चमकदार दिखने वाली इन चीजों से नुकसान भी ज्यादा है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ऐसी रंगीन कचरी-पापड़ के खिलाफ अभियान चला रही हैं, लेकिन लोगों को भी जागरूक होना होगा। ऐसे रंगीन कचरी पापड़ खाने से दस्त, पेट में सक्रमण, त्वचा की एलर्जी और डायरिया की आशंका रहती है।
बाजार में मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। टीमें लगातार बाजार में घूमकर संदिग्ध वस्तुओं के नमूने भर रही हैं। रंगीन कचरी पापड़ मिलावटी हो सकते हैं। इसलिए लोग वस्तुओं की खरीदादारी में सावधानी बरतें।
- कौशलेंद्र शर्मा, अभिहित अधिकारी
विज्ञापन
जनपद में औसतन प्रतिदिन 92 हजार लीटर दूूध का उत्पादन होता है, जिसमें से 85 हजार लीटर दूध का जिले में ही उपभोग किया जाता है। शेष दूध की आपूर्ति पराग लखनऊ समेत अन्य प्राइवेट डेयरियां विभिन्न उत्पाद बनाने में करती हैं। होली पर मावा की डिमांड सबसे अधिक रहती है, जिससे मिलावटखोर नकली मावा की आपूर्ति बाजार में करते हैं। सूत्र बताते हैं कि जिले में बाहर से नकली मावा और पनीर मंगाया जाता है, जिसे पकड़ने में एफएसडीए टीम को खासी मशक्कत करनी पड़ती है।
विज्ञापन
मजबूत नेटवर्क के सहारे ही नकली मावा को पकड़ा जा सकता है। हालांकि दो तीन पहले जिले में नकली मावा तैयार किए जाने के मामले पकड़े गए थे, जिसके बाद एफएसडीए ने नकली मावा बनाने वालों पर कार्रवाई की थी। इसके बावजूद नकली मावा बनाने वाले और बाहर के जिलों से नकली मावा लाकर बेचने वाले मिलावटखोर सक्रिय हैं, जो मौका पाकर मिलावटी व नकली मावा बाजार में खपाते हैं। हालांकि कई दुकानदार बाजार में ही दूध से मावा तैयार करते हैं, जिन्होंने मावा बनाकर स्टॉक करना शुरू कर दिया है। शनिवार को बाजार में 280 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से मावा बिका, लेकिन होली तक इसके रेट 400 रूपये तक जा सकते हैं।
विज्ञापन
नकली मावा की ऐसे करें पहचान
खाद्य सुरक्षा अधिकारी विवेक कुमार ने बताया कि मावा को अपने अंगूठे के नाखून पर रगड़ें। असली मावा होने पर घी की खुशबू आएगी। हथेली पर मावा की गोली बनाने पर फटने लगे तो समझिए मावा नकली है या इसमें मिलावट की गई है। केमिकल जांच के लिए दो ग्राम मावा को पांच मिलीलीटर गरम पानी में घोल लें, फिर ठंडा होने के बाद इसमें आयोडीन डालें। यदि मावा नकली होगा तो इसका रंग नीला हो जाएगा। मावे में थोड़ी चीनी डालकर गरम करें, यदि पानी छोड़ने लगे तो यह नकली मावा है। इसके अलावा मावा को चखकर पहचान की जा सकती है, जिससे मुंह में चिपकने पर मावा नकली होगा।
रंगीन कचरी-पापड़ से रहे दूर, इनसे सेहत का खतरा
होली में गुझियों के साथ ही कचरी-पापड़ से भी लोगों का स्वागत किया जाता है, जिससे बाजार में तरह-तरह के रेडीमेड कचरी-पापड़ बिकने लगे हैं। चटख रंगीन कचरी-पापड़ में अखाद्य रंगों की मिलावट किए जाने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है, जिसके खाने से पेट संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। बाजार में इनकी डिमांड बढ़ने से मिलावटखोर फायदा उठाने के प्रयास में हैं।
कचरी की कीमत बाजार में 50 से 200 रुपये प्रति किलोग्राम तक है। चमकदार और रंगीन चिप्स, पापड़ की कीमत अधिक है, लेकिन लोगों को यह नहीं पता कि चमकदार दिखने वाली इन चीजों से नुकसान भी ज्यादा है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ऐसी रंगीन कचरी-पापड़ के खिलाफ अभियान चला रही हैं, लेकिन लोगों को भी जागरूक होना होगा। ऐसे रंगीन कचरी पापड़ खाने से दस्त, पेट में सक्रमण, त्वचा की एलर्जी और डायरिया की आशंका रहती है।
बाजार में मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। टीमें लगातार बाजार में घूमकर संदिग्ध वस्तुओं के नमूने भर रही हैं। रंगीन कचरी पापड़ मिलावटी हो सकते हैं। इसलिए लोग वस्तुओं की खरीदादारी में सावधानी बरतें।
- कौशलेंद्र शर्मा, अभिहित अधिकारी