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सावधान... साइबर स्टॉकिंग का शिकार बन रहीं बालिकाएं
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लखीमपुर खीरी। इंटरनेट के जरिए साइबर स्टॉकिंग (छेड़खानी) के बढ़ते मामलों ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है, वहीं डिजिटल प्लेटफार्म की चकाचौंध में बालिकाएं और युवतियां जाने-अनजाने साइबर स्टॉकिंग का शिकार बन जाती हैं। ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें पीड़ित बालिकाओं व युवतियों ने शिकायत दर्ज कराई हैं।
साइबर स्टॉकिंग से निपटने के लिए महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित वन स्टॉप सेंटर आगे आया है, जिनकी काउंसलर विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए बालिकाओं को जागरूक कर रही हैं।
कोरोना काल में स्कूल-कॉलेज बंद होने से ऑनलाइन पढ़ाई का दौर शुरू हुआ, जिसके साथ ही बालक-बालिकाएं भी इंटरनेट के जाल में उलझ चुके हैं। पढ़ाई के अलावा सोशल साइट्स और ऑनलाइन वीडियो गेम खेलना पसंदीदा शगल बन चुका है। ऐसे में इंटरनेट पर सक्रिय अपराधी विभिन्न चैट आदि माध्यमों से बालिकाओं को अपने चंगुल में फांसने की कोशिश करते हैं।
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इस दौरान किसी बालिका ने फोटो, सूचना साझा की या वीडियो चैट किया तो समझ लो फिर उसकी मुुश्किलें बढ़नी शुरू हो जाती है। अपराधी व्यक्ति चैट के माध्यम से बालिकाओं को डराने के साथ ही ब्लैकमेल करने की कोशिशें करता है।
काउंसलर विजेता गुप्ता ने बताया कि साइबर स्टॉकिंग के मामलों में सबसे ज्यादा करीब 75 प्रतिशत महिलाएं और बच्चे शिकार बन रहे हैं। ऑनलाइन वीडियो गेम, सोशल साइट्स जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप के माध्यम से होने वाली चैट के माध्यम से बालिकाओं को परेशान किया जाता है।
बालिकाओं के फोटो का दुरुपयोग सबसे ज्यादा किया जाता है, इसलिए बालिकाएं व युवतियां अपनी व्यक्तिगत सूचनाओं और फोटो को सोशल मीडिया पर कभी भी साझा न करें। फर्जी मेसेज के माध्यम से उपहार देने के नाम पर एक लिंक पर क्लिक करने के लिए कहा जाता है, जिससे भी लोगों को सावधान रहना चाहिए। महिला हेल्पलाइन नंबर 181 पर फोन करके शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
क्या है साइबर स्टॉकिंग
साइबर क्राइम का ही एक चेहरा है साइबर स्टॉकिंग, जिसमें कोई व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह किसी दूसरे व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह का इंटरनेट के जरिए पीछा करता है और उसे हर तरह से नुकसान पहुंचाने और प्रताड़ित करने की कोशिश करता है। इस तरह के अपराध में इंटरनेट के जरिए किसी की गतिविधियों पर नजर रखना, उस पर झूठे इल्जाम लगाना, उसे धमकी देना, उसकी पहचान चुरा लेना, उसके डेटा या उपकरण के साथ छेड़छाड़ करना और उन्हें नुकसान पहुंचाना, एब्यूजिंग, सेक्सुअल हरेसमेंट, एग्रेशन आदि शामिल हैं।
केस स्टडी-1
फेसबुक पर हुआ चैट, फिर आई बवाल की नौबत
बलरामपुर की लड़की की शिकायत पर खीरी के एक युवक की क्लास लगाई जा चुकी है। लड़की ने 181 नंबर पर शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद वन स्टॉप सेंटर ने आरोपी युवक के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। तो कहानी कुछ यूं सामने आई कि करीब दो माह पहले लड़की के पास युवक की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई, जिसके बाद मेसेंजर पर चैटिंग के अलावा वीडियो चैट होने लगी। इसके बाद आरोपी युवक ने लड़की के साथ वीडियो चैट के फोटो सोशल मीडिया पर शेयर कर दिए, जिसका लड़की ने विरोध किया और शिकायत दर्ज कराई। इस मामले में आरोपी युवक को माफी मांगने पर हिदायत देकर छोड़ा गया।
केस स्टडी-2
किशोरी को देने लगा शिकायत की धमकी
शहर के एक मोहल्ला निवासी कक्षा नौ की छात्रा भी मेसेंजर के माध्यम से साइबर स्टॉकिंग का शिकार बनी, जिसके फोटो हासिल करने के बाद आरोपी युवक इमोशनली ब्लैक मेल करने लगा। चैट और फोटो आदि को वायरल करने की धमकी देने के साथ आरोपी युवक छात्रा पर मिलने के लिए दबाव डालने लगा। आरोपी युवक ने छात्रा को डराने के लिए उसके पापा से शिकायत करने की धमकी दी, जिसके बाद छात्रा ने मामले की जानकारी अपने परिजन को दी। इसके बाद मामले की सुनवाई वन स्टॉप सेंटर पर हुई, जहां आरोपी युवक को डांट-फटकार लगाई गई।
साइबर स्टॉकिंग के माध्यम से बाल अपराध के मामले बढ़े हैं। वन स्टॉप सेंटर पर ऐसे मामलों में फ्री काउंसलिंग कराई जाती है। अब तक महिलाओं के 338 प्रकरणों का निस्तारण कराया जा चुका है। बालिकाओं और युवतियों को साइबर स्टॉकिंग के प्रति जागरूक करने के लिए मिशन शक्ति अभियान के माध्यम से कार्यक्रम कराए जा रहे हैं।
- विजेता गुप्ता, काउंसलर, वन स्टॉप सेंटर
साइबर स्टॉकिंग के मामलों में दंड का प्रावधान
लखीमपुर खीरी। साल 2013 के पूर्व आईपीसी में स्टॉकिंग पर कोई सीधे प्रावधान नहीं थे। 2013 में संशोधन अधिनियम द्वारा आईपीसी की धारा 354 डी को लाया गया। जस्टिस वर्मा कमेटी ने 2013 में 354 डी लाने का सुझाव दिया था। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में एक ‘बिल ऑफ़ राइट्स’ पेश करते हुए प्रत्येक महिला को ‘राइट टू सिक्योर स्पेस’ की बात कही और कहा कि प्रत्येक महिला को बिना किसी भय के पब्लिक स्पेस इस्तेमाल करने का अधिकार है। इसके अलावा इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी अधिनियम 2000 के तहत भी साइबर स्टॉकिंग के कुछ हिस्सों पर नियम मिलते जुलते हैं। इस अधिनियम में सीधे तौर पर कोई प्रावधान साइबर स्टॉकिंग की बात नहीं करता है, लेकिन साइबर स्टॉकिंग के कुछ हिस्सों को इस अधिनियम के तहत चार्ज किया जा सकता है। काउंसर विजेता गुप्ता ने बताया कि ज्यादातर मामलों में परिजन मुकदमा न लड़ने के चलते रिपोर्ट दर्ज नहीं कराते हैं। काउंसलिंग के जरिए ही केस सुलझाए जाते हैं। साइबर स्टॉकिंग के अब तक 100 से अधिक केस आ चुके हैं। संवाद
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साइबर स्टॉकिंग से निपटने के लिए महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित वन स्टॉप सेंटर आगे आया है, जिनकी काउंसलर विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए बालिकाओं को जागरूक कर रही हैं।
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कोरोना काल में स्कूल-कॉलेज बंद होने से ऑनलाइन पढ़ाई का दौर शुरू हुआ, जिसके साथ ही बालक-बालिकाएं भी इंटरनेट के जाल में उलझ चुके हैं। पढ़ाई के अलावा सोशल साइट्स और ऑनलाइन वीडियो गेम खेलना पसंदीदा शगल बन चुका है। ऐसे में इंटरनेट पर सक्रिय अपराधी विभिन्न चैट आदि माध्यमों से बालिकाओं को अपने चंगुल में फांसने की कोशिश करते हैं।
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इस दौरान किसी बालिका ने फोटो, सूचना साझा की या वीडियो चैट किया तो समझ लो फिर उसकी मुुश्किलें बढ़नी शुरू हो जाती है। अपराधी व्यक्ति चैट के माध्यम से बालिकाओं को डराने के साथ ही ब्लैकमेल करने की कोशिशें करता है।
काउंसलर विजेता गुप्ता ने बताया कि साइबर स्टॉकिंग के मामलों में सबसे ज्यादा करीब 75 प्रतिशत महिलाएं और बच्चे शिकार बन रहे हैं। ऑनलाइन वीडियो गेम, सोशल साइट्स जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप के माध्यम से होने वाली चैट के माध्यम से बालिकाओं को परेशान किया जाता है।
बालिकाओं के फोटो का दुरुपयोग सबसे ज्यादा किया जाता है, इसलिए बालिकाएं व युवतियां अपनी व्यक्तिगत सूचनाओं और फोटो को सोशल मीडिया पर कभी भी साझा न करें। फर्जी मेसेज के माध्यम से उपहार देने के नाम पर एक लिंक पर क्लिक करने के लिए कहा जाता है, जिससे भी लोगों को सावधान रहना चाहिए। महिला हेल्पलाइन नंबर 181 पर फोन करके शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
क्या है साइबर स्टॉकिंग
साइबर क्राइम का ही एक चेहरा है साइबर स्टॉकिंग, जिसमें कोई व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह किसी दूसरे व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह का इंटरनेट के जरिए पीछा करता है और उसे हर तरह से नुकसान पहुंचाने और प्रताड़ित करने की कोशिश करता है। इस तरह के अपराध में इंटरनेट के जरिए किसी की गतिविधियों पर नजर रखना, उस पर झूठे इल्जाम लगाना, उसे धमकी देना, उसकी पहचान चुरा लेना, उसके डेटा या उपकरण के साथ छेड़छाड़ करना और उन्हें नुकसान पहुंचाना, एब्यूजिंग, सेक्सुअल हरेसमेंट, एग्रेशन आदि शामिल हैं।
केस स्टडी-1
फेसबुक पर हुआ चैट, फिर आई बवाल की नौबत
बलरामपुर की लड़की की शिकायत पर खीरी के एक युवक की क्लास लगाई जा चुकी है। लड़की ने 181 नंबर पर शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद वन स्टॉप सेंटर ने आरोपी युवक के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। तो कहानी कुछ यूं सामने आई कि करीब दो माह पहले लड़की के पास युवक की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई, जिसके बाद मेसेंजर पर चैटिंग के अलावा वीडियो चैट होने लगी। इसके बाद आरोपी युवक ने लड़की के साथ वीडियो चैट के फोटो सोशल मीडिया पर शेयर कर दिए, जिसका लड़की ने विरोध किया और शिकायत दर्ज कराई। इस मामले में आरोपी युवक को माफी मांगने पर हिदायत देकर छोड़ा गया।
केस स्टडी-2
किशोरी को देने लगा शिकायत की धमकी
शहर के एक मोहल्ला निवासी कक्षा नौ की छात्रा भी मेसेंजर के माध्यम से साइबर स्टॉकिंग का शिकार बनी, जिसके फोटो हासिल करने के बाद आरोपी युवक इमोशनली ब्लैक मेल करने लगा। चैट और फोटो आदि को वायरल करने की धमकी देने के साथ आरोपी युवक छात्रा पर मिलने के लिए दबाव डालने लगा। आरोपी युवक ने छात्रा को डराने के लिए उसके पापा से शिकायत करने की धमकी दी, जिसके बाद छात्रा ने मामले की जानकारी अपने परिजन को दी। इसके बाद मामले की सुनवाई वन स्टॉप सेंटर पर हुई, जहां आरोपी युवक को डांट-फटकार लगाई गई।
साइबर स्टॉकिंग के माध्यम से बाल अपराध के मामले बढ़े हैं। वन स्टॉप सेंटर पर ऐसे मामलों में फ्री काउंसलिंग कराई जाती है। अब तक महिलाओं के 338 प्रकरणों का निस्तारण कराया जा चुका है। बालिकाओं और युवतियों को साइबर स्टॉकिंग के प्रति जागरूक करने के लिए मिशन शक्ति अभियान के माध्यम से कार्यक्रम कराए जा रहे हैं।
- विजेता गुप्ता, काउंसलर, वन स्टॉप सेंटर
साइबर स्टॉकिंग के मामलों में दंड का प्रावधान
लखीमपुर खीरी। साल 2013 के पूर्व आईपीसी में स्टॉकिंग पर कोई सीधे प्रावधान नहीं थे। 2013 में संशोधन अधिनियम द्वारा आईपीसी की धारा 354 डी को लाया गया। जस्टिस वर्मा कमेटी ने 2013 में 354 डी लाने का सुझाव दिया था। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में एक ‘बिल ऑफ़ राइट्स’ पेश करते हुए प्रत्येक महिला को ‘राइट टू सिक्योर स्पेस’ की बात कही और कहा कि प्रत्येक महिला को बिना किसी भय के पब्लिक स्पेस इस्तेमाल करने का अधिकार है। इसके अलावा इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी अधिनियम 2000 के तहत भी साइबर स्टॉकिंग के कुछ हिस्सों पर नियम मिलते जुलते हैं। इस अधिनियम में सीधे तौर पर कोई प्रावधान साइबर स्टॉकिंग की बात नहीं करता है, लेकिन साइबर स्टॉकिंग के कुछ हिस्सों को इस अधिनियम के तहत चार्ज किया जा सकता है। काउंसर विजेता गुप्ता ने बताया कि ज्यादातर मामलों में परिजन मुकदमा न लड़ने के चलते रिपोर्ट दर्ज नहीं कराते हैं। काउंसलिंग के जरिए ही केस सुलझाए जाते हैं। साइबर स्टॉकिंग के अब तक 100 से अधिक केस आ चुके हैं। संवाद