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खीरी-मैलानी के बीच नहीं हो रहा ब्राडगेज का काम
लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 16 Jan 2015 06:48 PM IST
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ऐशबाग से मैलानी और पीलीभीत तक छोटी लाइन के अमान परिवर्तन का काम लगभग ठप पड़ गया है। प्रारंभिक कार्यों को लेकर कोई तेजी नहीं दिखाई जा रही है। ऐशबाग-मैलानी के बीच पांच स्टेशनों के लिए भवन तैयार कर लिए गए हैं लेकिन ट्रैक पर मिट्टी पटाई आदि कार्य अभी भी नहीं शुरू किए गए हैं।
बता दें कि वर्ष 2012 में ऐशबाग से लेकर पीलीभीत तक छोटी लाइन के अमान परिवर्तन को स्वीकृति मिली थी। इसके लिए रेलवे ने करीब सात सौ करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया था। तत्कालीन रेल राज्यमंत्री अधीर रंजन चौधरी ने लखीमपुर आकर अमान परिवर्तन का शिलान्यास किया। इसके कुछ महीने बाद ही रेलवे की कार्यदाई संस्था कालिंदी कपूर रेल कोन ज्वाइंट बेंचर ने लखीमपुर स्टेशन के मालगोदाम पर अपना अस्थाई दफ्तर बनाकर कार्य भी शुरू कर दिया। बीते ढाई वर्षों में बांकेगंज, गोला, फरधान और लखीमपुर में स्टेशन के लिए भवन तैयार हो पाया है। हरगांव में अभी भवन निर्माण और फ्लाईओवर बनाने का काम चल रहा है। कार्यदाई संस्था रेडीमेड पुल-पुलिया बनवा रही है लेकिन अन्य सभी कार्य ठप पड़े हैं। इधर, रेलपथ इंजीनियर सुरेंद्र प्रताप का कहना है कि ब्राडगेज का काम अभी धीमा है। इस बाबत पूछने पर भी कार्यदाई संस्था के अधिकारी कुछ साफ नहीं बता पाए। जिसकी जानकारी रेलपथ के उच्चाधिकारियों को दी गई है।
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बता दें कि वर्ष 2012 में ऐशबाग से लेकर पीलीभीत तक छोटी लाइन के अमान परिवर्तन को स्वीकृति मिली थी। इसके लिए रेलवे ने करीब सात सौ करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया था। तत्कालीन रेल राज्यमंत्री अधीर रंजन चौधरी ने लखीमपुर आकर अमान परिवर्तन का शिलान्यास किया। इसके कुछ महीने बाद ही रेलवे की कार्यदाई संस्था कालिंदी कपूर रेल कोन ज्वाइंट बेंचर ने लखीमपुर स्टेशन के मालगोदाम पर अपना अस्थाई दफ्तर बनाकर कार्य भी शुरू कर दिया। बीते ढाई वर्षों में बांकेगंज, गोला, फरधान और लखीमपुर में स्टेशन के लिए भवन तैयार हो पाया है। हरगांव में अभी भवन निर्माण और फ्लाईओवर बनाने का काम चल रहा है। कार्यदाई संस्था रेडीमेड पुल-पुलिया बनवा रही है लेकिन अन्य सभी कार्य ठप पड़े हैं। इधर, रेलपथ इंजीनियर सुरेंद्र प्रताप का कहना है कि ब्राडगेज का काम अभी धीमा है। इस बाबत पूछने पर भी कार्यदाई संस्था के अधिकारी कुछ साफ नहीं बता पाए। जिसकी जानकारी रेलपथ के उच्चाधिकारियों को दी गई है।
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