फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   Behind the visit of the Sangh chief is an attempt to unite the castes

Lakhimpur Kheri News: संघ प्रमुख के दौरे के पीछे जातियों की एकजुटता की कोशिश

Wed, 09 Apr 2025 11:17 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 09 Apr 2025 11:17 PM IST
विज्ञापन
Behind the visit of the Sangh chief is an attempt to unite the castes
लखीमपुर खीरी। लोकसभा चुनाव में जिले की दोनों सीट गंवाने के बाद भाजपा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जरिये अपनी खोई हुई जमीन तलाश रही है। मंगलवार को मुस्तफाबाद के कबीरधाम में संघ प्रमुख मोहन भागवत के जाति-धर्म से ऊपर उठकर भारतीयता अपनाने के उद्बोधन के बाद कयास लगाया जा रहा है कि भाजपा जातियों के बिखराव रोकने की जुगत और सपा की पीडीए पंचायतों की काट ढूंढ रही है।
विज्ञापन

पहले काशी व मिर्जापुर और अब लखीमपुर खीरी... संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत पिछले कुछ समय से अलग-अलग जगहों पर दौरा कर संतों से मिल रहे हैं। यहां लखीमपुर खीरी के कबीरधाम में संघ प्रमुख के आगमन और उनके दिए गए वक्तव्य में एकता में ही भारतीयता का जो प्रमुख संदेश रहा, उसके अपने निहितार्थ तलाशे जा रहे हैं। भले ही संघ प्रमुख का कबीरधाम दौरा विशुद्ध रूप से व्यक्तिगत बताया जा रहा है, पर उनके संदेश में पंथ, संप्रदाय से ऊपर उठकर भारतीयता को प्राथमिकता देने की जो बात प्रमुखता से रही। उसे कहीं न कहीं लोगों को खासकर पिछड़ों और दलितों को जोड़ने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
विज्ञापन


दरअसल पिछले वर्ष 20224 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को खीरी और धौरहरा सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ा था। चुनाव परिणाम आने के बाद की समीक्षा में यह निकल कर आया था कि पिछड़ा और दलित वर्ग का वोट, जो वर्ष 2014 और 2019 में भाजपा के पाले में था, उसने 2024 में साथ छोड़ दिया। इधर, लोकसभा चुनावों के बाद सपा प्रत्येक जिले में बड़े स्तर पर पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) पंचायत कर रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

भाजपा भी सपा के इस अभियान की अलग-अलग स्थानीय स्तर पर काट ढूंढ रही है। राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा भी है कि सपा के पीडीए फार्मूले पर जोर देने के कारण कई जिलों में भाजपा अध्यक्ष के नाम पर भी पेच फंसा है। इसमें खीरी भी है। माना जा रहा कि 2014 के बाद यूपी में हिंदुओं में हुए इस बड़े बिखराव को रोकने के लिए संघ ने सामाजिक समरसता के अपने अभियान को तेज किया है।
इसी कड़ी में संघ प्रमुख ने पिछले दिनों अपने काशी प्रवास में कहा था कि भारतीयों का रहन-सहन, पूजा पद्धति अलग हो सकती है, लेकिन संस्कृति एक है। कबीरधाम में भी उन्होंने सामाजिक समरसता का संदेश यह कहकर दिया कि चाहे हमारी भाषा व क्षेत्र अलग हों, हम विभिन्न धर्मों को मानने वाले हों, पर हम सबकी एक ही भारत माता है।

चूंकि कबीरपंथ को मानने वाले अधिसंख्य लोग पिछड़े वर्ग से आते हें, इस कारण संघ प्रमुख का यहां का दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है। हालांकि संघ से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि यह संघ प्रमुख का व्यक्तिगत कार्यक्रम था। वह संत असंग देव के बुलावे पर आए थे। एक अन्य पदाधिकारी ने बताया कि संघ का सामाजिक समरसता का अभियान तो वर्षों से सनातन संस्कृति को मजबूत करने के लिए चल रहा है। इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed