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Lakhimpur Kheri News: जहरीले सांप हों या खूंखार मगरमच्छ... नजरून के लिए सब अपने
Sun, 14 Dec 2025 11:16 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 14 Dec 2025 11:16 PM IST
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टीम के साथ गांव से मगरमच्छ पकड़कर वाहन में रखती नजरून। स्रोत: स्वयं
लखीमपुर खीरी। जिले में कहीं भी सांप, अजगर या मगरमच्छ दिखाई देता है तो सबसे पहली फोन कॉल नजरून निशा के पास पहुंचती है। गांवों में घुस आए मगरमच्छों को वह सुरक्षित पकड़कर ग्रामीणों की मदद से नदी में छोड़ती हैं। वे अब तक 100 से ज्यादा सांप और 10 मगरमच्छ का रेस्क्यू कर चुकी हैं।
22 वर्षीय नजरून निशा दुधवा फाउंडेशन की सबसे निडर रेस्क्यू गर्ल के रूप में जानी जाती हैं। पलिया क्षेत्र में लोग उन्हें जंगल क्वीन कहने लगे हैं। वर्ष 2022 में दुधवा नेशनल पार्क में अभिप्रेरक के पद पर उन्होंने नौकरी शुरू की थी। उनका काम वन्यजीवों से गांव के लोगों को बचाव के लिए जागरूक करना है, लेकिन जानवरों से विशेष लगाव होने की वजह से उन्हें विभाग की तरफ से विभिन्न विशेषज्ञों से वन्यजीवों को पकड़ने का प्रशिक्षण दिलवाया गया। निपुणता के बाद वह यह काम आसानी से करने लगीं। नजरून की मौजूदगी से दुधवा के आसपास के 50 गांव के लोगों को ऐसे वन्यजीवों के पकड़वाने की चिंता नहीं रहती। नजरून पलिया की रहने वाली हैं। उनके पिता मैकेनिक हैं। वह स्नातक की पढ़ाई कर चुकी हैं। अभी एमएसडब्ल्यू कर रही हैं। नजरून ने सिर्फ सांप या अजगर ही नहीं, बल्कि फिशिंग कैट, जंगली कैट, मॉनिटर लिजर्ड का भी सफल रेस्क्यू किया है। वह अब तक पांच टाइगर रेस्क्यू अभियानों में सहायक कर्मचारी के रूप में शामिल रह चुकी हैं। संवाद
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22 वर्षीय नजरून निशा दुधवा फाउंडेशन की सबसे निडर रेस्क्यू गर्ल के रूप में जानी जाती हैं। पलिया क्षेत्र में लोग उन्हें जंगल क्वीन कहने लगे हैं। वर्ष 2022 में दुधवा नेशनल पार्क में अभिप्रेरक के पद पर उन्होंने नौकरी शुरू की थी। उनका काम वन्यजीवों से गांव के लोगों को बचाव के लिए जागरूक करना है, लेकिन जानवरों से विशेष लगाव होने की वजह से उन्हें विभाग की तरफ से विभिन्न विशेषज्ञों से वन्यजीवों को पकड़ने का प्रशिक्षण दिलवाया गया। निपुणता के बाद वह यह काम आसानी से करने लगीं। नजरून की मौजूदगी से दुधवा के आसपास के 50 गांव के लोगों को ऐसे वन्यजीवों के पकड़वाने की चिंता नहीं रहती। नजरून पलिया की रहने वाली हैं। उनके पिता मैकेनिक हैं। वह स्नातक की पढ़ाई कर चुकी हैं। अभी एमएसडब्ल्यू कर रही हैं। नजरून ने सिर्फ सांप या अजगर ही नहीं, बल्कि फिशिंग कैट, जंगली कैट, मॉनिटर लिजर्ड का भी सफल रेस्क्यू किया है। वह अब तक पांच टाइगर रेस्क्यू अभियानों में सहायक कर्मचारी के रूप में शामिल रह चुकी हैं। संवाद

टीम के साथ गांव से मगरमच्छ पकड़कर वाहन में रखती नजरून। स्रोत: स्वयं
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