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परिषदीय स्कूलों के जर्जर भवनों की नीलामी 30 सितंबर तक कराएं

Sun, 29 Aug 2021 11:29 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 29 Aug 2021 11:29 PM IST
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Auction the dilapidated buildings of council schools by 30 September
लखीमपुर खीरी। परिषदीय स्कूलों के जर्जर भवनों का ध्वस्तीकरण किया जाना है, लेकिन पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा मूल्यांकन लागत अधिक निर्धारित किए जाने से एक भी जर्जर भवन का ध्वस्त नहीं कराया जा सका है। कई बार विज्ञप्ति प्रकाशित हो चुकी है, लेकिन कोई ठेकेदार बोली लगाने को तैयार नहीं है। लिहाजा महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने जर्जर भवनों को ध्वस्त कराने के लिए डीएम को पत्र लिखा है, जिसमें दोबारा मूल्यांकन कराकर लागत कम कराते हुए सभी जर्जर भवनों को 30 सितंबर 2021 तक नीलामी प्रक्रिया पूर्ण कराने के निर्देश दिए हैं।
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जनपद में कुल 709 परिषदीय स्कूलों के पुराने भवन दशकों पहले जर्जर और निष्प्रयोज्य घोषित किए जा चुके हैं, जिन्हें अब तक ध्वस्त नहीं किया जा सका है। इससे विद्यालयों में जर्जर भवन के गिरने की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं, जिसमें कई बार बच्चों की जान जोखिम में पड़ चुकी है। इसके बावजूद जर्जर/गिरताऊ हाल भवनों को ध्वस्त करने की कार्रवाई सिर्फ फाइलों में उलझकर रह गई हैै। पिछले वर्ष 2020 में पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा जर्जर भवनों का मूल्यांकन कराने के बाद ध्वस्तीकरण की उम्मीद बढ़ी थी, जिसमें नौ ब्लॉकों पसगवां, मितौली, मोहम्मदी, कुंभी, फूलबेहड़, नकहा, ईसानगर, धौरहरा और पलिया के 304 जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण की अनुमति दी गई थी। इन ब्लॉकों में जर्जर भवनों की नीलामी प्रक्रिया कराने के लिए कहीं दो बार तो कहीं तीन बार विज्ञप्ति प्रकाशित कराई जा चुकी है, लेकिन फूलबेहड़ को छोड़कर अन्य आठ ब्लॉकों में नीलामी में शामिल होने के लिए एक भी आवेदन नहीं आया है। सिर्फ फूलबेहड़ में तीन आवेदन प्राप्त हुए हैं। नीलामी में लोगों के शामिल न होने के कारणों में मूल्यांकन लागत अधिक होना बताया जा रहा है।
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जैसे मोहम्मदी के प्राथमिक विद्यालय राजापुर बेनी के जर्जर भवन की मूल्यांकन लागत 3.73 लाख रुपये निर्धारित की गई है, जबकि मलबे की लागत करीब 73 हजार रुपये आंकी गई है। इसी तरह प्राथमिक विद्यालय बौधी खुर्द के जर्जर भवन की लागत 4.98 लाख निर्धारित की गई है, जबकि मलबे की लागत करीब 1.50 लाख रुपये आंकी गई है।
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पीडब्ल्यूडी ने नए भवन के बराबर जर्जर भवनों का लागत मूल्य निर्धारित कर देने से एक भी जर्जर भवन की नीलामी नहीं हो पाई है। इससे बेसिक शिक्षा विभाग के सामने असहज स्थिति उत्पन्न हो गई है।

भूमि की वर्तमान लागत जोड़ने से बढ़ी मूल्यांकन राशि
लोक निर्माण विभाग के बिल्डिंग मैनुअल चैप्टर 9 में भवनों के मूल्यांकन के प्रस्तर 9.02 में स्थायी भवनों के मूल्यांकन एवं मूल्यांकन हृास के आगणन के आधार पर किया जाना है। ध्वस्तीकरण योग्य भवनों के अनुरक्षण पर कोई धनराशि व्यय नहीं की जा रही है। इसलिए मूल्यांकित धनराशि मेें से समुचित कटौती की जानी चाहिए। मूल्यांकन में भूमि की वर्तमान लागत आदि जोड़ने का प्रावधान है, जिससे पीडब्ल्यूडी ने भूमि की लागत की गणना की गई है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा अनामिका सिंह ने डीएम को लिखे पत्र में कहा है कि मूल्यांकन की धनराशि में भूमि की लागत की गणना किया जाना औचित्यपूर्ण नहीं है। इसलिए जर्जर भवनों का मूल्यांकन न्यूनतम बोली का निर्धारण करने के निर्देश दिए हैं।


मूल्यांकन लागत अधिक होने का कारण नीलामी प्रक्रिया में लोग शामिल नहीं हो रहे हैं, जिससे अभी तक एक भी जर्जर भवन का ध्वस्तीकरण नहीं कराया जा सका है। महानिदेशक ने तकनीकी समिति द्वारा जर्जर भवनों का पुर्नमूल्यांकन कराकर 30 सितंबर 2021 तक नीलामी प्रक्रिया पूर्ण कराने के निर्देश प्राप्त हुए हैं।
-डॉ लक्ष्मीकांत पांडेय, बीएसए
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