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क्षमता का मूल्यांकन कर सफलता की ओर प्रेरित करती है परीक्षा

Sun, 09 Feb 2020 02:10 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 09 Feb 2020 02:10 AM IST
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aprajita in khiri
अमीरनगर (लखीमपुर खीरी)। अमर उजाला के अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स के तहत शनिवार को जहीर हसन अल्पसंख्यक इंटर कॉलेज में बोर्ड परीक्षार्थियों के लिए जागरूकता कार्यशाला हुई, जिसमें छात्राओं को परीक्षा का तनाव, डर छोड़कर समय प्रबंधन, पाठ्यक्रम निर्धारण के साथ तैयारी करने पर जोर दिया गया। तहसीलदार विपिन कुमार द्विवेदी ने कहा कि परीक्षा क्षमता का मूल्यांकन करती है और सफलता की ओर प्रेरित करती है। बेटियों को आत्मरक्षा के गुर सिखाने के बाद अतिथियों ने नारी गरिमा का साझा संकल्प दिलाया।
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कार्यशाला का शुभारंभ स्वागत गीत से हुआ। तहसीलदार विपिन कुमार द्विवेदी ने कहा कि परीक्षा के लिए खुद को तैयार करें, क्योंकि जीवन में प्रत्येक मोड़ पर एक परीक्षा से गुजरना पड़ता है। सफलता, असफलता हमारी मेहनत पर निर्भर करती है, ऐसे में हताश, परेशान, तनाव, डर की बजाय आत्मविश्वास के साथ तैयारी करें और परीक्षा दें।
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प्रभारी निरीक्षक संजय त्यागी ने महिला सुरक्षा के विषय में शासन, प्रशासन की योजनाओं के बारे में बताया, वहीं उनके निर्देशन में आरक्षी निधि और नेहा यादव ने बेटियों को आत्म सुरक्षा के गुर सिखाए। सीजीएनपीजी कॉलेज के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ पियूष शुक्ल ने छात्राओं से सीधा संवाद कर परीक्षा को लेकर उनकी शंकाओं एवं जिज्ञासाओं को शांत किया। अध्यक्षता प्रबंधक यूनुस खां और संचालन प्रधानाचार्य वीरेश कुमार गुप्ता ने किया। प्रबंध समिति के कोषाध्यक्ष सादाब खां ने अतिथियों का आभार और अमर उजाला की अपराजिता मुहिम की सराहना की।
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संतुलित आहार, व्यायाम, नींद जरूरी
डॉ पियूष शुक्ल ने विद्यार्थियों को बताया कि तनाव लेकर भूख, प्यास, नींद तजकर परीक्षा में अच्छी सफलता प्राप्त नहीं की जा सकती। इसके लिए लक्ष्य केंद्रित कर लगन से पढ़ाई करने के साथ संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद जरूरी है जिससे एकाग्रता बढ़ती है। परीक्षा में प्रश्नपत्र हल करने से पहले उसे पढ़ना और अपनी तैयारी के अनुसार प्रश्नों का उत्तर देना चाहिए।
छात्रा इकरा नाज का कहना है कि लड़कियों के प्रति समाज की सोच बदलने की जरूरत है। आज ऐसा कुछ नहीं है जो लड़कियां नहीं कर सकतीं।
छात्रा मुब्बसिरा का कहना है कि बदलते दौर में अब भी ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों की शिक्षा पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता जबकि लड़कियां अलग अलग क्षेत्रों में पुरुषों से बेहतर काम कर रहीं हैं।
छात्रा प्रियंका राठौर का कहना है कि बेटियों को बेटों के समान ही शिक्षा के क्षेत्र में समान मौके दिए जाने की जरूरत है। आज बेटियां विभिन्न क्षेत्रों में खुद को साबित कर रहीं हैं।
अनम का कहना है कि पढ़ाई हो या कोई अन्य कार्य लड़कियों में आत्मविश्वास होना जरूरी है। प्रतिवर्ष बोर्ड परीक्षाओं में लड़कियां, लड़कों से बेहतर प्रदर्शन कर रहीं हैं।

छात्रा रजनी का कहना है कि पढ़ाई के साथ साथ कॉलेजों में समय समय पर मोटिवेशन वर्कशाप होने चाहिए। जिससे विद्यार्थी अपनी शंकाओं, जिज्ञासाओं को शांत कर लक्ष्य के प्रति प्रेरित हो सकें।
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