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दस महीने बाद खुली हवा में सांस लेगा अंकित दास

Sat, 03 Sep 2022 12:27 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 03 Sep 2022 12:27 AM IST
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Ankit Das will breathe in the open air after ten months
प्रतीकात्मक । - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, लखीमपुर खीरी
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  • हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 15 दिन की मेडिकल परोल मंजूर की
  • तिकुनिया हिंसा मामले में मुख्य आरोपी मंत्री पुत्र के बाद है सह अभियुक्त
लखीमपुर खीरी। तिकुनिया हिंसा मामले में मुख्य आरोपी मंत्री पुत्र आशीष मिश्र के बाद सह अभियुक्त अंकित दास को हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 15 दिन के लिए मेडिकल परोल दी है। इस हत्याकांड में जेल की फौलादी सलाखों से बाहर खुली हवा में सांस लेने वाला वह दूसरा आरोपी है, इससे पहले इस मामले में आशीष मिश्र मोनू को भी जमानत मिली थी, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से वापस जेल भेज दिया गया था।
तीन अक्तूबर 2021 को हुए तिकुनिया हत्याकांड के बाद चौथे आरोपी के रूप में अंकित दास और उसके ड्राइवर लतीफ उर्फ काले की गिरफ्तारी हुई थी। हत्याकांड में आशीष मिश्र मोनू के तीसरे आरोपी के रूप में गिरफ्तारी के बाद 12 अक्टूबर को एसआईटी की ओर से अंकित दास को नोटिस जारी किया था, जिस पर वह 13 अक्तूबर को अपने ड्राइवर लतीफ उर्फ काले के साथ क्राइम ब्रांच में अपनी सफाई के लिए हाजिर हुआ था, लेकिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार करते हुए जेल भेज दिया था।
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जेल जाने के बाद 16 अक्तूबर को पहली बार सीजेएम चिंताराम ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। जिला जज की अदालत में जमानत खारिज होने के बाद अंकित दास ने हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में जमानत अर्जी दाखिल की थी। 9 मई को सुनवाई के बाद जस्टिस दिनेश कुमार सिंह ने भी अंकित दास की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। तमाम उतार-चढ़ाव के बीच अंकित दास की ओर से चिकित्सीय आधार पर अल्पकालिक जमानत परोल के लिए 8 अगस्त को दूसरी अर्जी दाखिल की गई थी, जिसमें दो बार सुनवाई आगे बढ़ने के बाद दो सितंबर को जस्टिस दिनेश कुमार सिंह ने 15 दिनों के लिए मेडिकल परोल मंजूर कर ली है।
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इससे पहले भी चिकित्सीय आधार पर अंकित दास ने विभिन्न अदालतों में गुहार लगाई थी। 13 अक्तूबर को गिरफ्तारी के बाद जब उसे अदालत में पेश किया गया तो उसके अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह गौड़ की ओर से न्यूरो सर्जन से संबंधित दिक्कतों का हवाला देते हुए डॉ रवि देव के यहां इलाज चलने से संबंधित चिकित्सीय पत्र पेश किए गए थे, जिसकी सुनवाई कर अदालत ने उसे 15 दिन के लिए जेल से बाहर इलाज के लिए अनुमति दी है।
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