Lakhimpur: सर्किल रेट में वृद्धि से नाराज वकीलों ने नहीं होने दी रजिस्ट्री, 3 अगस्त तक कार्य बहिष्कार की घोषणा
एसोसिएशन ने तीन अगस्त 2022 तक कार्य बहिष्कार करने की घोषणा की है, जिसके बाद अनिश्चितकालीन बहिष्कार करने की बात कही है।
विस्तार
जिला प्रशासन द्वारा जमीनों के नए सर्किल रेट एक अगस्त 2022 से लागू कर दिए गए हैं। सर्किल रेट में 20 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि से नाराज लखीमपुर तहसील बार एसोसिएशन के आह्वान पर वकीलों ने सोमवार को भी हड़ताल जारी रखी। लगातार तीसरे दिन भी रजिस्ट्री कार्य बाधित रहा। सब रजिस्ट्रार दफ्तर के गेट को घेरकर बैठे वकीलों व दस्तावेज लेखकों ने किसी को रजिस्ट्री कार्य के लिए अंदर घुसने नहीं दिया।
एसोसिएशन ने तीन अगस्त 2022 तक कार्य बहिष्कार करने की घोषणा की है, जिसके बाद अनिश्चितकालीन बहिष्कार करने की बात कही है। बताते चलें कि लखीमपुर तहसील बार एसोसिएशन ने नवीन प्रस्तावित मूल्यांकन सूची के विरुद्ध 21 बिंदुओं का आपत्ति पत्र उपनिबंधक स्टांप के माध्यम से डीएम को दिया था। अध्यक्ष उत्तम कुमार वर्मा ने बताया कि सामान्य राजस्व गांव में सड़क किनारे निवर्तमान दर 34 लाख रुपये, आबादी में 32 लाख रुपये व 21 लाख रुपये सामान्य के स्थान पर क्रमश: 40 लाख रुपये सड़क, 38 लाख रुपये आबादी व 25 लाख रुपये सामान्य दरों में वृद्धि की गई है, जो अत्यधिक है। इसे पूर्व की भांति रखने की मांग है।
नगरीय व अर्धनगरीय के राजस्व ग्रामों की आवासीय दर छह मीटर तक चौड़े रास्ते की निवर्तमान दर से अत्यधिक बढ़ाई गई है, जिसे पूर्ववत रखने की मांग है। नौ मीटर या इससे अधिक चौड़े रास्ते की दरों में अत्यधिक वृद्घि की गई है। वकीलों का आरोप यह भी है कि सामान्य निर्देश के क्रमांक 13क में रकबा 0.100 हेक्टेअर के स्थान पर रकबा 0.150 हेक्टेअर किया गया है, जो गलत है। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्र के विकासशील गांव व सामान्य निर्देश के क्रमांक 13ख गांव में भी मानक 0.150 हेक्टेअर किया गया है, जिसे सूची से हटाकर पूर्व की भांति रखने की मांग की गई है।
वकीलों का आरोप यह भी है कि व्यावसायिक गतिविधियों में 30 प्रतिशत वृद्घि के स्थान पर 50 प्रतिशत की वृद्घि की गई है। इसमें पूर्व की भांति 30 प्रतिशत वृद्घि करने की मांग की है। प्रांतीय सड़क पर स्थित भूमि का मूल्यांकन 40 प्रतिशत वृद्घि के स्थान पर 70 प्रतिशत वृद्घि की गई है, जिसे 40 प्रतिशत तक रखने की मांग है। नगरीय व अर्धनगरीय गांवों जैसे नौरंगाबाद, उदयपुर महेवा, छाउछ, मीरपुर, भंसड़िया, पहाड़ापुर, राजापुर, सलेमपुर, रामापुर, लखीमपुर देहात की कृषि भूमि की दरों में अत्यधिक वृद्घि किए जाने का आरोप है, जिसे कम करने की मांग की है।
महामंत्री विकेश कुमार तिवारी ने बताया कि अत्यधिक वृद्घि होने से दस्तावेज के पंजीकरण पर पक्षकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसलिए जब तक मूल्यांकन सूची में संशोधन नहीं होता, तब तक कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। धरने में दयाशंकर वर्मा, मनोज मिश्रा, रामनरेश चौधरी, दिनेश वर्मा आदि वकील व दस्तावेज लेखक शामिल रहे।
तहसील बार एसोसिएशन की आपत्तियों का निस्तारण कराने के लिए पदाधिकारियों को बुलाया गया था, लेकिन वह लोग वार्ता के लिए उपस्थित नहीं हुए। आपत्तियों का निस्तारण कराने के बाद नए सर्किल रेट लागू कर दिए गए हैं। बाढ़ प्रभावित गांवों में मूल्य वृद्घि वापस ली गई है। - संजय कुमार सिंह, एडीएम (वित्त एवं राजस्व)
सर्किल रेट की वृद्धि को लेकर वकीलों और दस्तावेज नवीसों ने किया प्रदर्शन
निघासन। सोमवार को तहसील अधिवक्ता संघ सभागार में वकील व बैनामा लेखक ने संयुक्त बैठक कर मूल्यांकन सूची में अप्रत्याशित वृद्धि के विरोध में नारेबाजी कर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम राजेश कुमार को और एडीएम को संबोधित ज्ञापन उपनिबंधक रश्मि प्रभा को सौंपा। साथ ही तीन दिन तक दस्तावेज लेखन का काम बंद कर दिया है।
वकीलों ने अपने ज्ञापन में यह भी कहा कि आपत्ति व सुझाव देने के बाद भी उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया। पूरा क्षेत्र बाढ़ प्रभावित होने के कारण अस्सी फीसदी फसल का नुकसान हो जाता है। विकासशील ग्रामों में अधिकतम क्षेत्रफल 0.100 हेक्टेअर से कम होने पर काफी असुविधा होती है, जिसे कम करते हुए 0.050 हेक्टेअर तक निर्धारित किया जाए। इस दौरान अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र रुहेला, मंत्री राकेश वैश्य, चंद्र प्रकाश, राजू गिरि, दिनेश गुप्ता, आत्म कुमार, बीपी श्रीवास्तव, एसके पांडे मौजूद रहे।