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Lakhimpur Kheri News: जंगली जल भैंसों के पुनर्वासन की संभावनाएं तलाशने इसी माह आएगी विशेषज्ञ टीम
Sun, 05 Apr 2026 12:15 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 05 Apr 2026 12:15 AM IST
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जंगली जल भैंस। स्रोत : सोशल मीडिया
लखीमपुर खीरी/बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व में जंगली जल भैंसों के पुनर्वासन की संभावनाओं पर काम तेज हो गया है। इसके तहत इसी माह के मध्य में भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) की विशेषज्ञ टीम दुधवा पहुंचेगी।
तराई के जंगलों में कभी गैंडों की तरह जंगली जल भैंसों का भी बसेरा हुआ करता था। यह कब और कैसे लुप्त हुए, इसकी पड़ताल की जा रही है। शोध में यह भी सामने आया है कि गैंडों और जंगली जल भैंसों का प्राकृतवास समान है। इसी आधार पर दुधवा में गैंडा पुनर्वासन की तर्ज पर जल भैंसों को बसाने की योजना पर काम हो रहा है।
भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बिवास पांडव और डॉ. सम्राट मंडल अप्रैल के मध्य तक दुधवा पहुंचकर जल भैंसों के लिए जल स्रोत, भोजन, सुरक्षा और अन्य आवश्यक पहलुओं का अध्ययन करेंगे।
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कभी तराई में थी जल भैंसों की दुनिया
तराई के जंगल कभी जंगली जल भैंस और गैंडों का अनुकूल प्राकृतवास रहे हैं। करीब 130 वर्ष पहले यहां से गैंडे लुप्त हो गए थे, जबकि जंगली जल भैंस इससे पहले ही खत्म हो चुकी थी। वर्ष 1984 में गैंडा पुनर्वासन योजना शुरू हुई, जो सफल रही। अब उसी तर्ज पर जल भैंसों को फिर से बसाने पर ध्यान दिया जा रहा है। वर्तमान में जंगली जल भैंस असम और पश्चिम बंगाल के जंगलों में पाए जाते हैं, जहां गैंडों की भी अच्छी संख्या है।
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जंगली जल भैंसों के पुनर्वासन के लिए 10 से 12 हेक्टेयर क्षेत्र में जालीदार फेंसिंग कर इन्हें रखने की व्यवस्था की जाएगी। पहले चरण में असम के मानस वन्यजीव अभ्यारण्य से एक नर और तीन मादा जल भैंस लाने की योजना है। - डॉ. एच. राजामोहन, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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तराई के जंगलों में कभी गैंडों की तरह जंगली जल भैंसों का भी बसेरा हुआ करता था। यह कब और कैसे लुप्त हुए, इसकी पड़ताल की जा रही है। शोध में यह भी सामने आया है कि गैंडों और जंगली जल भैंसों का प्राकृतवास समान है। इसी आधार पर दुधवा में गैंडा पुनर्वासन की तर्ज पर जल भैंसों को बसाने की योजना पर काम हो रहा है।
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भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बिवास पांडव और डॉ. सम्राट मंडल अप्रैल के मध्य तक दुधवा पहुंचकर जल भैंसों के लिए जल स्रोत, भोजन, सुरक्षा और अन्य आवश्यक पहलुओं का अध्ययन करेंगे।
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कभी तराई में थी जल भैंसों की दुनिया
तराई के जंगल कभी जंगली जल भैंस और गैंडों का अनुकूल प्राकृतवास रहे हैं। करीब 130 वर्ष पहले यहां से गैंडे लुप्त हो गए थे, जबकि जंगली जल भैंस इससे पहले ही खत्म हो चुकी थी। वर्ष 1984 में गैंडा पुनर्वासन योजना शुरू हुई, जो सफल रही। अब उसी तर्ज पर जल भैंसों को फिर से बसाने पर ध्यान दिया जा रहा है। वर्तमान में जंगली जल भैंस असम और पश्चिम बंगाल के जंगलों में पाए जाते हैं, जहां गैंडों की भी अच्छी संख्या है।
जंगली जल भैंसों के पुनर्वासन के लिए 10 से 12 हेक्टेयर क्षेत्र में जालीदार फेंसिंग कर इन्हें रखने की व्यवस्था की जाएगी। पहले चरण में असम के मानस वन्यजीव अभ्यारण्य से एक नर और तीन मादा जल भैंस लाने की योजना है। - डॉ. एच. राजामोहन, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व