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चार माह की खामोशी के बाद मैलानी रेंज में बाघ फिर उग्र

Sun, 27 Mar 2022 12:28 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 27 Mar 2022 12:28 AM IST
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After four months of silence, the tiger again furious in the Mailani range
बाघ की लोकेशन ट्रेक करती वन विभाग की टीम।
शुक्रवार को बाघ के हमले में मारे में गए ग्रामीण की मौत से लोगों में दहशत
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दुधवा टाइगर रिजर्व के बफरजोन की मैलानी रेंज में बाघ के हमले का मामला
बांकेगंज। मानव-बाघ संघर्ष के लिए कुख्यात रहे दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की मैलानी रेंज में बाघ के हमले की घटना करीब चार माह बाद हुई है। घटना से जंगल के किनारे बसे गांव के लोग एक बार फिर दहशत में आ गए हैं। उधर, वन विभाग भी चौकन्ना हुआ है।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की मैलानी रेंज में शुक्रवार को बांकेगंज कस्बा से सटे परवस्त नगर गांव निवासी 55 वर्षीय शराफत अली को एक बाघ ने निवाला बना लिया। उसकी मौत से परिवार में मातम है। बाघ के हमले की यह घटना मैलानी क्षेत्र में करीब चार माह बाद हुई है। करीब छह साल पहले तक मैलानी रेंज जंगल के आसपास बाघ हमले में नौ लोग अपनी जान गवां चुके हैं। बाघ के इन हमलों की घटना से ग्रामीण दहशत में थे।
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वन विभाग के प्रयासों से इस क्षेत्र में बाघ के हमलों की घटनाओं में कमी आई, जिससे यहां रहने वाले लोग ही नहीं, बल्कि वन विभाग भी निश्चिंत नजर आ रहा था। शुक्रवार अचानक हुई इस घटना से एक बार फिर लोगों में डर बैठ गया है। हालांकि यह घटना जंगल में हुई है।
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चार माह पहले 10 नवंबर 21 को एक बाघ ने भरिगवां बीट जंगल में बांकेगंज ब्लॉक की पंचायत डाटपुर निवासी आशाराम पर हमला कर उसे मार डाला था। इससे छह साल पहले छेदीपुर गांव से सटे जंगल के आसपास सक्रिय एक बाघ ने नौ लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद बाघ को वन विभाग ने नरभक्षी घोषित कर ट्रैंक्युलाइज करके पकड़ लिया था, जो अब नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान लखनऊ में छेदी सिंह के नाम से शोभा बढ़ा रहा है।
मैलानी रेंज जंगल से सटे इलाके में मानव-बाघ संघर्ष की घटनाएं थमने के बाद उत्तर निघासन और बेलरायां रेंज में बाघ हमलों की घटनाओं में इजाफा हुआ था। पिछले एक साल के अंदर मझरा पूरब क्षेत्र में बाघ 13 लोगों को मौत के घाट उतार चुका है। दक्षिण खीरी वन प्रभाग समेत किशनपुर सेंक्चुरी जंगल के आसपास बसे क्षेत्र में भी यदाकदा बाघ हमले की घटनाएं होती रहीं हैं।

जंगल में इंसानी घुसपैठ भी एक बड़ी चुनौती
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन जंगल में इंसानी घुसपैठ भी मानव-बाघ संघर्ष का एक बड़ा कारण है। जंगल के आसपास रहने वाले लोग मवेशी चराने, घास-फूस लकड़ी आदि लेने के लिए जब जंगल जाते हैं तो वहां भी बाघ हमले का शिकार होते हैं। बरसात के मौसम में कटरूआ, धरती के फूल बीनने के लिए भी बड़े पैमाने पर जंगल में घुसपैठ होती है। बफरजोन की मैलानी, भीरा, उत्तर, दक्षिण निघासन, मझगई रेंज आदि इलाके बाघों के हमलों के लिहाज से काफी संवेदनशील हैं। यहां आबादी का दबाव भी है और जंगल में इंसानों की आवाजाही भी ज्यादा है। इससे इन क्षेत्रों में अक्सर


मानव-बाघ संघर्ष की घटनाएं होती रहती हैं।
मैलानी रेंज जंगल में बाघ हमले में एक ग्रामीण की मौत के बाद वन विभाग चौकन्ना हुआ है। हमलावर बाघ की निगरानी बढ़ा दी गई है। ग्रामीणों को सतर्कता बरतनी चाहिए। बाघ दिखाई देने पर इसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दें।
- संजय पाठक, मुख्य वन संरक्षक/ फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व
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