फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   After DM in the heat of Tikunia case, SP Vijay Dhul also measured, action taken after 39 days

तिकुनिया कांड की तपिश में डीएम के बाद एसपी विजय ढुल भी नपे, 39 दिन बाद हुई कार्रवाई

Sat, 13 Nov 2021 12:00 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 13 Nov 2021 12:00 AM IST
विज्ञापन
After DM in the heat of Tikunia case, SP Vijay Dhul also measured, action taken after 39 days
लखीमपुर खीरी। तिकुनिया कांड के 40 दिन बाद प्रदेश सरकार ने एसपी विजय ढुल को भी जिले से रुखसत कर वेटिंग में डाल दिया है। उनकी जगह संजीव सुमन को खीरी का नया पुलिस कप्तान बनाया गया है। एसपी विजय ढुल से पहले तिकुनिया कांड की तपिश में डीएम डॉ. अरविंद चौरसिया को सरकार ने 28 अक्तूबर को हटा दिया था। उनकी जगह महेंद्र बहादुर सिंह को खीरी का नया डीएम बनाया था।
विज्ञापन

तीन महीने से लगातार जनपद राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में बना हुआ है। डीएम डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया और एसपी विजय ढुल के कार्यकाल में जिले में तीन बड़ी घटनाएं हुईं। पहले पसगवां कांड फिर तिकुनिया कांड और बाढ़ की विभीषिका के कारण खीरी जिला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा। पसगवां और तिकुनिया कांड में पुलिस और प्रशासन की लापरवाही सामने आई थी। घटना के बाद जिले में कई दिन डेरा डाले एडीजी जोन एसएन साबत ने अमर उजाला से बातचीत में स्वीकारा था कि मामले में पुलिस की लापरवाही सामने आई थी। मामले में उन्होंने जल्द ही जनपद में पुलिस कप्तान के बदलने की बात भी इशारों-इशारों में कही थी। हालांकि, तब कयास लगाए जा रहे थे कि जो आईपीएस अफसर उस वक्त जिले में डटे थे उन्हें जिले की कप्तान दी जा सकती है। लेकिन 40 दिन बाद एसपी विजय ढुल पर गाज गिरी। उन्हें प्रतीक्षारत कर डीजीपी मुख्यालय से अटैच किया गया है।
विज्ञापन

पसगवां और तिकुनिया कांड ने कराई किरकिरी
लखीमपुर खीरी। एसपी विजय ढुल का जनपद में एक साल से ज्यादा का कार्यकाल रहा। इस दौरान उनके कार्यकाल में बड़ी घटनाओं के खिलाफ लचर कार्रवाई ने पुलिस विभाग की किरकिरी कराई। जबकि, मर्डर, लूट, चोरी एवं महिला अपराध की घटनाओं में भी बढ़ोतरी हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन

1- खुलेआम हुई फायरिंग, नौ महीने बाद भी कोई पकड़ा नहीं गया
इसी साल मार्च महीने में खीरी उपनिवेशन संघ के चुनाव में संपूर्णानगर में भाजपा के दो गुट आपस में भिड़ गए थे। खुले आम फायरिंग भी हुई थी। लेकिन, मामले में पुलिस पर भाजपा से जुड़े होने के नाते आरोपियों को बचाने के आरोप लगे। विपक्ष ने पुलिस पर आरोपियों को बचाने के खुलकर आरोप लगाए थे। मामले के नौ महीने बाद भी कोई पकड़ा नहीं गया।
2- बालिका से दुष्कर्म और हत्या के बाद सीएम के संज्ञान लेने पर हरकत में आई पुलिस
20 जून को पसगवां में अनुसूचित जाति की आठ वर्षीय बालिका का अस्त व्यस्त शव गन्ने के खेत में खून से लथपथ मिला था। मामले में शुरुआत से ही लापरवाही बरत रही पुलिस ने मुख्यमंत्री कार्यालय के संज्ञान लेने पर हत्या की दर्ज रिपोर्ट में दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की धाराएं बढ़ाई थीं। मामला राष्ट्रीय फलक पर चर्चा में आया था। मीडिया के दखल के बाद जांच में तेजी लाते हुए एक हफ्ते बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया था।
3- महिला प्रत्याशी से अभद्रता, पुलिस तमाशबीन रही
8 जुलाई को पसगवां में पुलिस प्रशासन के सामने ब्लॉक प्रमुख की प्रत्याशी रहीं रितु सिंह और उनकी प्रस्तावक अनीता यादव से बदसलूकी की गई। लेकिन पुलिस मूक दर्शक बनी रही थी। मामले में विपक्ष के हंगामे के बाद मुख्यमंत्री ने मामले का संज्ञान लिया और सीओ समेत छह पुलिसकर्मी सस्पेंड किए गए थे। पुलिस और प्रशासन की लापरवाही से हुई घटना ने राष्ट्रीय फलक पर जिले की किरकिरी कराई थी।

4- तिकुनिया कांड में प्रदेश सरकार की हुई किरकिरी, घटना पर काबू पाने में नाकाम रही पुलिस
तीन अक्तूबर को किसानों और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच हुए खूनी संघर्ष में चार किसानों समेत कुल आठ लोगों की मौत हुई थी। मामले में खुलेआम पुलिस और प्रशासन की लापरवाही सामने आने पर सरकार ने डीएम और एसपी दोनों को जिले से रुखसत कर दिया है। घटना वाले दिन पुलिस की खुलेआम लापरवाही सामने आई थी। खूनी संघर्ष में मारे गए पत्रकार रमन कश्यप और भाजपा कार्यकर्ता श्याम सुंदर के परिजन ने खुलेआम पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा है, कि पुलिस चाहती तो उन्हें बचाया जा सकता था। रमन कश्यप के भाई पवन कश्यप ने बताया कि निघासन कोतवाल ने उनके भाई को सीएचसी में न दिखाकर सीधे घायल हालत में मॉर्चुरी में रखवा दिया। फोन पर सूचना दी कि भाई का शव जिला अस्पताल की मॉर्चुरी में रखा है। परिजन ने बताया कि शव पर ताजा खून था, जिससे अगर उसे समय से इलाज मिलता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। इसी तरह श्याम सुंदर भी घायल अवस्था में पुलिस कस्टडी में दिखा था। इसके वीडियो साक्ष्य भी सामने आए थे। मामले में परिवार के अलावा केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी ने भी पुलिस पर सवाल उठाए थे कि पुलिस कस्टडी में घायल श्याम सुंदर की मौत कैसे हो गई। टेनी ने पुलिस के खिलाफ सीबीआई जांच कराने की बात भी कही थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed