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अनियमितताओं की पुष्टि होने पर दो प्रधानों पर शिकंजा
Lakhimpur
Updated Sun, 19 May 2013 05:31 AM IST
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एक प्रधान के खिलाफ पदच्युत की कार्रवाई तय, दूसरे प्रधान के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार प्रतिबंधित
लखीमपुर खीरी। जिले के दो ग्राम प्रधानों पर एक बार फिर से जिला प्रशासन का शिकंजा कस गया है। नकहा ब्लाक की ग्राम पंचायत परसा की महिला प्रधान का जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने पर डीएम मनीषा त्रिघाटिया ने नोटिस देते हुए स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही पदच्युत करने की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं। वहीं कुंभी क्षेत्र की ग्राम पंचायत अहमदनगर की महिला प्रधान के विरुद्ध लगे आरोपों की पुष्टि होने पर डीएम ने वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार प्रतिबंधित कर दिए हैं।
नकहा ब्लाक की ग्राम पंचायत परसा की महिला ग्राम प्रधान राजकौर ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में पिछड़ी जाति महिला के लिए आरक्षित सीट पर चुनाव जीता था। इसके बाद प्रधान द्वारा लगाए गए जाति प्रमाण पत्र को लेकर सवाल उठने लगे थे। गांव केही आशुतोष तिवारी ने डीएम को शिकायती पत्र देकर जाति प्रमाण पत्र की जांच कराने की मांग की थी। इस मामले में डीएम के निर्देश पर तहसील प्रशासन ने जांच की और जाति प्रमाण पत्र के फर्जी होने की पुष्टि करते हुए रिपोर्ट डीएम को सौंपी थी। इसके बाद डीएम की अध्यक्षता वाली जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति ने प्रकरण की समीक्षा करते हुए प्रधान के जाति प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया था। इस पर डीएम ने मामले को संज्ञान में लेते हुए प्रधान के विरुद्ध विधिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। प्रधान के विरुद्ध आरोप तय करते हुए तहसील कर्मियों पर दुरभि संधि कर पिछड़ा वर्ग की जदुराई पत्नी रघुनाथ के प्रमाण पत्र नंबर 23410321924 पर राज कौर के नाम प्रमाण पत्र जारी करने के आरोपों की पुष्टि हुई। डीएम मनीषा त्रिघाटिया ने आरोपी प्रधान के विरुद्ध अंतिम नोटिस जारी करते हुए 15 दिन के अंदर स्पष्टीकरण मांगा है और संतोषजनक जवाब न होने पर उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की धारा 95 (1)(छ) के तहत पदच्युत करने की कार्रवाई के निर्देश डीपीआरओ योगेंद्र कटियार को दिए हैं।
दूसरा मामला कुंभी क्षेत्र की ग्राम पंचायत अहमदनगर का है। यहां के बीडीसी रामसागर, शेर सिंह एवं खुशीराम ने डीएम को शपथ पत्र देकर प्रधान गुलशनजहां के विरुद्ध कई गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। डीएम ने मामले की जांच के लिए एसडीएम गोला तथा जिला पंचायत राज अधिकारी एवं एई डीआरडीए की एक संयुक्त समिति गठित की थी। टीम ने साक्ष्यों और बयानों के परीक्षणोपरांत प्रधान के विरुद्ध लगे आरोपों को प्रथम दृष्टया सिद्ध पाया। इसके बाद दिसंबर में प्रधान को नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन प्रधान ने नोटिस का जवाब देने के बजाय हाईकोर्ट की शरण ली थी। इस पर हाईकोर्ट ने प्रधान को राहत देते हुए आरोपों के संबंध में अपना पक्ष (स्पष्टीकरण) प्रस्तुत करने के लिए पुन: अवसर देने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए थे। डीपीआरओ योगेंद्र कटियार ने बताया कि प्रधान के विरुद्ध लगे आरोपों पट्टे की भूमि को तालाब में शामिल करते हुए खुदाई कराने, वृद्धावस्था सूची में अपने ज्येष्ठ मुख्त्यार को शामिल करने, पट्टेदार-खलिहान तथा स्कूल की जमीन पर तालाब खुदवाकर परिवार द्वारा मछली पालन कराने, प्रधान के पति द्वारा खेल मैदान पर गन्ने की फसल बोकर अवैध लाभ लेने और भूमि प्रबंधक समिति की संपत्तियों का दुर्विनियोग और दोषपूर्ण तरीके से अधिग्रहण की पुष्टि हुई है। प्रधान द्वारा फरवरी में दिया गया स्पष्टीकरण असंतोषजनक तथा भ्रामक पाया गया है। इस पर डीएम मनीषा त्रिघाटिया ने कार्रवाई करते हुए प्रधान गुलशनजहां के प्रधान पद के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार प्रतिबंधित कर दिए हैं।
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पंचायत सदस्यों की सूची मांगी
डीएम ने बीडीओ कुंभी को आदेश देते हुए ग्राम पंचायत अहमदनगर के समस्त ग्राम पंचायत सदस्यों की सूची (आयु एवं शैक्षिक योग्यता सहित) सूची डीपीआरओ को उपलब्ध कराने को कहा है। डीपीआरओ योगेंद्र कटियार ने बताया कि प्राप्त सूची के आधार पर प्रधान की समस्त शक्तियों का प्रयोग कर कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की जाएगी।
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अंतिम जांच के बाद हटाने की कार्रवाई
उत्तर प्रदेश पंचायत राज (प्रधानों और सदस्यों को हटाया जाना) जांच नियमावली 1997 के प्रस्तर छह में दी गई व्यवस्था के अनुसार प्रकरण की विस्तृत अंतिम जांच के लिए एआर कोआपरेटिव सिकंदर खान को जांच अधिकारी नामित किया गया है। डीएम ने प्रकरण की जांच कर 15 दिन के अंदर आख्या डीपीआरओ को उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं।
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लखीमपुर खीरी। जिले के दो ग्राम प्रधानों पर एक बार फिर से जिला प्रशासन का शिकंजा कस गया है। नकहा ब्लाक की ग्राम पंचायत परसा की महिला प्रधान का जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने पर डीएम मनीषा त्रिघाटिया ने नोटिस देते हुए स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही पदच्युत करने की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं। वहीं कुंभी क्षेत्र की ग्राम पंचायत अहमदनगर की महिला प्रधान के विरुद्ध लगे आरोपों की पुष्टि होने पर डीएम ने वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार प्रतिबंधित कर दिए हैं।
नकहा ब्लाक की ग्राम पंचायत परसा की महिला ग्राम प्रधान राजकौर ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में पिछड़ी जाति महिला के लिए आरक्षित सीट पर चुनाव जीता था। इसके बाद प्रधान द्वारा लगाए गए जाति प्रमाण पत्र को लेकर सवाल उठने लगे थे। गांव केही आशुतोष तिवारी ने डीएम को शिकायती पत्र देकर जाति प्रमाण पत्र की जांच कराने की मांग की थी। इस मामले में डीएम के निर्देश पर तहसील प्रशासन ने जांच की और जाति प्रमाण पत्र के फर्जी होने की पुष्टि करते हुए रिपोर्ट डीएम को सौंपी थी। इसके बाद डीएम की अध्यक्षता वाली जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति ने प्रकरण की समीक्षा करते हुए प्रधान के जाति प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया था। इस पर डीएम ने मामले को संज्ञान में लेते हुए प्रधान के विरुद्ध विधिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। प्रधान के विरुद्ध आरोप तय करते हुए तहसील कर्मियों पर दुरभि संधि कर पिछड़ा वर्ग की जदुराई पत्नी रघुनाथ के प्रमाण पत्र नंबर 23410321924 पर राज कौर के नाम प्रमाण पत्र जारी करने के आरोपों की पुष्टि हुई। डीएम मनीषा त्रिघाटिया ने आरोपी प्रधान के विरुद्ध अंतिम नोटिस जारी करते हुए 15 दिन के अंदर स्पष्टीकरण मांगा है और संतोषजनक जवाब न होने पर उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की धारा 95 (1)(छ) के तहत पदच्युत करने की कार्रवाई के निर्देश डीपीआरओ योगेंद्र कटियार को दिए हैं।
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दूसरा मामला कुंभी क्षेत्र की ग्राम पंचायत अहमदनगर का है। यहां के बीडीसी रामसागर, शेर सिंह एवं खुशीराम ने डीएम को शपथ पत्र देकर प्रधान गुलशनजहां के विरुद्ध कई गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। डीएम ने मामले की जांच के लिए एसडीएम गोला तथा जिला पंचायत राज अधिकारी एवं एई डीआरडीए की एक संयुक्त समिति गठित की थी। टीम ने साक्ष्यों और बयानों के परीक्षणोपरांत प्रधान के विरुद्ध लगे आरोपों को प्रथम दृष्टया सिद्ध पाया। इसके बाद दिसंबर में प्रधान को नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन प्रधान ने नोटिस का जवाब देने के बजाय हाईकोर्ट की शरण ली थी। इस पर हाईकोर्ट ने प्रधान को राहत देते हुए आरोपों के संबंध में अपना पक्ष (स्पष्टीकरण) प्रस्तुत करने के लिए पुन: अवसर देने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए थे। डीपीआरओ योगेंद्र कटियार ने बताया कि प्रधान के विरुद्ध लगे आरोपों पट्टे की भूमि को तालाब में शामिल करते हुए खुदाई कराने, वृद्धावस्था सूची में अपने ज्येष्ठ मुख्त्यार को शामिल करने, पट्टेदार-खलिहान तथा स्कूल की जमीन पर तालाब खुदवाकर परिवार द्वारा मछली पालन कराने, प्रधान के पति द्वारा खेल मैदान पर गन्ने की फसल बोकर अवैध लाभ लेने और भूमि प्रबंधक समिति की संपत्तियों का दुर्विनियोग और दोषपूर्ण तरीके से अधिग्रहण की पुष्टि हुई है। प्रधान द्वारा फरवरी में दिया गया स्पष्टीकरण असंतोषजनक तथा भ्रामक पाया गया है। इस पर डीएम मनीषा त्रिघाटिया ने कार्रवाई करते हुए प्रधान गुलशनजहां के प्रधान पद के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार प्रतिबंधित कर दिए हैं।
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पंचायत सदस्यों की सूची मांगी
डीएम ने बीडीओ कुंभी को आदेश देते हुए ग्राम पंचायत अहमदनगर के समस्त ग्राम पंचायत सदस्यों की सूची (आयु एवं शैक्षिक योग्यता सहित) सूची डीपीआरओ को उपलब्ध कराने को कहा है। डीपीआरओ योगेंद्र कटियार ने बताया कि प्राप्त सूची के आधार पर प्रधान की समस्त शक्तियों का प्रयोग कर कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की जाएगी।
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अंतिम जांच के बाद हटाने की कार्रवाई
उत्तर प्रदेश पंचायत राज (प्रधानों और सदस्यों को हटाया जाना) जांच नियमावली 1997 के प्रस्तर छह में दी गई व्यवस्था के अनुसार प्रकरण की विस्तृत अंतिम जांच के लिए एआर कोआपरेटिव सिकंदर खान को जांच अधिकारी नामित किया गया है। डीएम ने प्रकरण की जांच कर 15 दिन के अंदर आख्या डीपीआरओ को उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं।