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दुधवा ब्रांड अगरबत्ती और जायका नामक मसाले जल्द मिलेंगे
Lakhimpur
Updated Wed, 12 Nov 2014 05:31 AM IST
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थारू महिलाओं के बनाए गए उत्पादों की पैकिंग तेज
पलियाकलां (लखीमपुर खीरी)। अब लोगों को दुधवा ब्रांड नाम की अगरबत्तियां और जायका ब्रांड नाम के मसाले जल्द मिलने वाले हैं। दुधवा पार्क के नए पर्यटन सत्र में ही इन उत्पादों का भी शुभारंभ होगा।
यह योजना वनों पर आश्रित आदिवासी थारू जनजाति के कल्याण के लिए चलाई जा रही है। इसके तहत अगरबत्ती बनाने का प्रशिक्षण स्वयं सहायता समूहों की आदिवासी महिलाओं को दिया गया था। प्रशिक्षण प्राप्त महिलाओं को कन्नौज से इत्र और सामग्री मुहैया कराई जा चुकी है। वहीं अगरबत्ती का निर्माण कर का पैकिंग की भी तैयारी जोरों पर है। अगरबत्ती का ब्रांड नेम दुधवा होगा। इसके साथ ही थारू किसानाें द्वारा उगाई गई मिर्च, हल्दी और अन्य मसालों को भी ब्रांड नेम देने की तैयारी है। मसालों का ब्रांड नाम जायका परियोजना पर आधारित कर जायका रखा गया है। जल्दी ही यह मसाले पर्यटन स्थल पर बिक्री के लिए रखे जाएंगे।
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इस योजना से आदिवासी समुदाय की आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकेगी। योजना को जल्दी ही लागू किया जाएगा।
- वीके सिंह, उपनिदेशक दुधवा नेशनल पार्क
2.
दूसरे नेशनल पार्क भी देंगे गैंडों को पहचान
क्रासर.......
काजीरंगा और दुधवा के अधिकारियों ने साझा की तकनीक
अमर उजाला ब्यूरो
पलियाकलां (लखीमपुर खीरी)। गैंडाें को उनकी अपनी पहचान देकर भारत के नेशनल पार्कों में अव्वल बने दुधवा नेशनल पार्क की इस तकनीक को काजीरंगा ही नहीं देश के अन्य नेशनल पार्कों में भी लागू किया जाएगा। फिलहाल गुवाहाटी में काजीरंगा नेशनल पार्क के अधिकारियों ने दुधवा के अधिकारियों से आईडी बेस्ड तकनीक को साझा किया।
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इंडियन राइनो विजन 2020 के तहत लुप्त हो रही गैंडा प्रजाति को बचाने के लिए दुधवा में शुरू की गई आईडी बेस्ड तकनीक की मुहिम का अब असर दिखाई दे रहा है। गुवाहाटी में चार-पांच नवंबर को होने वाली कार्यशाला में दुधवा के अधिकारियों से इसे साझा करने की योजना बनाई थी। कार्यशाला में दुधवा के अधिकारियों से काजीरंगा के अधिकारियों ने इस पूरी तकनीक की जानकारी ली। दुुधवा के अधिकारियों की मानें तो अब यह तकनीक काजीरंगा ही नहीं, देश उन सभी नेशनल पार्कों में लागू की जाएगी, जहां गैंडा परियोजनाएं चल रहीं हैं।
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आईडी की बुकलेट सौंपी
दुधवा पार्क अधिकारियों ने आईडी बुकलेट को भी काजीरंगा के अधिकारियों को सौंप दिया है। इसमें दुधवा के सभी गैंडों के फोटो और उनके नाम शामिल हैं।
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बुकलेट से ही होनी है मानीटरिंग
बुकलेट में हर गैंडे की चार फोटो हैं और उसका नाम भी लिखा गया है। इसके आगे के पन्ने पर तारीख के हिसाब से कालम दिए गए हैं जिनमें मानीटरिंग करने वाले उस गैंडे की दिनचर्या का लेखा जोखा भरा जाएगा।
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पलियाकलां (लखीमपुर खीरी)। अब लोगों को दुधवा ब्रांड नाम की अगरबत्तियां और जायका ब्रांड नाम के मसाले जल्द मिलने वाले हैं। दुधवा पार्क के नए पर्यटन सत्र में ही इन उत्पादों का भी शुभारंभ होगा।
यह योजना वनों पर आश्रित आदिवासी थारू जनजाति के कल्याण के लिए चलाई जा रही है। इसके तहत अगरबत्ती बनाने का प्रशिक्षण स्वयं सहायता समूहों की आदिवासी महिलाओं को दिया गया था। प्रशिक्षण प्राप्त महिलाओं को कन्नौज से इत्र और सामग्री मुहैया कराई जा चुकी है। वहीं अगरबत्ती का निर्माण कर का पैकिंग की भी तैयारी जोरों पर है। अगरबत्ती का ब्रांड नेम दुधवा होगा। इसके साथ ही थारू किसानाें द्वारा उगाई गई मिर्च, हल्दी और अन्य मसालों को भी ब्रांड नेम देने की तैयारी है। मसालों का ब्रांड नाम जायका परियोजना पर आधारित कर जायका रखा गया है। जल्दी ही यह मसाले पर्यटन स्थल पर बिक्री के लिए रखे जाएंगे।
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इस योजना से आदिवासी समुदाय की आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकेगी। योजना को जल्दी ही लागू किया जाएगा।
- वीके सिंह, उपनिदेशक दुधवा नेशनल पार्क
2.
दूसरे नेशनल पार्क भी देंगे गैंडों को पहचान
क्रासर.......
काजीरंगा और दुधवा के अधिकारियों ने साझा की तकनीक
अमर उजाला ब्यूरो
पलियाकलां (लखीमपुर खीरी)। गैंडाें को उनकी अपनी पहचान देकर भारत के नेशनल पार्कों में अव्वल बने दुधवा नेशनल पार्क की इस तकनीक को काजीरंगा ही नहीं देश के अन्य नेशनल पार्कों में भी लागू किया जाएगा। फिलहाल गुवाहाटी में काजीरंगा नेशनल पार्क के अधिकारियों ने दुधवा के अधिकारियों से आईडी बेस्ड तकनीक को साझा किया।
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इंडियन राइनो विजन 2020 के तहत लुप्त हो रही गैंडा प्रजाति को बचाने के लिए दुधवा में शुरू की गई आईडी बेस्ड तकनीक की मुहिम का अब असर दिखाई दे रहा है। गुवाहाटी में चार-पांच नवंबर को होने वाली कार्यशाला में दुधवा के अधिकारियों से इसे साझा करने की योजना बनाई थी। कार्यशाला में दुधवा के अधिकारियों से काजीरंगा के अधिकारियों ने इस पूरी तकनीक की जानकारी ली। दुुधवा के अधिकारियों की मानें तो अब यह तकनीक काजीरंगा ही नहीं, देश उन सभी नेशनल पार्कों में लागू की जाएगी, जहां गैंडा परियोजनाएं चल रहीं हैं।
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आईडी की बुकलेट सौंपी
दुधवा पार्क अधिकारियों ने आईडी बुकलेट को भी काजीरंगा के अधिकारियों को सौंप दिया है। इसमें दुधवा के सभी गैंडों के फोटो और उनके नाम शामिल हैं।
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बुकलेट से ही होनी है मानीटरिंग
बुकलेट में हर गैंडे की चार फोटो हैं और उसका नाम भी लिखा गया है। इसके आगे के पन्ने पर तारीख के हिसाब से कालम दिए गए हैं जिनमें मानीटरिंग करने वाले उस गैंडे की दिनचर्या का लेखा जोखा भरा जाएगा।
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