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संरक्षित जंगल में भी सुरक्षित नहीं बाघ और तेंदुए

Fri, 05 Oct 2018 06:24 PM IST
Updated Fri, 05 Oct 2018 06:24 PM IST
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संरक्षित जंगल में भी सुरक्षित नहीं बाघ और तेंदुए
संरक्षित जंगल में भी सुरक्षित नहीं बाघ और तेंदुए
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क्रासर......
पकड़े गए शिकारियों से खीरी से शिकार के हुए खुलासे
क्रासर........
अंतरराष्ट्रीय तस्करों से जुड़े हैं स्थानीय शिकारियों के तार
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व के संरक्षित वन क्षेत्र में भी बाघ और तेंदुए सुरक्षित नहीं हैं। हाल ही में पीलीभीत जिले में बाघ के चार दांतों के साथ पकड़े गए दो वन्यजीव तस्करों ने खुलासा किया कि उन्होंने यह दांत दुधवा टाइगर रिजर्व की भीरा रेंज से प्राप्त किए हैं। इससे पहले भी पकड़े गए कई शिकारियों ने दुधवा टाइगर रिजर्व एरिया से बाघ की शिकार की बात स्वीकारी है। इससे यह तय हो गया है कि दुधवा टाइगर रिजर्व के बाघ अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करों के निशाने पर हैं। पीलीभीत जिले में पकड़े गए वन्यजीव तस्कर भीरा जंगल के पास स्थित गांव महेशापुर के निवासी हैं। पूछताछ में पता चला कि इनमें से एक तस्कर का पिता भी बाघ शिकार के मामले में संलिप्त रहा है। पेशेवर इन शिकारियों के तार अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करों से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। करीब पांच माह पहले दिल्ली में नेपाली वन्यजीव तस्कर मंगल लामा बाघ की हड्डियों और अंगों के साथ पकड़ा गया था। सीबीआई ने केस दर्ज कर जब जांच शुरू की तो पता चला कि मंगल लामा कुछ दिन पलिया में रहकर गया है। आशंका यह जताई जा रही है कि दुधवा नेशनल पार्क में बाघ का शिकार कर हड्डियां और दूसरे अंग दिल्ली ले जाए गए।
इससे पहले 31 दिसंबर 2017 को खटीमा में भारत-नेपाल सीमा से सटे जंगल से पुलिस, एसटीएफ एसओजी और वन विभाग की संयुक्त टीम ने खीरी जिले के दो तस्करों को पकड़ा। उनके पास से वयस्क बाघ की खाल और 8.3 किलोग्राम बाघ की हड्डियां बरामद हुईं। इनमें एक तस्कर गोला कोतवाली क्षेत्र के कमलापुर गांव का राजू और दूसरा मैलानी थाना क्षेत्र के गांव ढाका का निवासी महावीर था। इनके तार कुख्यात अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्कर तोताराम और बावरिया गैंग से जुड़े होने की संभावना जताई गई। पूछताछ में उन्होंने मैलानी रेंज जंगल से बाघ का शिकार करने की बात स्वीकार की।
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इसी साल 24 जनवरी 2018 को पलिया-दुधवा रोड पर धीरज भसीन निवासी नीलगिरी, अलकनंदा, नई दिल्ली को पकड़ा गया। उसके पास से तेंदुए की दो खालें बरामद हुईं। पूछताछ में उसने बताया कि वह दिल्ली में रहकर गिरोह का संचालन करता है। उसकी निशानदेही पर वन विभाग की टीम ने दिल्ली पुलिस के साथ एक फार्म हाउस पर छापा मारा। जहां से टीम ने अल्मोड़ा के गोपाल सिंह नेगी को गिरफ्तार किया। यह तराई के जंगलों के अलावा बागेश्वर और अल्मोड़ा जिलों से वन्यजीवों का शिकार कर नेपाल के रास्ते चीन भेजते थे।
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29 जनवरी 2018 को नेपाल की क्षेत्रीय अनुसंधान पुलिस टीम ने नेपाल के कैलाली जिला के धनगढ़ी में छापा मारकर जुम्ला जिला के सुनी गांव निवासी सुमन धिताल को भालू की 70 ग्राम पित्त और जड़ी बूटियों के साथ गिरफ्तार किया। इससे एक सप्ताह पहले कैलाली जिले के सीसा पानी में गुलदार की तीन खालें और हड्डी एक घर से बरामद की गई थीं। पकड़े गए वन्यजीव तस्करों से पूछताछ से इस बात की पुष्टि हुई है कि खीरी जिला अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करों का हब बनता जा रहा है। नेपाल सीमा पर स्थित होने के कारण तस्करों को बाघ, तेंदुओं की खालें और वन्यजीव अंग नेपाल के रास्ते दूसरे देशों में भेजना आसान होता है।
इंसेट........
बड़े वन्यजीव तस्कर स्थानीय लोगों से कराते हैं शिकार
अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्कर शिकार के लिए स्थानीय और घुमंतू लोगों की मदद लेते है। संपूर्णानगर, मैलानी, भीरा जंगलों के आसपास गांव में रहने वाले कई लोगों के तार अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करों से जुड़े हुए हैं। संपूर्णानगर क्षेत्र का नरौसा गांव इस काम के लिए कुख्यात है। यह गांव बावरिया गैंग का अड्डा माना जाता है। शिकार के बाद तस्कर खाल और दूसरे कीमती अंग निकाल कर नेपाल के रास्ते चीन और तिब्बत आदि देशों में पहुंचा देते हैं। करियर के रूप में प्राय: महिलाओं का इस्तेमाल होता है।
इंसेट.........
चीन और तिब्बत में है वन्यजीव अंगों का बाजार
बाघ, तेंदुओं की खाल और वन्यजीव अंगों की मांग सबसे ज्यादा चीन और तिब्बत में है। तिब्बत में बाघ और तेंदुए की खाल की कीमत लाखों में है। इन खालों से बनी पोशाक पहनना यहां के लोग अपनी शान समझते हैं। चीन में बाघ की हड्डियों से टाइगर वाइन बनाई जाती है। जुलाई 1986 में दुधवा मे एक बोरे में भरी पांच बाघों की अस्थियों के साथ दो लोगों को पकड़ा गया था। पूछताछ में खुलासा हुआ कि चीन में टाइगर वाइन बनाने के लिए इन हड्डियों की बेहद मांग है। बाघ के अन्य कई अंग दवा बनाने में इस्तेमाल करते हैं। चीन वन्यजीव अंगों का विस्तृत बाजार बन चुका है।

वर्जन......
खीरी जिले में संगठित वन अपराधियों की सक्रियता से इनकार नहीं किया जा सकता है। पिछले दिनों पकड़े गए वन्यजीव तस्करों से पूछताछ में इस बात की पुष्टि भी हुई है। दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने बाघों की सुरक्षा के लिए अलर्ट जारी कर दिया है। जंगल की चौकसी बढ़ा दी है। वन विभाग की टीमें लगातार एसटीपीएफ के साथ जंगल की निगरानी में लगी हुई हैं।
रमेश कुमार पांडेय, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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