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कौडिय़ा गांव के पास ही चहलकदमी कर रहा बाघ
Updated Thu, 12 Apr 2018 08:23 PM IST
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कौड़िया गांव के पास ही
चहलकदमी कर रहा बाघ
- ग्रामीणों में दहशत, खेतों में जाने से डर रहे किसान
अमर उजाला ब्यूरो
निघासन।
दो दिन पहले एक किसान की चारपाई में बंधी बछिया मारने के बाद बुधवार रात दो बार बाघ कौड़िया गांव में घुस आए। घबराए ग्रामीणों ने लाठी-डंडे लेकर शोर मचाते हुए किसी तरह दोनों को खदेड़ा। बाघ के डर से गांव के लोग रात भर जागते रहे। गुरुवार सुबह बाघ को गांव के उत्तर खेतों में घूमते देखा गया। बाघ के आबादी के निकट होने से लोगों में दहशत है।
जंगल छोड़कर खेतों और गांवों के आसपास घूम रहे बाघ ने मंगलवार रात मझगईं रेंज के तहत कौड़िया गांव के रामऔतार की बछिया पर हमला करके उसे मार दिया था। इसके बाद बुधवार सुबह भी उसने मवेशी चराने जाते समय जानवरों पर हमला किया था। बुधवार रात करीब आठ बजे कौड़िया गांव के उत्तरी छोर पर रहने वाला कैलाश अपने मकान के बाहर लगे नल पर हाथ मुंह धो रहा था। तभी उसके पड़ोसी शत्रोहन के घर की लड़की ने टार्च लगाई तो कैलाश ने देखा कि उससे चंद कदमों की दूरी पर बाघ खड़ा था। इससे डरकर शोर मचाते हुए वह घर की तरफ भागा। अन्य ग्रामीणों के शोर मचाने पर वह पास में लगी बेशर्म की झाड़ियों में घुस गया। खबर पाकर वन विभाग की टीम भी गाड़ी से गांव पहुंची और बाघ के पदचिन्ह देखे।
इसके बाद रात करीब दस बजे एक बार फिर बाघ गांव के उत्तर-पूरब छोर पर रहने वाले दिनेश के घर के पास बाघ जा पहुंचा। दिनेश की बहन बाहर निकली थी। उसने घर के पास बाघ खड़ा देखकर शोर मचाया। बाघ की दहशत में जाग रहे हरिनंदन यादव, भोलाराम, शत्रोहन, रामासरे, जमुना, त्रिमोहन आदि बहुत से ग्रामीण इकट्ठा हो गए। लाठी-डंडे लेकर शोर मचाते हुए ग्रामीणों ने बाघ को दौड़ाया। तब तक गांव में ही मौजूद वनकर्मी भी पहुंच गए। वहां से भागकर बाघ एक बार फिर बेशर्म की झाड़ियों में घुसकर गायब हो गया।
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दो बार बाघ के गांव में घुसने से डरे लोग रात भर जागकर अपने मवेशियों की निगरानी करते रहे। गुरुवार सुबह उसे फिर गांव के उत्तर सकटू के गन्ना बोए खेत में टहलते देखा गया। बाघ की लगातार मौजूदगी की वजह से ग्रामीणों में डर पैदा हो गया है। उनकी रातों की नींद हराम हो गई है। बाघ की दहशत की वजह से किसान और मजदूर खेतों में जाने से कतरा रहे हैं।
मझगईं के वन क्षेत्राधिकारी राधेश्याम ने बताया कि कौड़िया गांव में जहां बाघ देखा गया उसके उत्तर खेत और बेशर्म की झाड़ियों से लगी सूखी झील है। इससे लगा हुआ जंगल है। इसी वजह से बाघ वहां बार-बार पहुंच रहा है। उन्होंने लोगों को अकेले न निकलकर झुंड में आने-जाने और सतर्क रहने की सलाह दी है।
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चहलकदमी कर रहा बाघ
- ग्रामीणों में दहशत, खेतों में जाने से डर रहे किसान
अमर उजाला ब्यूरो
निघासन।
दो दिन पहले एक किसान की चारपाई में बंधी बछिया मारने के बाद बुधवार रात दो बार बाघ कौड़िया गांव में घुस आए। घबराए ग्रामीणों ने लाठी-डंडे लेकर शोर मचाते हुए किसी तरह दोनों को खदेड़ा। बाघ के डर से गांव के लोग रात भर जागते रहे। गुरुवार सुबह बाघ को गांव के उत्तर खेतों में घूमते देखा गया। बाघ के आबादी के निकट होने से लोगों में दहशत है।
जंगल छोड़कर खेतों और गांवों के आसपास घूम रहे बाघ ने मंगलवार रात मझगईं रेंज के तहत कौड़िया गांव के रामऔतार की बछिया पर हमला करके उसे मार दिया था। इसके बाद बुधवार सुबह भी उसने मवेशी चराने जाते समय जानवरों पर हमला किया था। बुधवार रात करीब आठ बजे कौड़िया गांव के उत्तरी छोर पर रहने वाला कैलाश अपने मकान के बाहर लगे नल पर हाथ मुंह धो रहा था। तभी उसके पड़ोसी शत्रोहन के घर की लड़की ने टार्च लगाई तो कैलाश ने देखा कि उससे चंद कदमों की दूरी पर बाघ खड़ा था। इससे डरकर शोर मचाते हुए वह घर की तरफ भागा। अन्य ग्रामीणों के शोर मचाने पर वह पास में लगी बेशर्म की झाड़ियों में घुस गया। खबर पाकर वन विभाग की टीम भी गाड़ी से गांव पहुंची और बाघ के पदचिन्ह देखे।
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इसके बाद रात करीब दस बजे एक बार फिर बाघ गांव के उत्तर-पूरब छोर पर रहने वाले दिनेश के घर के पास बाघ जा पहुंचा। दिनेश की बहन बाहर निकली थी। उसने घर के पास बाघ खड़ा देखकर शोर मचाया। बाघ की दहशत में जाग रहे हरिनंदन यादव, भोलाराम, शत्रोहन, रामासरे, जमुना, त्रिमोहन आदि बहुत से ग्रामीण इकट्ठा हो गए। लाठी-डंडे लेकर शोर मचाते हुए ग्रामीणों ने बाघ को दौड़ाया। तब तक गांव में ही मौजूद वनकर्मी भी पहुंच गए। वहां से भागकर बाघ एक बार फिर बेशर्म की झाड़ियों में घुसकर गायब हो गया।
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दो बार बाघ के गांव में घुसने से डरे लोग रात भर जागकर अपने मवेशियों की निगरानी करते रहे। गुरुवार सुबह उसे फिर गांव के उत्तर सकटू के गन्ना बोए खेत में टहलते देखा गया। बाघ की लगातार मौजूदगी की वजह से ग्रामीणों में डर पैदा हो गया है। उनकी रातों की नींद हराम हो गई है। बाघ की दहशत की वजह से किसान और मजदूर खेतों में जाने से कतरा रहे हैं।
मझगईं के वन क्षेत्राधिकारी राधेश्याम ने बताया कि कौड़िया गांव में जहां बाघ देखा गया उसके उत्तर खेत और बेशर्म की झाड़ियों से लगी सूखी झील है। इससे लगा हुआ जंगल है। इसी वजह से बाघ वहां बार-बार पहुंच रहा है। उन्होंने लोगों को अकेले न निकलकर झुंड में आने-जाने और सतर्क रहने की सलाह दी है।