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82174 एमटी गेहूं की खरीद
लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 13 May 2015 07:44 PM IST
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रबी विपणन वर्र्ष 2015-16 में मूल्य समर्र्थन योजना के तहत जिले भर में 203 क्रय केंद्रों के माध्यम से गेहूं की खरीद की जा रही है। अब तक लक्ष्य के सापेक्ष 52 फीसदी गेहूं की खरीद हो चुकी हैै। एजेंसियों के अलावा आढ़ती भी किसानों से गेहूं खरीद कर रहे है, अब तक 8099 किसानों से 82,174 एमटी गेहूं खरीदा गया है।
जिले में किसानों से सीधे गेहूं खरीद के लिए विपणन शाखा ने पांच, पीसीएफ ने 87, यूपी स्टेट एग्रो ने दो, यूपीएसएस ने 28, एसएफसी ने छह, कर्मचारी कल्याण निगम ने पांच, एनसीसीएफ ने पांच, पंजीकृत सहकारी समितियों ने 10 और एफसीआई ने पांच क्रय केंद्र खोले हैं। जबकि आढ़तियों ने 49 क्रय केंद्र खोले हैैं। सभी को क्रय केंद्र वार खरीद का अलग-अलग लक्ष्य दिया गया है। विभागीय रिपोर्ट के आंकड़ाें पर गौर करें, तो पिछले वर्ष 12 मई तक 20026 मीट्रिक टन गेहूं खरीद हुई थी जबकि इस वर्ष 82174 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो चुकी है, जो लक्ष्य के सापेक्ष 52 फीसदी है। भुगतान के मामले में आढ़तियों और कुछ एजेंसियां किसानों को समय से भुगतान कर रही हैं, लेकिन तीन एजेंसियाें पर किसानों का 2.43 करोड़ रुपये बकाया है। सबसे ज्यादा पीसीएफ पर 2.05 करोड़ रुपये बकाया है, जबकि स्टेट एग्रो पर 13 लाख और यूपीएसएस पर 25 लाख रुपये बकाया है।
किसानों की कम तादाद से उठे सवाल
क्रय केंद्रों पर गेहूं बिक्री करना साधारण किसानों के लिए आज भी परेशानी का सबब बना हुआ है। मौजूदा खरीद के आंकड़े कुछ इसी बात की गवाही दे रहे हैं। 82174 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद सिर्फ 8099 किसानों से हुई है, जो प्रत्येक किसान से औसतन 10 मीट्रिक टन (100 क्विंटल) गेहूं खरीद की ओर इशारा कर रहा है। छोटे और मझोले किसानों से खरीद की उम्मीद बेमानी ही है।
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जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी सीबी उत्तम ने बताया कि किसानों को समय से भुगतान कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। खरीद के सापेक्ष एफसीआई को डिलीवरी होने वाले गेहूं के उतार में सुधार हुआ है, जिससे एजेंसियों को जल्द ही भुगतान मिलेगा। किसानों को किसी तरह की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।
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जिले में किसानों से सीधे गेहूं खरीद के लिए विपणन शाखा ने पांच, पीसीएफ ने 87, यूपी स्टेट एग्रो ने दो, यूपीएसएस ने 28, एसएफसी ने छह, कर्मचारी कल्याण निगम ने पांच, एनसीसीएफ ने पांच, पंजीकृत सहकारी समितियों ने 10 और एफसीआई ने पांच क्रय केंद्र खोले हैं। जबकि आढ़तियों ने 49 क्रय केंद्र खोले हैैं। सभी को क्रय केंद्र वार खरीद का अलग-अलग लक्ष्य दिया गया है। विभागीय रिपोर्ट के आंकड़ाें पर गौर करें, तो पिछले वर्ष 12 मई तक 20026 मीट्रिक टन गेहूं खरीद हुई थी जबकि इस वर्ष 82174 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो चुकी है, जो लक्ष्य के सापेक्ष 52 फीसदी है। भुगतान के मामले में आढ़तियों और कुछ एजेंसियां किसानों को समय से भुगतान कर रही हैं, लेकिन तीन एजेंसियाें पर किसानों का 2.43 करोड़ रुपये बकाया है। सबसे ज्यादा पीसीएफ पर 2.05 करोड़ रुपये बकाया है, जबकि स्टेट एग्रो पर 13 लाख और यूपीएसएस पर 25 लाख रुपये बकाया है।
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किसानों की कम तादाद से उठे सवाल
क्रय केंद्रों पर गेहूं बिक्री करना साधारण किसानों के लिए आज भी परेशानी का सबब बना हुआ है। मौजूदा खरीद के आंकड़े कुछ इसी बात की गवाही दे रहे हैं। 82174 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद सिर्फ 8099 किसानों से हुई है, जो प्रत्येक किसान से औसतन 10 मीट्रिक टन (100 क्विंटल) गेहूं खरीद की ओर इशारा कर रहा है। छोटे और मझोले किसानों से खरीद की उम्मीद बेमानी ही है।
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जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी सीबी उत्तम ने बताया कि किसानों को समय से भुगतान कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। खरीद के सापेक्ष एफसीआई को डिलीवरी होने वाले गेहूं के उतार में सुधार हुआ है, जिससे एजेंसियों को जल्द ही भुगतान मिलेगा। किसानों को किसी तरह की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।