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चालीस प्रतिशत मिल के इंडेट हड़प रहे गन्ना माफिया
Updated Sun, 18 Feb 2018 11:48 PM IST
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sugarcane
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धौरहरा। गोविंद शुगर मिल की पेराई क्षमता बढ़ी तो किसानों को खुशहाली की उम्मीद जगी, पर इन किसानों की खुशियों को ग्रहण लगाने पर आमादा गन्ना माफिया और मिल के अधिकारियों की जुगलबंदी ने किसानों के गन्ने के इंडेंट को 60 प्रतिशत कर दिया है, जबकि 40 प्रतिशत गन्ना माफिया के हवाले हो गया है। नतीजतन किसान अपना गन्ना बिचौलियों को 240 रुपया प्रति क्विंटल बेचने को विवश हैं, जबकि मिल में फैले माफिया किसानों के गन्ने को उन्हीं के हिस्से के इंडेंट पर 325 रुपये प्रति क्विंटल बेचकर चांदी काट रहे हैं।
ज्येष्ट गन्ना विकास निरीक्षक मार्कंडेय मौर्या बताते हैं कि मिल वास्तव में 60से 65 प्रतिशत ही इंडेंट जारी कर रही है, लेकिन मिल में गन्ने की आपूर्ति देख तो लगता है कि गन्ना जारी इंडेंट से अधिक आ रहा है। उन्होंने इसकी जांच कराने को कहा है। पूर्वमंत्री यशपाल चौधरी कहते हैं कि किसानों का शोषण किया जा रहा है, पर अफसोस कि कोई सत्ताधारी नेता इन किसानों की बात नहीं उठा रहा, जबकि पीएम मोदी किसानों की आय दोगुनी करने की बात करते हैं। पूर्व विधायक शमशेर बहादुर कहते हैं कि भाजपा सरकार माफिया को बढ़ावा दे रही है। असल किसान बर्बाद हो रहा है। हम गन्ना किसानों की समस्या को लेकर जल्दी ही आन्दोलन करेंगे।
मिल का इंडेट कितना जारी हो रहा है यह मुझे ज्ञात नहीं। हां, यह सच है कि कुछ माफिया ने मिल अधिकारियों की मिली भगत से फर्जी सट्टे बनवा कर अवैध खरीद कर रहे हैं। मामले को बजट सत्र के बाद विधानसभा में भी उठाऊंगा।
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- बाला प्रसाद अवस्थी, विधायक
गन्ना नीति का पूर्णतया पालन किया जा रहा है। इंडेंड भी मिल क्षमता के अनुसार जारी किया जा रहा है। यदि कोई बीमारी या शादी की समस्या बताता है तो एसडीएम और गन्ना सचिव की स्वीकृत पर भुगतान चेक से किया जाता है। किसी माफिया का गन्ना नहीं लिया जाता। किसानों को कैलेंडर के हिसाब से पर्चियां जारी हो रही हैं।
- बीके सिंह, जीएम केन
मिल की पेराई क्षमता प्रतिदिन एक लाख क्विंटल की है, गन्ना भी आता है, जबकि किसानों का इंडेंट 60 से 70 हजार क्विंटल जारी किया जा रहा है। 40 हजार क्विंटल गन्ना प्रतिदिन मिल के दलालों से खरीदा जा रहा है जो कि गलत है इस बाबत हम गन्ना आयुक्त से शिकायत करेंगे।
- शालिनी चौधरी, चेयरपर्सन ऐरा गन्ना विकास समिति
समिति की मोहर लगाने को जो पर्चियां आती हैं वह प्रतिदिन 60 से 65 हजार के बीच होती है। आपूर्ति भी हो रही है। गन्ना कहां से आ रहा है यह जांच का विषय है।
- टीएन यादव, गन्ना सचिव ऐरा
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ज्येष्ट गन्ना विकास निरीक्षक मार्कंडेय मौर्या बताते हैं कि मिल वास्तव में 60से 65 प्रतिशत ही इंडेंट जारी कर रही है, लेकिन मिल में गन्ने की आपूर्ति देख तो लगता है कि गन्ना जारी इंडेंट से अधिक आ रहा है। उन्होंने इसकी जांच कराने को कहा है। पूर्वमंत्री यशपाल चौधरी कहते हैं कि किसानों का शोषण किया जा रहा है, पर अफसोस कि कोई सत्ताधारी नेता इन किसानों की बात नहीं उठा रहा, जबकि पीएम मोदी किसानों की आय दोगुनी करने की बात करते हैं। पूर्व विधायक शमशेर बहादुर कहते हैं कि भाजपा सरकार माफिया को बढ़ावा दे रही है। असल किसान बर्बाद हो रहा है। हम गन्ना किसानों की समस्या को लेकर जल्दी ही आन्दोलन करेंगे।
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मिल का इंडेट कितना जारी हो रहा है यह मुझे ज्ञात नहीं। हां, यह सच है कि कुछ माफिया ने मिल अधिकारियों की मिली भगत से फर्जी सट्टे बनवा कर अवैध खरीद कर रहे हैं। मामले को बजट सत्र के बाद विधानसभा में भी उठाऊंगा।
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- बाला प्रसाद अवस्थी, विधायक
गन्ना नीति का पूर्णतया पालन किया जा रहा है। इंडेंड भी मिल क्षमता के अनुसार जारी किया जा रहा है। यदि कोई बीमारी या शादी की समस्या बताता है तो एसडीएम और गन्ना सचिव की स्वीकृत पर भुगतान चेक से किया जाता है। किसी माफिया का गन्ना नहीं लिया जाता। किसानों को कैलेंडर के हिसाब से पर्चियां जारी हो रही हैं।
- बीके सिंह, जीएम केन
मिल की पेराई क्षमता प्रतिदिन एक लाख क्विंटल की है, गन्ना भी आता है, जबकि किसानों का इंडेंट 60 से 70 हजार क्विंटल जारी किया जा रहा है। 40 हजार क्विंटल गन्ना प्रतिदिन मिल के दलालों से खरीदा जा रहा है जो कि गलत है इस बाबत हम गन्ना आयुक्त से शिकायत करेंगे।
- शालिनी चौधरी, चेयरपर्सन ऐरा गन्ना विकास समिति
समिति की मोहर लगाने को जो पर्चियां आती हैं वह प्रतिदिन 60 से 65 हजार के बीच होती है। आपूर्ति भी हो रही है। गन्ना कहां से आ रहा है यह जांच का विषय है।
- टीएन यादव, गन्ना सचिव ऐरा