{"_id":"5b34c8a04f1c1b603c8b5e89","slug":"71530185888-lakhimpur-kheri-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"निर्वाचन आयोग के मिले फर्जी लेटर में रिपोर्ट दर्ज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
निर्वाचन आयोग के मिले फर्जी लेटर में रिपोर्ट दर्ज
Updated Thu, 28 Jun 2018 05:08 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
निर्वाचन आयोग के मिले फर्जी लेटर में रिपोर्ट दर्ज
डाक से डीएम को मिला था लेटर, जांच में मिला फर्जी
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। भारत निर्वाचन आयोग के नाम से डाक से डीएम को मिले फर्जी लेटर के मामले में सदर कोतवाली पुलिस ने सहायक निर्वाचन अधिकारी नंदराम की ओर से अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
18 जून को डाक से एक पत्र डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह के पास पहुंचा था। भारत निर्वाचन आयोग की ओर से तीन मई 2018 को जारी किए गए इस पत्र में लिखा था कि ईवीएम को लेकर सवाल उठ रहे हैं। डीएम से राय मांगी गई थी कि लोकसभा चुनाव 2019 होना है। इस चुनाव को बैलेट से कराया जाए तो कितनी विश्वसनीयता रहेगी। पत्र में 30 दिन के भीतर गोपनीय रिपोर्ट देने को कहा गया था। पत्र की भाषा पढ़कर डीएम को शक हुआ तो उन्होंने सहायक निर्वाचन अधिकारी नंदराम को इसकी जांच कराने के आदेश दिए। सहायक निर्वाचन अधिकारी ने जब मुख्य निर्वाचन अधिकारी लखनऊ को पत्र भेजकर इस पत्र के बारे में जानकारी मांगी तो पत्र फर्जी निकला। आयोग से पत्र के फर्जी होने की पुष्टि के बाद सहायक निर्वाचन अधिकारी नंदराम ने डीएम के आदेश पर सदर कोतवाली पुलिस को तहरीर दी, जिस पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
डाक से डीएम को मिला था लेटर, जांच में मिला फर्जी
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। भारत निर्वाचन आयोग के नाम से डाक से डीएम को मिले फर्जी लेटर के मामले में सदर कोतवाली पुलिस ने सहायक निर्वाचन अधिकारी नंदराम की ओर से अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
18 जून को डाक से एक पत्र डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह के पास पहुंचा था। भारत निर्वाचन आयोग की ओर से तीन मई 2018 को जारी किए गए इस पत्र में लिखा था कि ईवीएम को लेकर सवाल उठ रहे हैं। डीएम से राय मांगी गई थी कि लोकसभा चुनाव 2019 होना है। इस चुनाव को बैलेट से कराया जाए तो कितनी विश्वसनीयता रहेगी। पत्र में 30 दिन के भीतर गोपनीय रिपोर्ट देने को कहा गया था। पत्र की भाषा पढ़कर डीएम को शक हुआ तो उन्होंने सहायक निर्वाचन अधिकारी नंदराम को इसकी जांच कराने के आदेश दिए। सहायक निर्वाचन अधिकारी ने जब मुख्य निर्वाचन अधिकारी लखनऊ को पत्र भेजकर इस पत्र के बारे में जानकारी मांगी तो पत्र फर्जी निकला। आयोग से पत्र के फर्जी होने की पुष्टि के बाद सहायक निर्वाचन अधिकारी नंदराम ने डीएम के आदेश पर सदर कोतवाली पुलिस को तहरीर दी, जिस पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
विज्ञापन