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धौरहरा में धडल्ले से खप रही नकली सोन पपड़ी
Updated Wed, 18 Oct 2017 11:12 PM IST
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लखीमपुर खीरी/ धौरहरा-खीरी।
दिवाली पर आप मिठाई खरीदने जा रहे हैं तो सावधान हो जाएं। बाजार में गाजियाबाद, बरेली से नकली मिठाइयां आ चुकी हैं। इसमें पीली सोन पपड़ी, रसगुल्ला, बर्फी भी हैं। यह दूसरी मिठाइयों की तुलना में देखने में ज्यादा अच्छी हैं और सस्ती भी हैं, लेकिन सेहत के लिए हानिकारक है। इन मिठाइयों को कल दिवाली और भैयादूज पर खपाने की तैयारी है।
दीवाली पर कुछ मुनाफाखोर अपने फायदे के लिए आपकी सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो हजारों टन नकली मिठाइयां इलाके की दुकानों पर पहुंच चुकी हैं। यह मिठाइयां गाजियाबाद, मुरादाबाद और बरेली से आ रही हैं। इन मिठाइयों में प्रमुख रूप से पीले रंग की केमिकल युक्त पपड़ी और सिंथेटिक रसगुल्ला है। यह रसगुल्ला सफेद और लाल रंग का छेना है। देखने में यह मिठाई आम मिठाई से ज्यादा अच्छी दिखती है।
दुकानदार इसे सौ से डेढ़ सौ रुपये तक में बेचता है। नाम न छापने की शर्त पर एक दुकानदार ने बताया कि रसगुल्ला बनाने के लिए क्षेत्र में पर्याप्त दूध तक नहीं मिल पाता है। वह रसगुल्ला ढाई सौ रुपये किलो से कम में बेचने पर परता नहीं आता, जबकि गाजियाबाद का रसगुल्ला सौ रुपये में बेचने पर भी पचास रुपये बचत हो जाती है। वहीं तीस रुपये किलो की पपड़ी आराम से अस्सी रुपये में बिक जाती है।
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मालूम हो कि इस दिवाली, जो पुरानी मिठाई की दुकानें थीं वहां भी नकली मिठाइयां बिक रही हैं। त्योहारों पर कई मुनाफाखोर दुकान सजा कर बैठे हैं जो सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। यह दुकानें धौरहरा कस्बे सहित सिसैया चौराहा रमियाबेहड़, ढखेरवा चौराहा, कफारा, अभयपुर, ईसानगर, खमरिया, बसढिय़ा, हसनपुर कटौली में लगी हैं। जिम्मेदार अधिकारी जानकर भी अनजान बने हुए हैं।
मूंगफली दाने को हरा कर देते हैं पिस्ते जैसा टच
नकली पपड़ी बनाने में पीले केमिकल युक्त रंगों का प्रयोग होता ही है। उसके ऊपरी हिस्से को ड्राई फ्रूट से सजा दिखाने के लिए मूंगफली के दानों को हरे रंग में रंग कर पतले कटर से टुकड़ा कर लगाते हैं, जो देखने में पिस्ता जैसा दिखता है, जो काफी हानिकारक है।
केमिकल युक्त रंगीन मिठाइयों से हो सकता है कैंसर
सीएचसी प्रभारी डॉ. आरआर वर्मा कहते हैं कि केमिकल युक्त नकली रंगीन मिठाइयां सेहत के लिए हानिकारक हैं। इनके सेवन से पाचन क्रिया प्रभावित हो सकती है। दस्त शुरू होकर बुखार भी आता है। ज्यादा खाने से गुर्दे और लीवर भी खराब हो सकते हैं। ज्यादा दिनों तक खाने से कैंसर जैसी बीमारी भी हो सकती है।
मिलावटी मिठाइयां किसी भी कीमत पर बिकने नहीं देंगे। धौरहरा क्षेत्र भी टीम को भेजा जाएगा। घटिया या नकली मिठाई मिलने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
- डॉ. अमर सिंह वर्मा, अभिहित अधिकारी, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशास
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दिवाली पर आप मिठाई खरीदने जा रहे हैं तो सावधान हो जाएं। बाजार में गाजियाबाद, बरेली से नकली मिठाइयां आ चुकी हैं। इसमें पीली सोन पपड़ी, रसगुल्ला, बर्फी भी हैं। यह दूसरी मिठाइयों की तुलना में देखने में ज्यादा अच्छी हैं और सस्ती भी हैं, लेकिन सेहत के लिए हानिकारक है। इन मिठाइयों को कल दिवाली और भैयादूज पर खपाने की तैयारी है।
दीवाली पर कुछ मुनाफाखोर अपने फायदे के लिए आपकी सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो हजारों टन नकली मिठाइयां इलाके की दुकानों पर पहुंच चुकी हैं। यह मिठाइयां गाजियाबाद, मुरादाबाद और बरेली से आ रही हैं। इन मिठाइयों में प्रमुख रूप से पीले रंग की केमिकल युक्त पपड़ी और सिंथेटिक रसगुल्ला है। यह रसगुल्ला सफेद और लाल रंग का छेना है। देखने में यह मिठाई आम मिठाई से ज्यादा अच्छी दिखती है।
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दुकानदार इसे सौ से डेढ़ सौ रुपये तक में बेचता है। नाम न छापने की शर्त पर एक दुकानदार ने बताया कि रसगुल्ला बनाने के लिए क्षेत्र में पर्याप्त दूध तक नहीं मिल पाता है। वह रसगुल्ला ढाई सौ रुपये किलो से कम में बेचने पर परता नहीं आता, जबकि गाजियाबाद का रसगुल्ला सौ रुपये में बेचने पर भी पचास रुपये बचत हो जाती है। वहीं तीस रुपये किलो की पपड़ी आराम से अस्सी रुपये में बिक जाती है।
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मालूम हो कि इस दिवाली, जो पुरानी मिठाई की दुकानें थीं वहां भी नकली मिठाइयां बिक रही हैं। त्योहारों पर कई मुनाफाखोर दुकान सजा कर बैठे हैं जो सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। यह दुकानें धौरहरा कस्बे सहित सिसैया चौराहा रमियाबेहड़, ढखेरवा चौराहा, कफारा, अभयपुर, ईसानगर, खमरिया, बसढिय़ा, हसनपुर कटौली में लगी हैं। जिम्मेदार अधिकारी जानकर भी अनजान बने हुए हैं।
मूंगफली दाने को हरा कर देते हैं पिस्ते जैसा टच
नकली पपड़ी बनाने में पीले केमिकल युक्त रंगों का प्रयोग होता ही है। उसके ऊपरी हिस्से को ड्राई फ्रूट से सजा दिखाने के लिए मूंगफली के दानों को हरे रंग में रंग कर पतले कटर से टुकड़ा कर लगाते हैं, जो देखने में पिस्ता जैसा दिखता है, जो काफी हानिकारक है।
केमिकल युक्त रंगीन मिठाइयों से हो सकता है कैंसर
सीएचसी प्रभारी डॉ. आरआर वर्मा कहते हैं कि केमिकल युक्त नकली रंगीन मिठाइयां सेहत के लिए हानिकारक हैं। इनके सेवन से पाचन क्रिया प्रभावित हो सकती है। दस्त शुरू होकर बुखार भी आता है। ज्यादा खाने से गुर्दे और लीवर भी खराब हो सकते हैं। ज्यादा दिनों तक खाने से कैंसर जैसी बीमारी भी हो सकती है।
मिलावटी मिठाइयां किसी भी कीमत पर बिकने नहीं देंगे। धौरहरा क्षेत्र भी टीम को भेजा जाएगा। घटिया या नकली मिठाई मिलने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
- डॉ. अमर सिंह वर्मा, अभिहित अधिकारी, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशास