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श्रीराम के मित्र बने सुग्रीव, फिर किया बालि का अंत
Updated Fri, 29 Sep 2017 11:50 PM IST
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श्रीराम के मित्र बने सुग्रीव, फिर किया बालि का अंत
- फोटो : लखीमपुर खीरी, अमर उजाला
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गोला गोकर्णनाथ।
श्रीरामलीला महोत्सव के आठवें दिन गोवर्धन मथुरा की आदर्श रामलीला रासलीला मंडल के कलाकारों ने राम सुग्रीव मित्रता और बालि वध के प्रसंग का मंचन कर श्रीराम के चरित्र का दर्शन कराया। वहीं 30 सितंबर को होने वाले रावण वध दशहरा मेला के लिए रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले मेला मैदान में खड़े हो गए हैं।
श्रीरामलीला महोत्सव में गोवर्धन मथुरा के कलाकारों ने मंचन में दिखाया कि बजरंगबली वन में भगवान श्रीराम और भ्राता लक्ष्मण को ऋष्यमूक पर्वत की ओर आते हुए देखते हैं तो वह उनका भेद जानने के लिए ब्राह्मण का रूप रखकर पता लगाने उनके पास जाते हैं। भगवान श्रीराम को जानकर हनुमान अपने रूप में आ जाते हैं और उनकी मित्रता सुग्रीव से कराते हैं। सुग्रीव की पीड़ा जानकर भगवान श्रीराम ने सुग्रीव बालि के युद्घ में बालि को मार गिराया।
बालि के रुदन पर भगवान श्रीराम ने कहा- कहहु बालि ताोहि देउ जियाई, राज करहु पंपापुर जाई। इस पर बालि ने कहा कि भगवान के हाथों मोक्ष पाकर वह धन्य हो गया है। अब उसे राज्य नहीं चाहिए। बालि ने अपने पुत्र अंगद को भगवान के शरण में दे दिया। प्रसंग देख दर्शक भाव विभोर हो गए।
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रावण वध आज, खड़े कर दिए पुतले
श्रीरामलीला महोत्सव में रावण वध दशहरा मेला के लिए मेला मैदान में रावण, कुंभकर्ण, मेघनाद के पुतले खड़े कर दिए गए हैं। अट्टहास करते हुए हाथों में तलवारें लिए पुतले आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। श्रीराम लीला कमेटी के अध्यक्ष जनार्दन गिरि, महामंत्री राजेश आनंद मिन्नी ने बताया कि दशहरा की तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं।
रामलीला में आज
- 30 सितंबर को मुख्य अतिथि एसडीएम योगानंद पांडे की मौजूदगी में रावण वध का मंचन होगा।
पुतलों से काफी लगाव रखते हैं बरकत
दशहरा मेला के पुतला बना रहे पलिया के काकूपुरियान निवासी बरकत अली ने बताया कि वह बचपन से ही अपने पिता स्व. फजलू रहमान के साथ पुतला बनाया करते थे। अब तीसरी पीढ़ी में उनका पुत्र चांद मोहम्मद और उनके पोता भी उनके साथ पुतला बनाते हैं। वह जिला मुख्यालय, पलिया, गोला सहित अन्य जिलों में भी दशहरे पर पुतले बनाने जाते हैं। उन्हें इन पुतलों से काफी लगाव है।
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श्रीरामलीला महोत्सव के आठवें दिन गोवर्धन मथुरा की आदर्श रामलीला रासलीला मंडल के कलाकारों ने राम सुग्रीव मित्रता और बालि वध के प्रसंग का मंचन कर श्रीराम के चरित्र का दर्शन कराया। वहीं 30 सितंबर को होने वाले रावण वध दशहरा मेला के लिए रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले मेला मैदान में खड़े हो गए हैं।
श्रीरामलीला महोत्सव में गोवर्धन मथुरा के कलाकारों ने मंचन में दिखाया कि बजरंगबली वन में भगवान श्रीराम और भ्राता लक्ष्मण को ऋष्यमूक पर्वत की ओर आते हुए देखते हैं तो वह उनका भेद जानने के लिए ब्राह्मण का रूप रखकर पता लगाने उनके पास जाते हैं। भगवान श्रीराम को जानकर हनुमान अपने रूप में आ जाते हैं और उनकी मित्रता सुग्रीव से कराते हैं। सुग्रीव की पीड़ा जानकर भगवान श्रीराम ने सुग्रीव बालि के युद्घ में बालि को मार गिराया।
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बालि के रुदन पर भगवान श्रीराम ने कहा- कहहु बालि ताोहि देउ जियाई, राज करहु पंपापुर जाई। इस पर बालि ने कहा कि भगवान के हाथों मोक्ष पाकर वह धन्य हो गया है। अब उसे राज्य नहीं चाहिए। बालि ने अपने पुत्र अंगद को भगवान के शरण में दे दिया। प्रसंग देख दर्शक भाव विभोर हो गए।
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रावण वध आज, खड़े कर दिए पुतले
श्रीरामलीला महोत्सव में रावण वध दशहरा मेला के लिए मेला मैदान में रावण, कुंभकर्ण, मेघनाद के पुतले खड़े कर दिए गए हैं। अट्टहास करते हुए हाथों में तलवारें लिए पुतले आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। श्रीराम लीला कमेटी के अध्यक्ष जनार्दन गिरि, महामंत्री राजेश आनंद मिन्नी ने बताया कि दशहरा की तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं।
रामलीला में आज
- 30 सितंबर को मुख्य अतिथि एसडीएम योगानंद पांडे की मौजूदगी में रावण वध का मंचन होगा।
पुतलों से काफी लगाव रखते हैं बरकत
दशहरा मेला के पुतला बना रहे पलिया के काकूपुरियान निवासी बरकत अली ने बताया कि वह बचपन से ही अपने पिता स्व. फजलू रहमान के साथ पुतला बनाया करते थे। अब तीसरी पीढ़ी में उनका पुत्र चांद मोहम्मद और उनके पोता भी उनके साथ पुतला बनाते हैं। वह जिला मुख्यालय, पलिया, गोला सहित अन्य जिलों में भी दशहरे पर पुतले बनाने जाते हैं। उन्हें इन पुतलों से काफी लगाव है।