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6,721 शिक्षकों की कमी, तो कैसे सुधरे शिक्षा के हालात
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6721 शिक्षकों की कमी, तो कैसे सुधरें शिक्षा के हालात
लखीमपुर खीरी। परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, जो बदहाली की एक वजह हो सकता है। विद्यालयों में 6721 शिक्षकों की कमी शिक्षण व्यवस्था और उसकी गुणवत्ता की पोल खोल रहे हैं। सबसे बुरा हाल नगर क्षेत्र के विद्यालयों का है, जहां 250 स्वीकृत पदों के सापेक्ष 26 शिक्षक ही कार्यरत हैं। ग्रामीण क्षेत्र में भी स्थिति अच्छी नहीं कही जा सकती, क्योंकि इनमें स्वीकृत पद 14925 के सापेक्ष 9428 शिक्षक ही कार्यरत हैं।
जनपद में कुल 3856 परिषदीय विद्यालय हैं, जिसमें 2719 प्राथमिक और 1137 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। ग्रामीण क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालयों में 1813 प्रधानाध्यापक पद स्वीकृत हैं, जिसमें 1150 पद रिक्त हैं। सहायक अध्यापक के 8800 पद स्वीकृत हैं, जिसके सापेक्ष 3321 पद रिक्त हैं। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 1125 प्रधानाध्यापक पद स्वीकृत हैं, जिसमें 480 पद रिक्त पड़े हैं। सहायक अध्यापक के 3181 पद स्वीकृत हैं, जिसमें भी 1540 पद रिक्त हैं। इसी तरह नगर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालयों में 85 प्रधानाध्यापक पद हैं, जिसमें 74 पद रिक्त हैं। सहायक अध्यापक के 165 पद हैं, जिसमें 160 पद रिक्त हैं। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक के आठ पद हैं, जिसमें पांच रिक्त हैं। सहायक अध्यापक के 42 पद हैं, लेकिन 35 पद रिक्त पड़े हैं।
लागू नहीं हो पाया टाइम टेबल
विद्यालयों में बच्चों को शैक्षिक माहौल देने के लिए टाइम टेबल (समय सारिणी) का विशेष महत्व होता है, लेकिन शिक्षकों की कमी से टाइम टेबल लागू नहीं किया जा सका है। कारण है कि स्वीकृत पदों के सापेक्ष 55 प्रतिशत ही शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें 10 प्रतिशत शिक्षक विभिन्न कारणों से अवकाश पर रहते हैं। करीब 50 प्रतिशत विद्यालयों में एक-एक शिक्षक कार्यरत हैं, जिनके जिम्मे कई तरह के काम रहते हैं।
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कुल 6721 शिक्षकों के पद रिक्त है। शिक्षकों की कमी को लेकर समय-समय पर शासन को सूचना भेजी जाती है। जल्द ही शिक्षकों की भर्तियां होने वाली है, जिससे कुछ हद तक कमी दूर हो सकेगी।
- बुद्ध प्रिय सिंह, बीएसए
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लखीमपुर खीरी। परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, जो बदहाली की एक वजह हो सकता है। विद्यालयों में 6721 शिक्षकों की कमी शिक्षण व्यवस्था और उसकी गुणवत्ता की पोल खोल रहे हैं। सबसे बुरा हाल नगर क्षेत्र के विद्यालयों का है, जहां 250 स्वीकृत पदों के सापेक्ष 26 शिक्षक ही कार्यरत हैं। ग्रामीण क्षेत्र में भी स्थिति अच्छी नहीं कही जा सकती, क्योंकि इनमें स्वीकृत पद 14925 के सापेक्ष 9428 शिक्षक ही कार्यरत हैं।
जनपद में कुल 3856 परिषदीय विद्यालय हैं, जिसमें 2719 प्राथमिक और 1137 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। ग्रामीण क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालयों में 1813 प्रधानाध्यापक पद स्वीकृत हैं, जिसमें 1150 पद रिक्त हैं। सहायक अध्यापक के 8800 पद स्वीकृत हैं, जिसके सापेक्ष 3321 पद रिक्त हैं। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 1125 प्रधानाध्यापक पद स्वीकृत हैं, जिसमें 480 पद रिक्त पड़े हैं। सहायक अध्यापक के 3181 पद स्वीकृत हैं, जिसमें भी 1540 पद रिक्त हैं। इसी तरह नगर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालयों में 85 प्रधानाध्यापक पद हैं, जिसमें 74 पद रिक्त हैं। सहायक अध्यापक के 165 पद हैं, जिसमें 160 पद रिक्त हैं। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक के आठ पद हैं, जिसमें पांच रिक्त हैं। सहायक अध्यापक के 42 पद हैं, लेकिन 35 पद रिक्त पड़े हैं।
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लागू नहीं हो पाया टाइम टेबल
विद्यालयों में बच्चों को शैक्षिक माहौल देने के लिए टाइम टेबल (समय सारिणी) का विशेष महत्व होता है, लेकिन शिक्षकों की कमी से टाइम टेबल लागू नहीं किया जा सका है। कारण है कि स्वीकृत पदों के सापेक्ष 55 प्रतिशत ही शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें 10 प्रतिशत शिक्षक विभिन्न कारणों से अवकाश पर रहते हैं। करीब 50 प्रतिशत विद्यालयों में एक-एक शिक्षक कार्यरत हैं, जिनके जिम्मे कई तरह के काम रहते हैं।
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कुल 6721 शिक्षकों के पद रिक्त है। शिक्षकों की कमी को लेकर समय-समय पर शासन को सूचना भेजी जाती है। जल्द ही शिक्षकों की भर्तियां होने वाली है, जिससे कुछ हद तक कमी दूर हो सकेगी।
- बुद्ध प्रिय सिंह, बीएसए