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...अब बिना अनुमति नहीं काटे जा सकेंगे कोई हरे पेड़
Updated Sun, 16 Sep 2018 05:36 PM IST
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बिना अनुमति नहीें काटे जाएंगे हरे पेड़
सरकार की अधिसूचना पर एनजीटी ने लगाई रोक
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश की 31 अक्तूबर 2017 की उस अधिसूचना पर स्थाई रोक लगा दी है जिसमें छह प्रजातियों के पेड़ों को छोड़कर बाकी सभी प्रजातियों के पेड़ों के कटान और अभिवहन के लिए वन विभाग से अनुमति लेने की बाध्यता खत्म कर दी गई थी। एनजीटी की मुख्य बेंच ने इस अधिसूचना को रद्द करने संबंधी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए 11 सितंबर को यह फैसला सुनाया है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने वन अधिनियम 1976 की धारा 21 में संशोधन करते हुए अधिसूचना जारी की थी जिसके अनुसार कि आम, साल, सागौन, खैर, महुआ और नीम इन छह प्रजाति के पेड़ों को छोड़कर अन्य प्रजातियों के पेड़ों के कटान और अभिवहन की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। इस आदेश के बाद प्रदेश भर में पेड़ों का अंधाधुंध कटान शुरू हो गया था। इससे पर्यावरण को काफी क्षति हो रही थी।
उत्तर प्रदेश सरकार की इस अधिसूचना को रद्द करने के लिए अरविंद कुमार शुक्ला, आलोक शुक्ला, निहाल अहमद, नीना शुक्ला, कुणाल यादव, कुमार अभिषेक और अमित ने एनजीटी में एक याचिका दायर की थी। इसके बाद एनजीटी ने इस अधिसूचना पर 15 दिसंबर 2017 को स्थगनादेश जारी कर दिया था। करीब एक साल तक चली सुनवाई के बाद एनजीटी ने अधिसूचना पर स्थाई रोक लगाने के आदेश जारी कर दिए।
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जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली एनजीटी की मुख्य पीठ में जस्टिस जावेद रहीम, जस्टिस एसपी वांगदी और एक्सपर्ट मेंबर नागिन नंदा शामिल रहीं। एनजीटी ने याची के अधिवक्ताओं की दलीलों से सहमति व्यक्त करते हुए प्रदेश सरकार की अधिसूचना पर स्थाई रोक लगाने का प्रार्थनापत्र मंजूर कर लिया। इस आदेश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार की 31 अक्तूबर 2017 की अधिसूचना निष्प्रभावी हो गई है। अब प्रतिबंधित प्रजाति के पेड़ों के साथ-साथ अन्य पेड़ों के कटान और अभिवहन की अनुमति लेना जरूरी होगा।
दुधवा टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि एनजीटी द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार के 31 अक्तूबर 2017 को जारी अधिसूचना पर स्थाई रोक लगने के बाद पेड़ों के कटान और अभिवहन संबंधी पुरानी प्रकिया लागू होगी।
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सरकार की अधिसूचना पर एनजीटी ने लगाई रोक
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश की 31 अक्तूबर 2017 की उस अधिसूचना पर स्थाई रोक लगा दी है जिसमें छह प्रजातियों के पेड़ों को छोड़कर बाकी सभी प्रजातियों के पेड़ों के कटान और अभिवहन के लिए वन विभाग से अनुमति लेने की बाध्यता खत्म कर दी गई थी। एनजीटी की मुख्य बेंच ने इस अधिसूचना को रद्द करने संबंधी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए 11 सितंबर को यह फैसला सुनाया है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने वन अधिनियम 1976 की धारा 21 में संशोधन करते हुए अधिसूचना जारी की थी जिसके अनुसार कि आम, साल, सागौन, खैर, महुआ और नीम इन छह प्रजाति के पेड़ों को छोड़कर अन्य प्रजातियों के पेड़ों के कटान और अभिवहन की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। इस आदेश के बाद प्रदेश भर में पेड़ों का अंधाधुंध कटान शुरू हो गया था। इससे पर्यावरण को काफी क्षति हो रही थी।
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उत्तर प्रदेश सरकार की इस अधिसूचना को रद्द करने के लिए अरविंद कुमार शुक्ला, आलोक शुक्ला, निहाल अहमद, नीना शुक्ला, कुणाल यादव, कुमार अभिषेक और अमित ने एनजीटी में एक याचिका दायर की थी। इसके बाद एनजीटी ने इस अधिसूचना पर 15 दिसंबर 2017 को स्थगनादेश जारी कर दिया था। करीब एक साल तक चली सुनवाई के बाद एनजीटी ने अधिसूचना पर स्थाई रोक लगाने के आदेश जारी कर दिए।
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जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली एनजीटी की मुख्य पीठ में जस्टिस जावेद रहीम, जस्टिस एसपी वांगदी और एक्सपर्ट मेंबर नागिन नंदा शामिल रहीं। एनजीटी ने याची के अधिवक्ताओं की दलीलों से सहमति व्यक्त करते हुए प्रदेश सरकार की अधिसूचना पर स्थाई रोक लगाने का प्रार्थनापत्र मंजूर कर लिया। इस आदेश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार की 31 अक्तूबर 2017 की अधिसूचना निष्प्रभावी हो गई है। अब प्रतिबंधित प्रजाति के पेड़ों के साथ-साथ अन्य पेड़ों के कटान और अभिवहन की अनुमति लेना जरूरी होगा।
दुधवा टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि एनजीटी द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार के 31 अक्तूबर 2017 को जारी अधिसूचना पर स्थाई रोक लगने के बाद पेड़ों के कटान और अभिवहन संबंधी पुरानी प्रकिया लागू होगी।